प्रभावितों के लिए 750 हेक्टेयर जमीन की मांग

प्रभावितों के लिए 750 हेक्टेयर जमीन की मांग

0 टाइगर रिजर्व के प्रभावितों के लिए जिले में ढूंढ़ा जा रहा आशियाना
0 बिलासपुर वन मंडल ने मांगी व्यवस्थापन के लिए जमीन
0 कोर जोन में 19 गांव के 375 परिवार है प्रभावित
रायगढ़ (निप्र)। अचानकमार टाइगर रिजर्व एरिया के कोर जोन से प्रभावितों के लिए रायगढ़ जिले में आशियाना ढूंढ़ा जा रहा है। दरअसल बिलासपुर वन मंडल से प्रशासन के पास एक मांग पत्र आया है। इसमें 19 गांव के 375 परिवारों को व्यवस्थापन करने के नाम पर 750 हेक्टेयर जमीन की मांग की गई है। खास बात यह है कि इतने परिवारों को आवास के अलावा कृषि के लिए 2-2 हेक्टेयर जमीन देने का उल्लेख किया गया है। अब इसके लिए प्रशासन द्वारा जमीन की खोज शुरू कर दी गई है।
बिलासपुर वन मंडल के तहत आने वाले अचानकमार टाइगर रिजर्व के कोर जोन से लगे आसपास के करीब 19 गांव प्रभावित है। इन गांवों में निवास करने वाले परिवारों को अब व्यवस्थापन करने की तैयारी की जा रही है। कोर जोन से प्रभावित इन गांव में करीब 375 परिवार निवास करते हैं। इन परिवारों को व्यवस्थापन के लिए रायगढ़ जिले में जमीन की तलाश की जा रही है। इसके लिए बिलासपुर वन मंडल की ओर से 750 हेक्टेयर जमीन की मांग की गई है। गौरतलब है कि प्रभावित परिवारों को आवास व कृषि के लिए दो-दो हेक्टेयर जमीन देने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए प्रशासन से जमीन की मांग की गई है। हालांकि बिलासपुर वन मंडल से मांगपत्र आने के बाद प्रशासन द्वारा इस तरह की खाली जमीन की खोज की जा रही है, लेकिन अभी तक इसके लिए जमीन देना है या नहीं इसका फैसला नहीं हो सका है। अधिकारियों के अनुसार इतनी जमीन शहर के आसपास खाली ही नहीं है। अधिकारियों के अनुसार जमीन देनी भी पड़ी तो किसी गांव में खाली जमीन दी जाएगी। इसके लिए वन जमीन की भी तलाश की जा रही है। वन जमीन रिक्त होने से प्राथमिकता के तौर पर व्यवस्थापन के लिए जमीन देने की बात कही जा रही है। हालांकि औद्यौगिकरण के कारण ऐसी जमीन भी ढूंढ़ना प्रशासन के लिए चुनौती है।
राजस्व विभाग भी दे सकता है जमीन
वन मंडल बिलासपुर से आए मांग पत्र को लेकर प्रशासनिक तौर पर विचार चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार राजस्व विभाग के रिकार्ड में भी ऐसी कई खाली जमीन होती है जिसे व्यवस्थापन के तहत दिया जा सकता है। हालांकि अभी टाइगर रिजर्व से प्रभावित परिवारों को वन विभाग की जमीन दी जाएगी या राजस्व विभाग एलॉट करेगा ये तय नहीं हो सका है।
छोटे झा़ड़ के जंगल में संभावना
750 हेक्टेयर जमीन छोटे झाड़ के जंगलों में मिल सकती है। अधिकारियों के अनुसार वन विभाग के नक्शे में ऐसी जमीन नजर तो आ रही है, लेकिन किसी उद्योग को यह दे दी गई है या नहीं इसकी जांच की जा रही है। हालांकि अधिकारी भी यह मान रहे हैं कि जमीन तलाश करना इतना आसान नहीं है और शहर के करीब छोटे झाड़ के जंगलों की अधिकांश खाली जमीनों भी उद्योगों दे दी गई है।
राजस्व विभाग में पत्र आया हो ऐसा हो सकता है। अभी तक प्रशासन के पास से विभाग में पत्र नहीं पहुंचा है।
-राजेश पांडेय, डीएफओ

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