श्रीलंका में इस्लामी आतंकवाद का जो भयानक रूप सामने आया है उसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है । भयानक आतंकी काम करने वाले अपने आप को इस्लाम से जुड़ा हुआ कहते हैं यह और अधिक चिंता की बात है। गहरी चिंता की बात उनके लिए और अधिक है तथा उनकी जवाबदेही बनती है जो अपने आपको इस्लाम धर्म का व्याख्याकर कहते हैं और जो इस्लाम धर्म के धार्मिक गुरु कहे जाते हैं। जो यह दावा करते हैं कि इस्लाम सुलह,शांति और मानवता का धर्म है। जो यह मानते हैं कि इस्लाम सभी धर्मों का सम्मान करता है।

पूरा संसार यह जानना चाहता है कि ये आतंकी कैसे मुसलमान है ? किस इस्लाम को मानते हैं ? उनकी ट्रेनिंग कहां होती है? इनको इस्लाम का आतंकी पाठ कौन पढ़ाता है ? इनको इतना पागल कैसे बना दिया जाता है कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवक भयानक निर्दयी इस्लामी आतंकी बन कर आत्मघाती हमलों में सौकड़ों मासूम लोगों को मार डालता है? इस्लाम एक अंतरराष्ट्रीय धर्म है और धर्म गुरुओं की कमी नहीं है। ऐसे देशों की भी कमी नहीं है जो अपने आप को इस्लामी देश कहते हैं। क्या यह उन सब का फर्ज नहीं बनता कि इस्लाम के नाम पर संसार में जो आतंक फैलाया जा रहा है उसकी न सिर्फ भर्त्सना और निंदा करें बल्कि कोई ऐसा कारगर उपाय करें कि इस्लाम के नाम पर आतंकवाद की ट्रेनिंग पर लगाम लग सके। ऐसी मस्जिदों, मदरसों और आतंकी धर्म गुरुओं की पहचान की जाए। उनके आतंकी इस्लाम प्रचार को चुनौती दी जाए ।क्या यह इस्लामी धर्म गुरुओं का काम नहीं है? यदि वे यह काम नहीं करेंगे तो कौन करेगा? और यदि वे यह काम नहीं करेंगे तो उसका क्या अर्थ निकाला जाएगा?

वैचारिक और सैद्धान्तिक आधार पर इन आतंकी गुटों से संघर्ष करने के अलावा उन देशों की आर्थिक नाकेबंदी आदि करने और उन्हें मजबूर करने की आवश्यकता है कि वे आतंकवाद को बढ़ावा न दें ।जो देश इन आतंकी गुटों को पैसा आदि देते हैं उनका पूरी दुनिया बहिष्कार करे।

संसार तेल के बिना रह सकता है पर आतंकवाद के साथ नहीं रह सकता।

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असगर वज़ाहत ,  साहित्यकार एवं नाटककार