प्रधानमंत्री ने सीकर रैली में ‘मीटू-मीटू..अरे तेरी मीटू’ कहकर मीटू आंदोलन का मज़ाक उड़ाया

लोकवाणी से साभार . 6.05.2019

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रितिका

तारीख 3 मई, साल 2019। राजस्थान का सीकर जिला। इस दिन सीकर जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली थी। अपनी आदत के अनुसार प्रधानसेवक मुद्दों पर बात करने की जगह विपक्ष को कोस रहे थे। वह कह रहे थे- “जब हमने सर्जिकल स्ट्राइक की तब हमें लोगों का प्यार मिला इसलिए अब कांग्रेस भी दावा कर रही है कि उसने भी सर्जिकल स्ट्राइक की, कांग्रेस कह रही है- मीटू-मीटू..अरे तेरी मीटू।” प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी के शब्द बिल्कुल यही थे। जिस तरीके से वह बार-बार मीटू-मीटू कह रहे थे उससे कहीं ये नहीं लगता कि उन्हें नहीं पता था की मीटू शब्द का अर्थ क्या। प्रधानसेवक की पार्टी के मंत्री पर ही 17 से अधिक महिला पत्रकारों ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे, इसलिए मुझे लगता नहीं उन्हें इस बात का इल्म नहीं है कि मीटू सिर्फ एक शब्द नहीं अपने आप में एक बड़ा आंदोलन रहा है।

भाषा के स्तर पर मैंने आज तक इतना गलीच प्रधानसेवक नहीं देखा, जो कभी डिस्लेक्सिया, कभी मीटू, कभी पिछड़ी जातियों, कभी किसी की पत्नी, कभी किसी की नागरिकता तो कभी किसी दिवंगत प्रधानमंत्री का उपहास उड़ाने से बाज नहीं आते। बीते 3 मई को सीकर में जब प्रधानसेवक मीटू-मीटू कहकर चटकारे ले रहे थे तब सबका ध्यान कांग्रेस की आलोचना पर गया। किसी ने यह ध्यान देना जरूरी नहीं समझा कि प्रधानसेवक ने मीटू अभियान का भी मजाक बनाया। वैसे मुझे उम्मीद भी नहीं थी कि प्रधानसेवक की यह लाइन उनकी आलोचना की आधार बनेगी। प्रधानसेवक की आलोचना करने वाले मीडिया संस्थान भी मीटू वाली लाइन को स्किप कर सीधा सर्जिकल स्ट्राइक पर जा कूदे।

प्रधानसेवक जब मंच से मीटू-मीटू कहकर कांग्रेस का मजाकर उड़ा रहे थे तब शायद वह भूल गए थे कि भारत में मीटू के दौरान जिस पर सबसे अधिक महिलाओं ने आरोप लगाए वह उनकी ही पार्टी के मंत्री एमजे अकबर हैं। वही एमजे अकबर जिन पर एक के बाद एक महिला पत्रकारों ने यौन शोषण के आरोप लगाए लेकिन बीजेपी के किसी मंत्री का मुंह तक नहीं खुला, तो प्रधानसेवक से क्या ही उम्मीद की जा सकती है। बतौर कथित आरोपी एमजे अकबर आज भी आरोप लगाने वाली महिलाओं के खिलाफ केस लड़ रहे हैं। मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भी एमजे अकबर बड़ी शान के साथ ट्विटर पर अपने नाम के आगे चौकीदार भी लगा चुके हैं। जिस तरीके से बीजेपी और प्रधानसेवक खुद बम ब्लास्ट की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर की उम्मीदवारी को सही बताने में जुटे हैं। प्रधानसेवक के इस मीटू वाले बयान के बाद मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा कि वह एमजे अकबर के कृत्यों को भी जायज ठहराने लगेंगे और मीटू शब्द को एक मजाक बनाकर रख देंगे। वैसे भी बीजेपी इस कला में माहिर रही है।

अपने भाषण के दौरान जब प्रधानसेवक यह लाइन कह रहे हैं- मीटू-मीटू, तब उनकी भाव-भंगिमा भी गौर करने लायक है। वह कहते हैं- मीटू-मीटू और फिर रैली में उन्हें सुनने आई मर्दों की भीड़ ठठाकर हंस पड़ती है। इसके बाद प्रधानसेवक और ताव में आकर कहते हैं- अरे तेरी मीटू, तब वह टॉक्सिक मैस्कुलैनिटी की जीती जागती मिसाल नज़र आते हैं। उनके साथ हंसने वाली भीड़ को भले ही मीटू का मतलब न पता हो लेकिन मंच पर कांग्रेस को ताल ठोककर गाली देने वाली मर्दवादी छवि उन्हें तालियां बजाने पर मजबूर कर देती है। हमारे समाज को ऐसा ही मर्दवादी अहंकार लुभाता है वरना सवंदनशील और संयमित भाषा वाले नेताओं के भाषणों को कौन सुनता है। जितनी हेडलाइनें आजम खान के अंडरवियर वाले बयान पर बनती हैं उतने शीर्षक हमें रोजगार, अर्थव्यवस्था या शिक्षा पर देखने को नहीं मिलती।

खैर, प्रधानसेवक की यह लाइन बताती है कि वह न सिर्फ एक अहंकारी मर्दवादी सोच वाले इंसान हैं बल्कि वह अव्वल दर्जे के असंवेदनशील व्यक्ति भी हैं। भले वह देश के प्रधानमंत्री हो लेकिन उनका व्यक्तित्व, उनकी भाषा, उनके भाषण पूरी तरह मर्दवारी अहंकार की बुनियाद पर ही टिकी है।

प्रधानसेवक के भाषण की यह लाइन भारतीय महिला को सुननी चाहिए, खासकर उन महिलाओं को जिनकी भागीदारी मीटू अभियान में बेहद अहम रही थी। प्रधानसेवक फिलहाल तो इस लोकतांत्रिक देश के सबसे महत्वपूर्ण पद को संभाल रहे हैं लेकिन बतौर नारीवादी मेरे लिए वह उन पुरुषों की भीड़ में शामिल हैं जिनके लिए मीटू का दौर महज एक मजाक भर था।

प्रधानसेवक के सीकर वाले भाषण को आप यहां सुन सकते हैं

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