नोहर दास सतनामी की कहानी जिसे अपनो और कोर्ट कचहरी ने कर दिया बर्बाद .

एम डी सतनाम की रिपोर्ट जीएसएस

इनके न माँ रहें न पिता रहें न भाई रहे न बीवी न अपने कहने वालों ने इनको साथ दिया एक बेटी है जो न जाने नोहरदास के जिंदा होने के बावजूद एक झूठे पिता बनाकर रजिस्ट्रार में खड़ा कर 18 एकड़ जमीन में से 9 एकड़ (,सिंचित )भूमि गांव के ही रहने वाले कुछ आपराधिक किस्म के लोगों के साथ साठ -गांठ कर बेटी -दामांद ने अपने नाम लिखवा लिया था ।


यह घटना बीते 20-22 साल पहले कि है जब नोहर दास अच्छा खासा चल फिर सकता था ।आज ए शख्स अपने ही उस 9 एकड़ जमीन को पाने न जाने बरसो लग गए कोर्ट का चक्कर लगाते -लगाते मगर इनको अभी तक न्याय नहीं मिल पाया है जब हमने इनको पूछा तब इन्होंने कहा कोई वकील नहीं है जो मेरे केश को सही ढंग से लड़ सके बहुतो को मैंने अपना केस देते आया मगर कुछ ने तो उन गुनहगारों से मिली भगत कर केश छोड़ देते रहें हैं ,कुछ लोगों ने समय बर्बाद किया पेशी बांधते रहें उसका चक्कर मैं काटता रहा हूँ।मगर मुझे सही रूप से आज भी वकील नहीं मिल पाया जो मुझे और न देरी कर मेरे जिंदा रहते मुझे न्याय दिला सकें
आज भी यह नोहर दास सतनामी न्यायालय कि ओर भरोषा कर अपने दो पैरों से अक्षम दो बेड़ी के सहारे टेकते -टेकते अपने गॉव से कोसो दूर न्यायालय का चक्कर काट रहें है।


इनका कहना है बेटी ने मुझे धोखा दिया मेरे जगह दूसरे को बाप बनाकर 9 एकड़ जमीन अपने नाम लिखवा लिया ,कल हो सकता है ओ मुझे जहर ही दे कर मार न डालते ,आखिर मेरे मरने के बाद सारी संपत्ति का वारिस तो वही रहेगी।लेकिन मुझे मेरे जिंदा रहते न जाने मेरी बेटी ने क्यों धोखे से मेरी जमीन हड़पना चाहा आज उस अपने 9 एकड़ जमीन को प्राप्त करने कोर्ट का चक्कर लगाते बरसो बीत रहा है ।

क्या इंसाफ जिंदा है या गुनहगार जिंदा है ?


इस आस में अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में भी विकलांग होकर भी लड़ रहें है नोहर दास ।

टीप:- नोहर दास सतनामी के चर्चा उपरांत बताये अनुसार।

नाम -नोहर दास सतनामी
ग्राम-बइहाकापा
जिला -मुंगेली(छ. ग.)

Md सतनाम gss।

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