16अप्रैल: जन्मदिन विशेष: कामरेड चार्ली चैपलिन को सलाम .

16अप्रैल 2019

मैं कम्युनिष्ट नहीं हूँ,लेकिन मुझे यह कहने में गर्व हो रहा है कि मैं अपने आपको को जबर्दस्त कम्युनिष्ट समर्थक महशूस करता हूँ.

उपरोक्त बातें 1942 में चार्ली चैपलिन ने कहा था.अपनी मूक फिल्मों से महान एक्टर डायरेक्टर चार्ली चैपलिन ने
अमेरिका में पूंजीवाद, फासिज्म और युद्ध के खिलाफ मजबूत संदेश दिये थे.

चार्ली चैपलिन का पूरा नाम सर चार्ल्सस्पेन्सर चैप्लिन था.

16 अप्रैल 1889 को चार्ली चैपलिन का जन्म हुआ था. चार्ली चैपलिन के पिता एक एक्टर थे और उन्हें शराब की लत थी.उनका बचपन काफी संघर्षों में बीता.अपनी मां को मेंटल अस्पताल में भर्ती कराने के बाद चार्ली और उनके भाई को अपने पिता के साथ रहना पड़ता था.कुछ सालों में चार्ली के पिता की मौत हो गई थी लेकिन उनके व्यवहार के चलते एक संस्था ने चार्ली और उनके भाई को पिता से अलग कराना पड़ा था .परेशानी भरे बचपन के बावजूद वे अमेरिकी सिनेमा में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे.चार्ली चैपलिन सबसे प्रसिद्ध कलाकारों में से एक होने के अलावा एक महत्वपूर्ण फिल्मनिर्माता, संगीतकार और संगीतज्ञ थे.

चैपलिन ने 1930 के दशक में बहुत ही रोचक और आकर्षक फ़िल्में की. सन 1931 में उनकी फ़िल्म ‘सिटी लाइट’ आई, इस फ़िल्म से उनको व्यावसायिक सफलता मिली और इस फ़िल्म में उन्होंने अपना खुद का संगीत शामिल किया. सन 1936 के आधुनिक समय में इन्होंने दुनिया के आर्थिक और राजनीतिक ढांचे की स्थिति के बारे में एक कमेंटरी की, जिससे उनको बहुत प्रशंसा मिली. चैपलिन एक बहुत अच्छे निर्माता भी थे. चैपलिन ने सन 1940 में आई फ़िल्म “दी ग्रेट डायरेक्टर” में जोर से बात की. जिसमे हिटलर और मुस्सोलीनी की सरकारों का उपहास किया और कहा “मैं शालीनता और दया की वापसी करना चाहता हूँ”. चैपलिन ने फ़िल्म की रिलीज के आसपास यह भी कहा कि “मैं सिर्फ एक इन्सान हूँ, जोकि इस देश में वास्तविक लोकतन्त्र चाहता हूँ”.

चार्ली चैपलिन के असल जिंदगी में बहुत से ड्रामे हुए, जिसके लिए वे प्रसिद्ध हो गए. उनके अपने साथ काम करने वाली बहुत सी अभिनेत्रीयों के साथ प्रेम सम्बन्ध थे.कई शादियों और तलाक के बाद 1943 में चैपलिन ने 18 साल की ‘ऊना ओ’नील’ से शादी की, यह उनकी सफल शादी रही, इससे उनको 8 बच्चे हुए.

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद 1950-60 के दशक में लगभग पूरी दुनिया दो गुटों में बट गई थी. एक गुट का नेतृत्व अमेरिका और दूसरे का सोवियत संघ (रूस) कर रहा था. सोवियत संघ जहां साम्यवाद का समर्थक थातो अमेरिका पूंजीवाद का. ऐसे में अमेरिकी सरकार साम्यवाद का सफाया करने के लिए कर तरह की कोशिश कर रही थी . वामपंथ का समर्थन करने के कारण चार्ली पर अमेरिका ने बैन भी लगा दिया था क्योंकि अमेरिका को शक था कि – चार्ली चैपलिन कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रेरित हैं और वे समाज में लोगों को इससे जोड़ने की कोशिश करते हैं . और यही बात अमेरिका सरकार को खटक रही थी. इसी कारणवश अपने देश की खुफिया एजेंसी एफबीआई को चार्ली चैपलिन की निजी जिंदगी सेजुड़ीजानकारी जुटाने को कहा.दरअसल, चार्ली चैपलिन ज्यादातरलंदनमें निवास करते थे, इसलिए एफबीआई ने उनसे जुड़ी जानकारी जुटाने का जिम्मा ‘एमआई 5’ को सौंप दिया. हालांकि एमआई 5 चार्ली चैपलिनके खिलाफ वैसा कोई सबूत जुटाने में नाकाम रही, जो यह साबित कर सके कि यह हास्य कलाकार अमेरिका के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं.

1953 में चार्ली चैपलिन अमेरिका से बाहर गए तो उन्हें दोबारा यहां नहीं लौटने दिया गया. आखिरकार वे स्विटजरलैंड में बस गए. उनकी मृत्‍यु 25 दिसंबर 1977 को 88 साल की उम्र में हुई थी.

फ‍िल्‍म लाइम-लाइट के लिए चार्ली चैप‍िलन को 1973 में 21 साल बाद ऑस्‍कर अवॉर्ड द‍िया गया था.यह अवॉर्ड फ‍िल्‍म के बेस्‍ट म्‍यूजिक के लिए था. लॉस ऐंजिलिस में यह फ‍िल्‍म 1972 में रिलीज हुई थी. उससे पहले यहां फ‍िल्‍म के रिलीज न होने की वजह से इसे पुरस्‍कृत नहीं क‍िया जा सका था। 1975 में महारानीएलिजाबेथ सेकंड ने ‘नाइट’ की उपाधि दी थी.

महात्मा गांधी से मुलाकात चैप्लिन की जिंदगी के अहम पड़ावों में से एक है. मुलाकात के वक्त चार्ली चैप्लिन ने बापू से पूछा कि- आधुनिक समय में उनका मशीनों के प्रति विरोधी व्यवहार कितना जायज है? इसके जवाब में गांधी जी ने कहा था कि – वो मशीनों के नहीं, बल्कि इस बात के विरोधी हैं कि मशीनों की मदद से इंसान ही इंसान का शोषण कर रहा है. इससे चैप्लिन इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस मुद्दे पर ‘टाइम मशीन’ नाम की एक फिल्म बना डाली.

उत्कट मानवतावादी और जनवादी, बीसवीं शताब्दी के महानतम सिने कलाकारों में से एक, चार्ली चैप्लिन के जन्मदिन के अवसर पर उनकी उक्ति:

“इंसानों की नफरत ख़तम हो जाएगी , तानाशाह मर जायेंगे, और जो शक्ति उन्होंने लोगों से छीनी वो लोगों के पास वापस चली जायेगी और जब तक लोग मरते रहेंगे, स्वतंत्रता कभी ख़त्म नहीं होगी.”

कम्युनिष्टों के बारे में चैपलिन ने कहा था,”Communists are ordinary people like ourselves who love beauty, who love life”.

 

सुनील सिंह  जी की पोस्ट

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