देश भर के साक्षर भारत कार्यक्रम के प्रेरकों, राज्य संसाधन केंद्र के कर्मचारियों तथा जिला लोक शिक्षा समिति से जुड़े साक्षरताकर्मियों/समन्वयकों से अपील”. “जनविरोधी भाजपा को परास्त करें, सब के लिए शिक्षा-स्वास्थ्य-रोजगार देने वाले जन विकल्प का समर्थन करें”

11.04.2019

साथियों,
देश आज एक गहरे संकट के मुहाने पर खड़ा है जहां देश का संविधान व लोकतंत्र भीषण खतरे का सामना कर रहा है। हमें अपने देश में संविधान, लोकतंत्र व धर्मनिरपेक्ष संरचना को बचाना है तो इस लोकसभा चुनाव में हमें नफरत फ़ैलाने वाली, लोगों को धर्म/संप्रदाय के आधार पर बांटने वाली, बेतहाशा ग़रीबी, भूखमरी, बेरोजगारी को बढ़ाने वाली जनविरोधी भाजपा को हराना ही पड़ेगा।

कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर “मैं भी चौकीदार” का अभियान शुरु किया। जवाब में राष्ट्रव्यापी आंदोलन “युवा हल्लाबोल” ने भी “मैं भी बेरोजगार” मुहिम की शुरुआत की। युवा नारे लगा रहे हैं कि हमें “जुमला नहीं जॉब चाहिए”। यह केवल एक मुहिम नहीं बल्कि एक दुखद सच्चाई है। गंभीर चिंता का विषय यह भी है कि केंद्र सरकार ने बेरोजगारी के सर्वेक्षण के आंकड़े अभी तक गुप्त रखे हैं। बिज़नेस स्टैंडर्ड अख़बार में लीक हुए इस सर्वेक्षण के डाटा के मुताबिक, पिछले 45 वर्षों में भारत में सबसे ज़्यादा बेरोजगारी का संकट वर्ष 2017-18 में देखा गया। भारत में बेरोजगारी की दर फरवरी 2018 को 5.9 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी 2019 में 7.2 प्रतिशत हो गई है।

शिक्षित युवकों में बेरोजगारी लगभग 20 प्रतिशत है यानी हर पांच में एक युवक बेरोजगार है। बड़े पैमाने पर कृषि संकट के चलते पिछले 5 वर्षों में कर्ज के बोझ से दबे सबसे ज़्यादा किसानों ने आत्महत्या की है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो रोजगार के अवसर बहुत कम हो गए हैं। भाजपा सरकार ने गरीबी उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे मनरेगा जिसमें हर साल 100 दिन का कार्य मिलना कानूनी हक़ था का भी गला घोंट दिया है। यह सरकार गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए चलाई जा रही योजनाओं एवं जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों को भी सुनियोजित रूप से ख़त्म रही है।

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रतिपादित सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य तथा टिकाऊ विकास लक्ष्य को मानने वाली मोदी सरकार ने मानव विकास सूचकांक के 3 प्रमुख घटकों में से एक शिक्षा/साक्षरता पर अपने कार्यकाल में घातक आक्रमण किया है। यह सरकार चाहती ही नहीं है कि 15 वर्ष से ऊपर की कार्यशील जनसंख्या (जिसमें विशेषकर महिलाएं, दलित, आदिवासी व मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है) साक्षर बने, जागरूक बने, सरकार पर सवाल उठाए। इसीलिए इसने सामंत राजा-महाराजाओं की तर्ज पर प्रौढ़ साक्षरता/शिक्षा का अधिकार जनता से छीन लिया और 31 मार्च 2018 को देशव्यापी संचालित साक्षर भारत कार्यक्रम को बंद कर दिया और उसकी जगह कोई दूसरा अनौपचारिक जन शिक्षा का कार्यक्रम भी शुरू नहीं किया।

