देश का पहला आमचुनाव और दुर्ग संसदीय सीट को मिले सर्वाधिक 4 निर्वाचित सांसद.: मुहम्मद ज़ाकिर हुसैन

16.04.2019

वासुदेव श्रीधर किरोलीकर,भगवतीचरण शुक्ल और गुरू अगम दास एक साथ 

निर्वाचितहुए और उपचुनाव में मिनीमाता ने भी किया दुर्ग का प्रतिनिधित्व

 
वासुदेव किरोलीकर, भगवती चरण शुक्ल, गुरु अगम दास , मिनीमाता 
क्या आप जानते हैं कि देश के पहले आमचुनाव (1952) में दुर्ग लोकसभा को एक या दो नहीं बल्कि पूरे चार निर्वाचित सांसद मिले थे। इनमें तीन सांसद तो एक ही वक्त में निर्वाचित हुए थे और एक सांसद को उपचुनाव में निर्वाचि घोषित किया गया था। इन निर्वाचित सांसदों में भगवतीचरण शुक्ल, वासुदेव श्रीधर किरोलीकर और गुरू अगम दास के बाद मिनीमाता ने भी दुर्ग का प्रतिनिधित्व किया है।  
स्वतंत्र भारत की पहली लोक सभा ने 17 अप्रैल 1952 से 4 अप्रैल 1957 तक अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। उस समय लोकसभा की कुल 489 सीटें थीं लेकिन संसदीय क्षेत्र 401 ही थे। इनमें 314 संसदीय क्षेत्र ऐसे थे, जहां से सिर्फ  एक-एक प्रतिनिधि का निर्वाचन हुआ था। वहीं 86 संसदीय क्षेत्र ऐसे थे जहां एक साथ 2 जनप्रतिनिधि का निर्वाचन हुआ। इनमें से एक सामान्य वर्ग से और दूसरा सांसद एससी/अनुसूचित जाति समुदाय से चुना गया था। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में एक सीट ऐसी भी थी, जहां एक साथ तीन प्रतिनिधियों के निर्वाचन की व्यवस्था थी। 
अब बात करते हैं छत्तीसगढ़ और दुर्ग की। इस आम चुनाव में छत्तीसगढ़ में दुर्ग, रायपुर (संयुक्त रूप से एक सीट), दुर्ग-बस्तर (संयुक्त रूप से एक सीट) के साथ-साथ सरगुजा और रायगढ़ में द्विसदस्यीय तथा महासमुंद, दुर्ग व बस्तर में एक सदस्यीय लोकसभा सीट थी। आज का दुर्ग लोकसभा तब सीपी एंड बरार प्रांत के अधीन आता था। यहां लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ करवाने के लिए अधिसूचना 6 मार्च 1952 को जारी हुई। नामांकन पत्र दाखिले की आखिरी तारीख 13 मार्च, नामांकन पत्रों की जांच 14 मार्च, नाम वापस लेने की तिथि 17 मार्च और मतदान की तिथि 27 मार्च 1952 थी।
पहले लोकसभा चुनाव के दौरान पृथक राजनांदगांव जिला और राजनांदगांव लोकसभा  सीट का गठन नहीं हुआ था, इस लिहाज से दुर्ग जिले की सीमा सुदूर बस्तर तक लगती थी। ऐसे में दुर्ग और बस्तर को मिलाते हुए घोषित की गई दुर्ग-बस्तर (सामान्य) सीट पर कुल मतदाता 3,94,803 थे, जिनमें 2,14,924 ने मत दिए और मतदान 54.4 प्रतिशत रहा। इस चुनाव में कांग्रेस के भगवती चरण शुक्ल को 1,02,666, राम राज्य परिषद के हनुमान प्रसाद ब्रह्मचारी को 48017, किसान मजदूर प्रजा पाटी के राधेश्याम को 44,498 और समाज पार्टी के सरजू प्रसाद को 19 हजार 743 मत मिले। इस तरह भगवती चरण शुक्ल इस चुनाव में विजेता रहे। 
इसी तरह दुर्ग के पूर्वी हिस्से को रायपुर व बिलासपुर के साथ मिलाते हुए एक अन्य सीट बिलासपुर-दुर्ग व रायपुर (संयुक्त) भी बनाई गई थी। जिसमें 7 लाख 59 लाख 650 मतदाता थे। इनमें 5,29,272 ने मत दिया और 34.8 प्रतिशत मत पड़े। इस चुनाव में कांग्रेस के गुरु अगमदास को 1,16,713, कांग्रेस के ही भूपेंद्र नाथ मिश्रा को 1,00,011,  किसान मजदूर प्रजा पाटी के केशव प्रसाद को 90,571 और राम राज्य परिषद के ठाकुर धरमराज सिंह 68,442 मत मिले। इस चुनाव में गुरु अगमदास विजेता रहे। 
दुर्ग लोकसभा सामान्य सीट में कुल मतदाता 3,98,341 थे। जिनमें 191,348 मतदाताओं ने हिस्सा लिया और 48.0 प्रतिशत मतदान हुआ। जिसमें कांग्रेस के वासुदेव श्रीधर किरोलीकर को 1,21,648, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के  गंगा प्रसाद को 29,422, किसान मजदूर प्रजा पाटी के उदय प्रसाद को 20,694 और समाज पार्टी के सुरजन सिंग को 19,584 मत मिले। 

हरिभूमि 15 अप्रैल 2019 

इस तरह पहले आम चुनाव में दुर्ग जिले को तीन जनप्रतिनिधि मिले। इनमें  दुर्ग-बस्तर से निर्वाचित भगवतीचरण शुक्ल तत्कालीन सीपीएंड बरार के मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल के बेटे थे। वहीं दुर्ग सामान्य सीट से निर्वाचित कांग्रेसी वासुदेव श्रीधर किरोलीकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। इनके अलावा बिलासपुर-दुर्ग व रायपुर (संयुक्त) से निर्वाचित गुरू अगमदास की ख्याति सतनाम पंथ के गुरू के रूप मेें थी। 
इन तीनों जनप्रतिनिधियों में भगवतीचरण शुक्ल और वासुदेव श्रीधर किरोलीकर ने अपना संसदीय पांच साल का कार्यकाल पूरा किया लेकिन गुरू अगमदास अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। सांसद रहते हुए 2 अक्टूबर 1954 को उनका निधन हुआ। इसके बाद भारतीय निर्वाचन आयोग ने 10 फरवरी 1955 को इस बिलासपुर-दुर्ग व रायपुर (संयुक्त)सीट पर उपचुनाव करवाया। जिसमें गुरू अगमदास की पत्नी मिनी माता निर्वाचित हुईं और छत्तीसगढ़ की पहली महिला निर्वाचित सांसद बनीं। 

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