नदी किनारे बसे फिर भी प्यासे, बुनियादी सुविधाओं का अभाव

नदी किनारे बसे फिर भी प्यासे, बुनियादी सुविधाओं का अभाव

झरन बुझाता है प्यास
जिला मुख्यालय स्थित जिला जेल से महज 2 किमी दूर स्थित है। ग्राम पंचायत तुड़पारास का आति ग्राम मरकानार। तीन पारा वाले इस गांव में 75 आदिवासी परिवार रहते हैं। नदी किनारे होने के बावजूद बस्ती की मुख्य समस्या पेयजल है। 22 घर वाले ठोठापारा में कहने को तो तीन हैण्डपंप है, लेकिन एक ही चालू है। कड़तीपारा में 26 घर हैं, लेकिन यहां का हैण्डपंप 5 वर्षों से लाल पानी दे रहा है, इसलिए ग्रामीण नदी किनारे के एक झरन से अपने प्यास बुझाते हैं। बारिश के दिनों में यहां के लोग पानी हेतु ठोठापारा जाते हैं। जूनापारा में 27 घर हैं। यहां 5 हैण्डपंप है, लेकिन सभी हैण्डपंपों से लौहयुक्त जल प्राप्त होता है।
नहीं सुधरी सड़क
मरकानार के रहवासी अच्छी सड़क नहीं होने के कारण जिला मुख्यालय आने के लिए काफी कष्ट उठाते हैं। यहां के मेहतर राम प्रधान, सुखराम, अमरनाथ, कल्लूराम, सुमेश, जग्गूसिंह मरकाम, नीलबती प्रधान, सुमित्रा नाग, काली सिंह नाग और राजूराम नाग ने बताया कि जेलबाड़ी – ठोठापारा पहुंच मार्ग पर मुरमीकरण हेतु आईएपी योजनांतर्गत वर्ष 2010-11 में 6 लाख 79 हजार रुपये स्वीकृत हुआ था, परंतु तीन साल बाद भी सड़क दुरूस्त नहीं हो पाया है। कुम्हाररास के पनारापारा से सड़क बनाने का कार्य शुरू हुआ था, पर यह सड़क बस्ती तक नहीं पहुंची। वहीं इतने ही साल पहले बस्ती की गलियों में बनाई गई सीसी सड़क खराब हो गई है।
सड़क की लाइटें वर्षों से बंद
ग्रामीणों ने बताया कि बस्ती में सड़क लाइट के नाम पर सोलर पैनल हैं, लेकिन अधिकांश खंभों की लाइट और बैटरी की चोरी हो गई है। पंचायत द्वारा बल्ब लगाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। इन्होंने बताया कि 15 वर्र्षो से बस्ती के आधा दर्जन आवासहीनों को इंदिरा आवास और इतने ही वृद्घों को पेंशन राशि की मांग की जा रही है।
बिजली नहीं फिर भी आता है बिल
ग्रामीणों ने बताया कि बस्ती में बोड़ा पिता गुटा , सोना पिता जीरू, राजू पिता देवा सहित आधा दर्जन ऐसे लोग हैं जिनके घर बिजली नहीं है फिर भी दो साल से इन्हें बिजली बिल थमाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली बिल तो प्रतिमाह भेजा जा रहा है, लेकिन विद्युत मंडल से रिडिंग करने कोई नहीं आता। विद्युत मंडल जितनी भी राशि का बिल ग्रामीणों को देती है। उतनी राशि मण्डल में जमा करने ग्रामीण मजबूर हैं।
दो-तीन माह में पेंशन
बस्ती के चमरा राम सहित आधा दर्जन वृद्घ जनों को आवेदन के बावजूद वृद्घा पेंशन राशि नहीं मिल रही है। मरकानार वासियों को आरोप है कि सरपंच सचिव द्वारा पेंशन राशि प्रकरण तैयार करने में भेदभाव बरता गया है। तुड़पारास और डेगलरास में ऐसे लोगों को पेंशन प्रदान किया जा रहा है जिसके वे हकदार भी नहीं हैं। जिन लोगों को निराति और वृद्घा पेंशन की पात्रता है उन्हें भी दो तीन महीने में राशि प्रदाय की जाती है।
नहीं आते पंच सरपंच
ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव जीतने के बाद मरकानार का पंच रतिराम तो दूर सरपंच तिलेश्वरी नाग एक बार भी मरकानार नहीं आई है। राशन कार्ड से लेकर निराश्रित राशि तक के लिए लोगों को 6 किमी दूर तु़ड़पारास जाना पड़ता है।

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