सामंती मध्ययुग में कर्मकांडवादी सामंत राजागण, दलितों-आदिवासियों व मेहनतकशों को शिक्षा पाने के अधिकार से वंचित रखते थे। साक्षर भारत कार्यक्रम के बंद होने से देश भर में करीब 4 लाख साक्षरताकर्मी बेरोजगार हो चुके हैं। जिनमें प्रेरकगण, 32 राज्य संसाधन केंद्रों के कर्मचारीगण तथा जिला लोक शिक्षा समिति से जुड़े जिला एवं ब्लॉक समन्वयकगण शामिल हैं। जो सरकार प्रतिवर्ष 2 करोड़ रोजगार देने और अच्छे दिन का वायदा करके सत्ता पर आई थी वर्ष 2018 में उसकी जनविरोधी कॉर्पोरेटपरस्त पूंजीवादी नीतियों के चलते करीब 1 करोड़ 10 लाख लोग अपनी नौकरी से हाथ धो बैठे हैं जिनमें उपरोक्त साक्षरताकर्मी बड़ी संख्या में हैं।

पिछले एक वर्ष से बेरोजगार ये साक्षरताकर्मी अपार कष्ट उठा रहे हैं। इसी बीच कई प्रेरकों की बदहाल स्थिति में मौत भी हो गई है जिनमें छत्तीसगढ़ के प्रेरक धनीराम खूंटे भी शामिल हैं। जिन्होंने साक्षर भारत कार्यक्रम बंद होने के बाद गत वर्ष आत्महत्या की थी।
ये भाजपा सरकार पूरी तरह से बड़े पूंजीपति कॉर्पोरेट/बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों की रक्षक है। उन्ही की चौकीदार है। इसीलिए सबसे ज्यादा कॉर्पोरेट फंड, भाजपा को मिलता है। इनकी शिक्षा स्वास्थ्य, पोषण, महिला व बाल कल्याण, गरीबी उन्मूलन जैसे समाज कल्याणकारी कार्यों में तनिक भी रूचि नहीं है। इनकी केवल रूचि है रोजी-रोटी के सवाल को दरकिनार कर धार्मिक/सांप्रदायिक आधार पर कट्टरपंथी सोच फैलाना और नफरत व हिंसा को बढ़ावा देना। इनकी रूचि है युद्धोन्माद व अंधराष्ट्रवाद (झूठा राष्ट्रवाद) की भावनाएं भड़काना।

आज अगर देश में भीषण गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी, महंगाई, अशिक्षा, अस्वस्थता, किसान आत्महत्या व भीड़ द्वारा हत्याएं हो रही हैं तो इसके लिए भाजपा की जनविरोधी फासीवादी नीतियाँ ही ज़िम्मेदार हैं।

इसीलिए हमें आवाज़ उठाना है कि हमें मिसाइलों, परमाणु बमों और युद्ध की नहीं बल्कि रोजी-रोटी, प्रजातंत्र, शिक्षा व स्वास्थ्य का अधिकार चाहिए। हम और हमारा परिवार जो आज बदहाली का सामना कर रहा है उसके लिए ज़िम्मेदार भाजपा को हमें बुरे दिन दिखलाने हैं क्योंकि उसने हमें अंधेरे में ढकेल दिया है। आइए सत्ता के दंभ से भरी कॉर्पोरेट भगवा फासिस्ट भाजपा को इस बार के संसदीय चुनाव में हम आईना दिखलाएं। हम, हमारे परिवार के लोगों, मित्रों सभी को अभिप्रेरित कर यह सुनिश्चित करें कि एक भी वोट भाजपा को न जाय। साक्षर भारत कार्यक्रम सहित तमाम जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की शवयात्रा निकालने वाली धुर दक्षिणपंथी जनविरोधी जुमलेबाज भाजपा को हम एकजुट होकर हराकर बदलाव की बयार पैदा करें.

 

तुहिन देब
अखिल भारतीय राज्य संसाधन केंद्र एम्प्लॉईज़ यूनियन की ओर से

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