डा. संदीप उपाध्याय की रिपोर्ट पत्रिका.काम के लिये .

रायगढ़ . सारंगढ़ विधानसभा के बरमकेला में आने वाले कुछ वर्षों में भूमिगत जल स्रोत पूरी तरह से सुख जाएंगे । ऐसी स्थिति में लोगों को बूंद बूंद पानी के लिए तरसना पड़ जाएगा । यदि शासन प्रशासन सहित स्थानीय लोग अभी से भू जल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिए तो आने वाला समय यहां के लिए भयावह हो सकता है । यहां जीव जंतुओं सहित लोग भी बिना पानी दम तोड़ते नजर आ सकते हैं ।


यह बात और कोई नहीं बल्कि केद्रीय भू जल संरक्षण से जारी रिपोर्ट में कही गई है । इस रिपोर्ट की माने तो छत्तीसगढ़ के 21 ब्लॉक क्रिटिकल कंडीशन में पहुंचे चुके हैं ।

यहां का भूमिगत जल स्तर चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुका है । इन सभी 21 ब्लाकों में जल स्तर 74 से 100 फीसदी तक सुख चुके हैं । सबसे बुरी स्थिति बालोद जिले के गुरुर क्षेत्र में हैं । इसके बाद दुसरा नंबर रायगढ़ जिले का
सारंगढ़ लातर्गत बरमकेला आता है । यहां की बात करें तो यहां 98 , 73 प्रतिशत भू जल सूख चुका है । ऐसे में बरमकेला अंचल के लोगों को मात्र 1 . 27 प्रतिशत पानी जीवन यापन के लिए बचा है । यदि वह भू जल संरक्षण को लेकर नहीं चेते तो यह पानी भी खत्म हो जाएगा ।

वर्षा जल के संरक्षण को लेकर नहीं कोई पहल

शासन प्रशासन गिरते भू जल स्तर को लेकर चिंतित तो है , जमीनी हकीकत पर जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है । वाटर शेड परियोजना एवं वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बजट के अभाव में दम तोड़ चुकी हैं । वहीं किसान । भी गर्मी में धान की फसल को लेकर बेतहाशा पानी बर्बाद कर रहे हैं । इतने अधिक मात्रा में बोर हो गए हैं कि उनसे भू जल दोहन क्षमता से अधिक मात्रा में किया जा रहा है । ऐसे में इन किसानों को जागरूक करने को लेकर भी कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है ।

जिले में बरमकेला और पुसौर सेमी क्रिटिकल ब्लॉक की श्रेणी में आते हैं । भू जल संरक्षण का कार्य नरवा गुरुवा घुरवा बारी योजना के तत किया जा रहा है । गर्मी में होने वाली धान की फसल में भी पानी । काफी मात्रा में व्यय हो रहा है ।

पीएचई के पास जल संरक्षण की योजना नहीं

शासन के पास जब भी पेयजल को लेकर सवाल जाते हैं तो सबसे पहले पीएचई विभाग को जवाब देना पड़ता है । जबकि हकीकत यह कि पीएचई केवल पानी की उपलब्धता को देखती हैं । भूजल संरक्षण को लेकर पीएचई के पास कोई योजना नहीं है न ही । जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों के पास योजना है भी तो वह इसे लेकर सतर्क नही दिख रहे है।

  • संजय सिंह ईई पीएचई रायगढ .