ख़ाली घर, ख़ून के छींटे, यहाँ भी, वहाँ भी

ख़ाली घर, ख़ून के छींटे, यहाँ भी, वहाँ भी

ख़ाली घर, ख़ून के छींटे, यहाँ भी, वहाँ भी


भारत, कश्मीर, अरनिया, गाँव का आदमी

भारत और पाकिस्तान के सुरक्षा बलों के बीच होने वाली गोलीबारी में अब तक कम से कम 19 लोग मारे जा चुके हैं. यह कश्मीर में पिछले एक दशक के सबसे हिंसक संघर्षों में से एक है.
सैकड़ों गाँव वाले अपने घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं. हालाँकि दोनों देश 2003 में संघर्ष विराम पर सहमत हुए थे लेकिन दोनों ने एक-दूसरे पर गतिरोध की शुरुआत करने का आरोप लगाया है.
बीबीसी के संजॉय मजुमदार और शाएमा ख़लील ने भारत और पाक दोनों तरफ़ के गाँवों का दौरा किया और जानने की कोशिश की है कि किस तरह आम नागरिकों को सीमा पर जारी तनाव का शिकार बनना पड़ा है.

संजॉय मजुमदार, भारत प्रशासित कश्मीर

सुबर्णा देवी अपने आँगन में पड़ी एक चारपाई की तरफ़ दिखाकर कहती हैं, “जब गोला गिरा तो यहीं बाहर चारपाई पर सो रही थे. वो तुरंत मारे गए.”
भारत प्रशासित कश्मीर के अरनिया सेक्टर स्थित सीमावर्ती गाँव के उनके घर में पाकिस्तानी गोला गिरा जिसमें उनके भाई और भाभी मारे गए.
उनके घर की दीवारों पर गोलों के छर्रों के निशान हैं. पूरे घर में चप्पलें बिखरी हैं, बच्चों की साइकिल उलटी पड़ी है.

भारतीय महिला, अरनिया, कश्मीर

ज़मीन पर एक धब्बे को दिखाते हुए सुबर्णा कहती हैं, “देखिए, अब भी आप ख़ून के धब्बे देख सकते हैं.”
दूसरे सीमावर्ती गाँवों की तरह यह गाँव भी ख़ाली हो चुका है.
घरों में ताले लगे हैं. कोई आदमी दिखाई नहीं देता, बस कुछ जानवर और कुत्ते मौजूद हैं.
धान के हरे-भरे खेतों के बीच कंटीली बाड़ लगी हुई है. यह भारत और पाकिस्तान की सीमा है.
यहाँ चारों तरफ़ अजीब सी शांति है. यहाँ कुछ निगरानी टॉवर हैं जिन पर कुछ सैनिक तैनात हैं. लेकिन यह बिल्कुल भी महसूस नहीं होता कि यह वही सीमा है जहाँ पिछले कुछ सालों में दोनों देशों की सेनाओं के बीच भारी गोलीबारी हुई है.
हम गाड़ी से जा ही रहे थे कि हमें एक के बाद एक दूर से आते धमाकों की आवाज़ सुनाई दी.
20 मिनट के अंदर तीन मोर्टार दाग़े गए.
इसी वजह से हज़ारों गाँव वालों को घर छोड़कर भागना पड़ा है. बहुत से गाँववालों ने अस्थाई ठिकानों में शरण ले रखी है.

खेत और रोज़ी-रोटी वहाँ, हम यहाँ

महिलाएँ, क्षतिग्रस्त घर, भारत प्रशासित कश्मीरभारत प्रशासित कश्मीर के एक गाँव में गोलीबारी में अपने घर को पहुँचे नुकसान का जायजा लेती हुई.

