आज भी अदानी कंपनी के एक विज्ञापन में भी प्रधानमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल.

अपना मोर्चा .काम से आभार सहित .

रायपुर. अब अडानी कंपनी के एक विज्ञापन में भी प्रधानमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है.मंगलवार 30 अप्रैल को प्रधानमंत्री की तस्वीर वाला यह विज्ञापन दैनिक भास्कर के पृष्ठ क्रमांक 9 में प्रकाशित हुआ है. यह भी संभव है कि अलग-अलग संस्करण में विज्ञापन की जगह बदल गई हो, लेकिन इस विज्ञापन में प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ दावा किया गया है कि कंपनी भारत सरकार से मान्यता प्राप्त है और पूरे भारत में पांच हजार बायो डीजल पंप निर्माण का लक्ष्य पूरा करने जा रही है. विज्ञापन में कंपनी के कुछ फोन नंबर और सूरत ( गुजरात ) का पता दिया गया है. विज्ञापन के ठीक बाजू में बायोडीजल को ईंधन का बेहतरीन विकल्प बताते हुए एक आर्टिकल भी छापा गया है. ( शायद यह भी विज्ञापन का अंश हो. ) लेकिन इस विज्ञापन को देखकर छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती रमन सरकार का वह नारा भी याद आता है- डीजल नहीं अब खाड़ी से… डीजल मिलेगा बाड़ी से. जब छत्तीसगढ़ में रतनजोत से बायोडीजल बनाने की योजना फ्लाप हो गई तब कांग्रेस के मोहम्मद अकबर का नारा था- न झाड़ी में न बाड़ी में…. क्या वापस जाय खाड़ी में.

आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या है इस विज्ञापन में जिसका जिक्र हो रहा है. सबसे बड़ी बात तो यही है कि पूरे देश में पिछले पांच सालों में अगर प्रधानमंत्री के रिश्तों को अगर किसी तरह की कोई चर्चा हुई है तो वह अंबानी और अडानी ही है. प्रधान सेवक पर यह आरोप लगता रहा है कि वे अंबानी और अडानी को उपकृत करने का काम करते रहे हैं. गौरतलब है कि वर्ष 2016 में मुकेश अंबानी की रिलायंस कंपनी ने अपने एक विज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल किया था तब फेसबुक, ट्विटर सहित अन्य माध्यमों में मोदी की जमकर आलोचना देखने को मिली थीं. भले ही रिलायंस इंडस्ट्री ने अपने विज्ञापन डिजिटल इंडिया को आधार बनाया था लेकिन तब यह सवाल उठा था कि क्या एक प्रधानमंत्री को किसी निजी कंपनी का ब्रांड एम्बेसडर बनना चाहिए था.जब इस मामले की गूंज संसद में सुनाई दी तब सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने यह माना था कि जियो के विज्ञापन में प्रधानमंत्री की तस्‍वीर छापने और दिखाने के लिए कंपनी की ओर से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गयी थीं. उन्होंने इस मामले में उचित कार्रवाई के संकेत भी दिए थे. बाद में यह बात भी सार्वजनिक हुई कि जियो कंपनी को पांच सौ रुपए का जुर्माना लगाया गया है.

कंपनी नहीं कर सकती व्यावसायिक इस्तेमाल

राष्ट्रीय प्रतीक चिह्नों और नामों के गलत इस्तेमाल को लेकर 1950 में बने कानून के सेक्शन-3 के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपने व्यापारिक या कारोबारी उद्देश्य के लिए राष्ट्रीय प्रतीक चिह्नों और नामों का केंद्र सरकार या सक्षम अधिकारी से अनुमति लिए बगैर इस्तेमाल नहीं कर सकता. इस कानून के तहत करीब तीन दर्जन नामों और चिह्नों की सूची तैयार की गयी है, जिनका कोई व्यक्ति सरकारी अनुमति के बिना अपने कारोबारी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता. इनमें देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्य के गवर्नर, भारत सरकार या कोई राज्‍य सरकार, महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, संयुक्त राष्ट्र संघ, अशोक चक्र और धर्म चक्र शामिल हैं. अब अडानी को प्रधानमंत्री की तस्वीर के उपयोग के लिए अनुमति दी गई है या नहीं यह अभी साफ नहीं है.

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