लौकिक और अलौकिक रास लीला-गम्मत . गुरू घासीदास जी का ब्राह्मणीकरण .

9.05. 2019

यह जांजगीर जिला के तालदेवरी गॉव का है बिर्रा से 5 km चाम्पा रोड ।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार


यहां बहुसंख्यक सतनामी है लगभग 500 छानी .सूत्रों के हवाले से पता चला है कि यहां खास अम्बेडकरवादी -गुरुघासीदासवादी है ,(मगर एक बात देखने को मिलता है, जब गुरुघासीदास जी का जयंती होता है तब यही अम्बेडकरवादी विचारधारा के लोग गुरुघासीदास वादी वर्तमान में चल रहें अलौकिक जपन भजन संत साधु मुनि काल निरंजन देवी अष्टांगी विचारधारा के हो जाते है )जहां 18 दिसम्बर गुरुघासीदास जयंती के रूप में याद किया जाता है, इन दिनों तीन दिन के लिए अलग -अलग तिथि में अलग-अलग प्रकार के नेता ,विधायक ,मुखिया तथाकथित बुद्धजीवी आते है और अपनी विचार रखते है ,नीचे दिख रहें फ़ोटो में आपको सतनाम जैतखाम दिखाई दे रहा होगा

जैतखाम के सामने निचले भाग में एक मूर्ति दिखाई दे रहा होगा इस मूर्ति में सही का मोटे धागे से बना जनेऊ,और शुद्ध कंठी माला से लबालब बना मूर्ति दिखाई दे रहा होगा जिसको लोग जाने अनजाने में नाम देते है यही गुरुघासीदास थे और ऐसा ही दिखते पहनते और रहते घूमते समाज सुधार का काम किये थे ऐसा लोगो के बीच (दमनकारी शोषकवादियों ने गुरुघासीदास के मूल इतिहास को दबाने के लिए तथाकथित कलयुग का ईश्वर देवता बनाकर पेस किये उसी के अनुसार लोक समाज में चल रहा उसे ही यहां भी लोगों में पिरोया जाता है ऐसा अधिकरतर लोगों का मानना है जबकि सतनाम आंदोलन के विविध आयामों के बारे में पता नहीं,नहीं! सतनाम आंदोलन के उपलब्धियों के बारे में जानकारियां है) कथा कहानी बनाकर प्रस्तुत किया गया है जिस पर खूब जपन -भजन अलौकिक आरती भजन किया जाता है ।


बताने का उद्देश्य है कि जब एक तरफ गुरुघासीदास को याद करते है तब यही अम्बेडकरवादी अलौकिक विचारधारा में आकर ब्राम्हणवाद के पैजामा पहनाने लगते है और जब डॉ अम्बेकडकर साहब के जयंती मानते है या उनके विचारों की बात करते है तब शुद्ध रूप से खांटी अम्बेडकरवादी बन कर ऐसे ब्राम्हणवाद का विरोध करते है जैसे ;लोगों को लगता होगा यहि लोग है असली खिलाड़ी जो गंगा जाते है गंगा दास बन जाते है और यमुना जाते है यमुना दास बन जाते है हरि जपन को जब इनकी पारी आये तो हरि दास बन जाते है ।
जब gss ने यहां के कुछ लोगों से संपर्क कर gss जो गुरुघासीदास व सतनाम के मूल विचारधारों को समाज जहान में ले जा रहा है उसी तरीके का विचार यहां रखना चाहिए ,तब इस पर एक bsp नेता ने तपाक से कहा छोड़ो न जो चल रहा है वही चलने दो !मैंने कहा क्या चल रहा है?
उन्होंने फिर चुप मन से धीरे कहा अम्बेडकर साहब क्रांतिकारी थे उन्होंने 5000 हजार बुक लिखा है उसके जैसे दुनिया मे कोई पैदा न लिया था न लिया है ।

मैंने कहा हूँ! और गुरुघासीदास के बारे में कुछ जानकारी हो तो बताए-?

तब उस बंदे ने तड़ा -तड़ गिनने लगे
गुरुघासीदास संत ए कलयुग के भगवान ए ,ओ बहुत कुछ समझ समाज को सुधारने का काम किया था ,

मैंने पूछा ,समाज को कैसे सुधार दिए थे एकाक बताओं न ?

उन्होंने फिर कहा – जंगल मे धुनि रमाकर सत्पुरुष पिता को जीत लिए थे तब बहुत से लोगो को अमृत दे कर जीवित किये
सात सिद्धान्त गिनाने लग गए।
इस तरह से ओ पढन्ता अपनी ज्ञान बघार रहें थे ।और कह रहे थे

शिक्षा ही सब कुछ है बाकी धरम -वरम सब बेकार हमें देखों शिक्षित है तभी तो ज्ञान कि दो बातें बता दिया आपको ।

मैंने कहा हूँ।

उन्होंने कहा यहाँ सब बसपा पार्टी को वोट अभी करते है।

मैँने कहा हूँ तभी इतना ज्ञान भरा है वहा से मैं निकल चला

टिप-नीचे फ़ोटो कुछ आप देख रहें है उसमें एक तरफ क्या है? और दूसरी तरफ क्या है ?तुलना करिए और ब्राम्हणवाद किसे कहते है ?अपना प्रतिक्रिया जरूर दीजिए?

एम डी सतनाम , गुरू घासीदास सेवादार संस्थान .

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