शाकिर अली छत्तीसगढ़  के बड़े कवि है ,उनकी अभी आई पुस्तक  बचा रह जायेगा बस्तर  छप  कर आईं है उसमें से कवितायें प्रस्तुत है .

हमारी कोशिश है कि उनकी सभी कविताएं किश्तों में सीजीबास्केट में पढी जा सकें. 

 

बस्तर के पहाड़ – 1

बस्तर के पहाड़

लौह खनिज बनकर

जापान चले गये !

बस्तर के जंगल

आग बनकर महानगरों के तंदूर

सुलगने के काम आ रहे हैं,!!

बस्तर के नगर ,

पामेड ,मद्देड,बासागुडा वीरान हो गए ,

पुलिस लाइन गुंजान हो गए  !!

बस्तर के लोक  नृत्य ,

राज्य महोत्सव के मुख्य आकर्षक बन

टूरिस्टों को लुभा रहे हैं !!!

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बस्तर के लोग – 2

बस्तर के लोग

काठ बनकर घरों की खिड़की

दरवाज़े ,पलंग बनकर रह गए .

बस्तर के लोग

“ बस्तर आर्ट “ बनकर दुनियाभर की

ड्राईंग रूम की शोभा बनकर रह गए .

बस्तर के लोग

नष्ट हो गए ,अपने शाल वनों के द्वीप के सामान ही

नष्ट हो गए उनके घोटुल उनका मृत्यु संगीत .

और

उनके काठ के स्मृति चिन्ह .

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बस्तर के वारदात – 3

बस्तर के लोग

अब समाचार बनकर चैनलों की

चलती पट्टी पर सवार हैं

बस्तर के वारदात ,

सारे देश में सनसनी फैला रहे हैं .

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बस्तर स्वर्ग हैं – 4

बस्तर स्वर्ग हैं

और यहाँ के आदिवासी अब  स्वर्गवासी .

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 बस्तर की आबोहवा -5

बस्तर की आबोहवा कितनी अछी हैं

तभी तो सेवानिर्वर्त्ति के बाद .

यहीं बसना चाहते हैं .

वानप्रस्थी लोग !

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बस्तर की सडकें – 6

बस्तर में आई सड़कें

नै रौशनी ,नए इरादे ,

लेकर आये लोग

लूटकर ले गई बसें ,ट्रकें

लोगों की उम्मीद ,उनका वनधन ,

साफ हो गए जंगल , दूषित हुआ जल .

वायु ,पर्यावरण हुआ नष्ट

तभी तो ,आज बसें ,ट्रकें जलाई जा रही हैं

उखाड़कर फेंक दी गई सड़कें

उखाड़े गए बिजली के ट्रांसफार्मर /टावर

लेकिन सबकुछ नष्ट कर

क्या नवनिर्मांड  संभव हैं .

बिना सर्वजन को साथ लिए ?

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जंगलवार – 7

लड़ रही है नै पीढ़ी दोनों तरफ

क्या सारे बस्तरियों को समाप्त करके

ही खत्म होगा

यह जंगलवार ?

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 जरुरी चीजें    8

सभी जरुरी चींजें हमें चाहिए बस्तर से .

जंगल, पानी, खनिज ,पेड़ ,हवा .सब

आगे भी उन्हें ले जाते रहेंगे हम ,

गैर जरुरी हैं ,

यहाँ के लोग हमरे लिए !

हमने पहले ही उनकी  संस्क्रति ,

उनके अवशेष को ,

राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में

संजोकर .सजाकर रख लिया हैं !!

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बारूदी गंध  9

बस्तर को हज़म करना

कितना आसन है ,

यहाँ के लोहे के पहाड़

गहरी नदी इन्द्रावती ,शबरी

यहाँ के कोरंडम,टिन, यूरोनियम,

सब हज़म कर लिए गए

यहाँ चित्रकूट.तीरथगढ प्रपात

बस्तर के हालत पर

ढेरों आंसू बहाते हैं

बारूदी गंध से घबराकर हवा ,

कैलाशगुफा और कुटुमसर की गुफाओं में ही

थोड़ी देर पति है विश्राम !!

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बस्तर के राजमार्ग  10

सड़कें छोड़ी करने ,

रास्ता रोकने के लिए

कटे जाते हैं पेड़

राजमार्ग को चोडा करने, कटेंगे

दसियों हजार आम ,इमली ,महुआ के पेड़

जो खड़े सड़क किनारे

खाली हो जायेगा ,बस्तर

जल्दी ही इनसे !!

 

शाकिर अली लेखक 

जन्म :बिलासपुर छत्तीसगढ़ में

शिक्षा :बी.एस.सी (गणित ) एम.ए (हिंदी साहित्य)

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचना एवं अनुवाद प्रकाशित

पहल (जबलपुर) कृति और (जयपुर )संप्रेषण (जोधपुर) वागर्थ (कोलकाता )वर्तमान सहित साहित्य(अलीगढ़) शीराजा (जम्मू कश्मीर) साक्षात्कार (भोपाल)आकंठ( पिपरिया मध्य प्रदेश) लेखन सूत्र (जगदलपुर )देशबंधु (रायपुर) नवभारत (रायपुर )सारिका (मुंबई) छत्तीसगढ़ (रायपुर )पाठ (बिलासपुर) सर्वनाम (बागबाहरा) दिव्यलोक (भोपाल )साम्य (अंबिकापुर) इवनिंग टाइम (बिलासपुर )आदि।

दूसरी हिंदी काव्य संग्रह में रचनाएं संग्रहित

डॉ. कुवर पाल सिंह (अलीगढ़) द्वारा संपादित साहित्य और राजनीति पुस्तक में शामिल

आकाशवाणी बिलासपुर रायपुर से प्रसारित ♀