अरनिया से 10 किलोमीटर दूर स्थित सालेहर के सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के गलियारों, कक्षाओं, बरामदों और खेल के मैदान शरण लेने वाले गाँववालों से भरे हुए हैं.
यहाँ मौजूद सत्या देवी कहती हैं, “एक सुबह अचानक गोलीबारी शुरू हुई और रात भर जारी रही. हमने जो कपड़े पहन रखे थे उन्हीं के साथ निकल गए. हमने कुछ और नहीं लिया.”
स्कूल के एक कोने में एक अस्थाई रसोई में दोपहर के खाने के लिए चावल और मसूर की दाल पक रही है.
पास के गाँव से आए भारत भूषण कहते हैं, “हम वापस नहीं जाना चाहते. हम मरना नहीं चाहते. लेकिन हमारे खेत और रोज़ी-रोटी वहाँ है. हम क्या करें?”
यहाँ अचानक बढ़े तनाव से कई लोग चकित हैं. इस तनाव के लिए ज़्यादातर लोग पाकिस्तान को दोषी ठहरा रहे हैं.
वहीं कुछ लोगों को उम्मीद है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो इससे पहले इसपर क़ाबू पा लिया जाएगा.

शाएमा ख़लील, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर

इरम शहज़ादी, महिला, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर

पाकिस्तान का उनींदा सा गाँव धमाला एक ऐसा इलाक़ा है जहाँ आमतौर पर गोलाबारी नहीं होती लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहाँ गोलाबारी हो रही है.
भारत की सीमा से कुछ ही दूर पर स्थित यह गाँव परमाणु शक्ति सम्पन्न दोनों देशों के बीच चल रही ताज़ा झड़प का शिकार हो गया है.
ईद के दौरान भी सीमा पर गोलीबारी चलती रही है.
पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल ताहिर जावेद ख़ान के अनुसार पिछले कुछ हफ़्तों में भारत की तरफ़ से की जाने वाली गोलाबारी में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है.
जनरल ख़ान कहते हैं, “पिछले एक दशक में यह सबसे भारी गोलाबारी है. मेरा उन्हें (भारत को) संदेश है कि कृपया इसे कम करें.”
उनके अनुसार भारत दिन प्रति दिन उग्र होता जा रहा है.
एक हफ़्ते पहले जब से यह झड़प शुरू हुई है तब से 11 पाकिस्तानी नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमें से तीन धमाला के हैं.
अख़्तर के परिवार में गोलाबारी से हुआ नुक़सान देखा जा सकता है. एक दीवार में गोलों से छेद हो गए हैं, बच्चों की चप्पलें बिखरी हैं, ख़ून में सने तकिए के गिलाफ़ और कमीज़ पड़े हुए हैं. मोर्टार के गोलों के टुकड़े फ़र्श पर बिखरे हुए है.

दुनिया उजड़ गई

महिला, धमाला गाँव, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर

धमाला गाँव में मारे जाने वाले तीनों लोग अख़्तर के परिवार के थे. पड़ोसियों ने बताया कि गोलेबारी में उनके तीन में से दो बेटे और उनकी दादी मारी गईं. उनका घर ख़ाली हो चुका है.
पास के अस्पताल में मुझे बच्चों की माँ मिल गईं.
इरम शहज़ादी अपने एकमात्र बच्चे छह वर्षीय बेटे अक़ील अख़्तर के बिस्तर के सिरहाने बैठी हुई हैं. अक़ील के हाथ और चेहरे पर पट्टियाँ बंधी हुई हैं और वो अपनी माँ के बग़ल में आराम से सो रहे हैं.
जब मैंने उनसे पूछा कि उनके परिवार के साथ क्या हुआ तो वो रो पड़ीं.
उन्होंने कहा, “मेरे बच्चों ने नए कपड़े पहन रखे थे. हम लोग ईद मनाने जा रहे थे. अब वो इस दुनिया में नहीं हैं.”
उनकी रुलाई रोके नहीं रुकती.
वो कहती हैं, “मेरी पूरी दुनिया ही उजड़ गई. अब मैं कभी गाँव नहीं जा सकती.”
अस्पताल के बिस्तर पर नींद में करवट बदल रहे अक़ील को अभी नहीं पता है कि उनके भाई अब नहीं रहे.
भारत और पाकिस्तान दोनों एक दूसरे पर नागरिकों को निशाना बनाने और संघर्षविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.
सीमा पर जारी मौजूदा संघर्ष रुकेगा या किस दिशा में बढ़ेगा इसका किसी को अंदाज़ा नहीं है.
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