जन विरोधी भाजपा ठगबंधन चुनाव हार रहा है . भाजपा + 194 , कांग्रेस + 306 . विश्लेषण

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23.04.2019

कहाँ से जीत रही भाजपा बताये

तमिलनाडु + केरल + आंध्र + तेलंगाना + कर्नाटक + ओडिशा + पश्चिम बंगाल = 193 सीटें है।

बीजेपी को 2014 में मोदी लहर के दौरान भी वह इन 193 सीटों में से सिर्फ 21 सीटें (क र्नाटक से 17) जीत सकीं!

अब कांग्रेस और जेडीएस ने 56% के कुल वोट शेयर के साथ कर्नाटक में गठबंधन किया है,
मोदी लहर नहीं है,

और इन राज्यों में एडीएमके को छोड़कर कोई सहयोगी भी नहीं है।

ADMK दो में विभाजित हो गया है और एक भी सीट नहीं जीत सकता है।

परिणाम स्वरूप बीजेपी इन 193 में से 5 से 10 से अधिक सीटें नहीं जीत सकते।

उत्तरप्रदेश – 80 सीटें।
2014 में मोदी ने 71 सीटें जीतीं !
क्योंकि अन्य सभी दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा।

इस बार सपा, बसपा और रालोद ने 44% की संयुक्त वोट हिस्सेदारी के साथ गठबंधन किया है।

2014 में मोदी लहर के दौरान भी बीजेपी को केवल 42% वोट मिले थे…

उसे इस बार 20 से 25 सीटें मिल सकती हैं।

यदि कांग्रेस बहुत ज्यादा जोर लगाती है तो 15 सीट नही तो 8 सीट में संतोष करना पड़ेगा और सपा बसपा रालोद गठबंधन को 44% वोट के हिसाब से 35 से 40 सीट आएगी और भजपा के खाते में 22 से 25 सीट का अनुमान है यू पी में भाजपा को पूरा 50 सीट का नुकसान हो रहा है।

राजस्थान + एमपी + छत्तीसगढ़ = 60 सीटें..

कांग्रेस ने इन तीनों राज्यों को 2 महीने पहले ही जीत लिया है।

भाजपा यहां कितना भी जोर मार ले 25-30 से अधिक सीटें हासिल नहीं करेगा भले ही वहां राज्य सरकार के खिलाफ वोट पडे।

उपरोक्त 11 राज्यों की 333 सीटों में से, बीजेपी ने 65 सीटों को भी पार नहीं किया!

शेष बची है
केवल 207 सीटें.

सरकार बनाने के लिए 271 चाहिए।

क्या बीजेपी के लिए 207 में से 206 सीटें जीतना संभव है?

क्या यह मजाक नहीं है?
यदि आप शेष राज्यों का विश्लेषण करते हैं तो,

असम (14), कश्मीर (6), दिल्ली (7), पंजाब (13), हरियाणा (10) इन 50 सीट को और जोड़ दिया जाए तो 20 सीट और अगर इसमे कम कर दिए जाएं तो सोचिए क्या होगा।

भाजपा को 207 में से इन 50 सीटों के चुनाव में 20 सीट ही जीत पाएंगे सीधा कांग्रेस के खाते में 30 सीट जाती नजर आ रही है।

महाराष्ट्र में 48, गुजरात मे 26 को भी जोड़ दिया जाए तो दोनो राज्यो में कुल 74 सीट होती है महाराष्ट्र और गुजरात दोनो राज्यो मे कितनी भी बुरी स्थिति में रहे कांग्रेस गठबंधन 25 सीट जीत कर आएगा।

अब 207 सीट में से 50 +74 =124 कम करते है तो 207 -124= 83 सीट शेष रहती है
भाजपा गठबंधन को 206 सीट जितनी है शेष रही सीट 83 सीट में से नार्थ ईस्ट सिक्किम (1), मिजोरम (1), त्रिपुरा (2), मेघालय (2), मणिपुर (2), अरुणाचल प्रदेश (2), इन 10 सीटो पर अफ्सपा एक्ट हटाने का फायदा काँग्रेस को मिल रहा है।

यहां से कितने भी बुरे हालात हो 5-7 सीट कांग्रेस गठबंधन और झारखंड 14 में से कम से कम 5 सीट कांग्रेस गठबंधन जीतेगा।

मतलब साफ है कि सबसे बुरे हालात में इन 24 सीटों में भाजपा को 14 और कांग्रेस को 10 सीट मिल रही है अब इन शेष रही 83 सीट में 83 -24=59 सीट ही शेष रही।

इन 59 सीटो में बिहार की 40 सीटे भी है बिहार में कांग्रेस गठबंधन कितने भी बुरे हालात हो 20 सीट तो जीतेगा ही।

शेष रही 19 सीटो में 6 केंद्र शाषित प्रदेश की 6 सीट में से 3 सीट कांग्रेस जीत रही है।

भाजपा गठबंधन 23 + 69+14 +46+ 20 + 22= 194 सीट से ज्यादा नही आएगी।

अब फाइनल रिजल्ट भाजपा गठबंधन को 194 से ज्यादा सीट किसी भी हालात में नही मिलेगी।

कांग्रेस गठबंधन को 540 – 194 = 346 सीट मिलेगी!

इस 346 सीट में से सपा-बसपा-रालोद(40) भी साथ न दे तो भी 346 – 40 =306 सीट जीत कर कांग्रेस गठबंधन सरकार बनाएगा।

तो मोदी को 194 सीटें (सबसे अच्छा मामला) और 135 सीटें (सबसे खराब स्थिति) में मिल सकती हैं।

अब भाजपा कोयह बताना चाहिए कि अगली सरकार बनाने के लिए कौन से राज्य और कितनी सीट जीतने वाली हैं।

आशुतोष अग्निहोत्री का फेसबुक पोस्ट

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