शाकिर अली की दस और कवितायें .बचा रह जायेगा बस्तर से. 41 से 50

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”  बचा रहेगा बस्तर ”  कविता संग्रह    से हम लगातार चालीस कवितायें प्रस्तुत की गईंं हैं .अब दस कवितायें और .41 से 50 . शाकिर अली बहुत लंबे समय बस्तर में नहीं रहे .लेकिन जितना भी रहे उन्होंने बस्तर को खूब जीया और खूब समझा और लिखा भी खूब. सामान्यत: बैंक के मैनेजर असमाजिक हो जाते है या लोग ऐसा ही समझते हैं. शाकिर भाई ने कई  मान्यताओं को तोडा और बड़े संवेदनशील तरीके से आदिवासियों की पीड़ा को उकेरा .आगामी दो किश्तों में और पढिये .

चलती पट्टी देखकर दिया कबीरा रोय  *

41  ●

“चार यात्री बसें और तीन ट्रक फूँक दिए गये”
दिन भर चलती चलती
चैनल की पट्टी
बता-बता कर
नहीं थकी !

प्रतिबंध ,*

42 ●

जंगल में चलते हैं, कतार बनकर,
एक के पीछे एक,
कुछ दूरी बनाकर, एक दूसरे दूसरे से,
ताकि सामने वाला बारूदी सुरंग से उड़े,
तो पीछे वाले हट जाएं, बच जाए ।

कितना कठिन है,

बारूदी सुरंग पर प्रतिबंध लगाना,
(यू.एन.ओ. द्वारा बारूदी सुरंग का प्रयोग वर्जित है) उतना ही सरल है, उसे तोड़ना !

 

यही ठीक रहेगा ? *

43  ●

सारी पृथ्वी पर चप्पे-चप्पे पर बारूदी सुरंग बिछा देना चाहिए,
ताकि शत्रुओं को आसानी से मारा जा सकें –
मित्रों को मारना उतना कठिन नहीं है,
पहले उन्हें स्वर्गीय बना दें !
यही ठीक रहेगा ?

दोस्त और दुश्मन् *

44  

विस्फोट से उड़ी बराती बस से
मिली एक लाश की जेब से
एक पुर्जा मिला, जिस पर लिखा था
“मेरी मौत के लिए दोनों जिम्मेदार है,
( जनता के ) दोस्त और ( जनता के ) दुश्मन !
इन दोनों ने मिलकर
आधा-आधा बांट लिया है
बस्तर का सब कुछ !!

बस्तर गोलीकांड *

45 ●

आज से चालीस-बयालीस साल
पहले बोई गई, बारूद की फसल
अब लहलहाने लगी हैं !

बहस

46  ●

आज के बस्तर के हालात पर,कोई कुछ नहीं बोलता, न बस में, ना ट्रेन में,
न होटल में और ना पान दुकान में,
सब चुप रहते हैं, डर के मारे !
वैसे भी
युद्ध भूमि में में
बहस नहीं चलती,
गोलियाँ चलती हैं !!

आरक्षण

47  ●

बस्तर में आरक्षित है,मलयानिल,
बारूदी गंध के लिए !
और टिफिन,
पराठा – अचार के बदले,
आरक्षित है, आर.डी.एक्स. के लिए !!

 

हक की लड़ाई के लिए *

48  ●

माफ करना, मां तुम्हारी
कोख सुने कर दी दी
हमें क्षमा कर दो, पिता
तुम्हारा दाहिना हाथ छीन लिया हमने,
गलती हुई भाई तुम्हारा सहारा
अब नहीं रहा,
धूल छमा करना बहन करना बहन,
राखी नहीं बन पाओगी,
तुम उसे कभी कभी भी
हक की लड़ाई के लिए
नाहक,
उसकी जान लेनी पड़ी हमें !

लूट. *

49 ●

मुरकिनार थाना लूट लिया गया !
5 करोड़ के आधुनिक
असला ‘बारूद लूट कर ले गये,
अधिकारी ने बताया
5 नहीं 2 करोड़ थे !!

बारूद नाथ

50 ●

पटनम में सकलनारायण की गुफा पर ,
फिर से चढ़ना , कितना कठिन है अब ,
मित्र मांझी अनंत के लिये ,
जब वे बारह साल पहले चढ़े थे ,
आसानी से लालाजी के साथ !
अब तो पता नहीं ।
सकलनारायण की गुफा में
बारूदनाथ न बैठे हो ! !

शाकिर अली ,लेखक 

जन्म :बिलासपुर छत्तीसगढ़ में

शिक्षा :बी.एस.सी (गणित ) एम.ए (हिंदी साहित्य)

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचना एवं अनुवाद प्रकाशित

पहल (जबलपुर) कृति और (जयपुर )संप्रेषण (जोधपुर) वागर्थ (कोलकाता )वर्तमान सहित साहित्य(अलीगढ़) शीराजा (जम्मू कश्मीर) साक्षात्कार (भोपाल)आकंठ( पिपरिया मध्य प्रदेश) लेखन सूत्र (जगदलपुर )देशबंधु (रायपुर) नवभारत (रायपुर )सारिका (मुंबई) छत्तीसगढ़ (रायपुर )पाठ (बिलासपुर) सर्वनाम (बागबाहरा) दिव्यलोक (भोपाल )साम्य (अंबिकापुर) इवनिंग टाइम (बिलासपुर )आदि।

दूसरी हिंदी काव्य संग्रह में रचनाएं संग्रहित

डॉ. कुवर पाल सिंह (अलीगढ़) द्वारा संपादित साहित्य और राजनीति पुस्तक में शामिल

आकाशवाणी बिलासपुर रायपुर से प्रसारित

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