जेसिंडा न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री खुद में एक ऐतिहासिक औरत हैं…

38 साल की,
धर्म को न मानने वाली,
एक बिन-ब्याही मां …..
जेसिंडा न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री खुद में एक ऐतिहासिक औरत हैं.

जिसे हम इंडिया में देश की पॉलिटिक्स तो दूर, अपने घर में घुसने लायक भी न समझें.

ऐसी नारी शक्ति को सलाम

औरतों को सदियों से सिखाया जाता रहा , आंखे नीची रखना। आंख उठाने वाली औरत पूजनीय नहीं बन पाती… अजेय हो जाती है.. आंखों में आंखे डालकर रूह तक झांक सकती हैं औरतें। झिंझोड़ सकती हैं। तमाम शस्त्रों – शास्त्रों और कैद रखने की साजिशों के बाद भी वो जब चाहे महज़ आंखें उठाकर बता सकती है कि ये तमाम हथियार कितने कमजोर हैं.. उसकी हिम्मत के सामने..

 21 जून 2018 में जेसिंडा ने एक बेटी को जन्म दिया. वो दुनिया में दूसरी ऐसी लीडर हैं जो प्राइम मिनिस्टर या प्रेसिडेंट का रोल निभाने के दौरान मां बनीं. प्रेगनेंट होते ही लोगों ने पूछा कि क्या वो मैटरनिटी लीव लेंगी. लेंगी तो देश का क्या होगा. जेसिंडा ने एक रेडियो प्रोग्राम में कहा, “मैं लीव लूं या न लूं, ये मेरी चॉइस होगी. हर औरत का अधिकार होता है ये चुनना कि वो कितना और कब तक काम करना चाहती है.”

2012 में जेसिंडा क्लार्क गेफ़ोर्ड से मिलीं. वो एक टीवी एंकर हैं. दोनों की मुलाकात उनके एक कॉमन दोस्त ने करवाई थी. पहली मुलाकात के बाद दोनों काफ़ी समय तक नहीं मिले. एक दिन किसी काम के सिलसिले में क्लार्क ने जेसिंडा को कॉल किया. फिर क्या था. दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे. उन्होंने शादी नहीं की. वो साथ में रहते हैं और अपना परिवार चलाते हैं.

जेसिंडा 2017 में प्रधानमंत्री बनी थीं. उनकी छवि एक सॉफ्ट व्यक्ति के तौर पर रही थी. जो धाकड़ और दबंग से ज्यादा, कोमल और धैर्यवान लगती थीं. उनके आलोचकों ने कहा, यही रवैया रहा तो सरकार नहीं चलेगी. जवाब में जेसिंडा ने कहा, “दूसरों के दर्द को समझना और एक शांत हृदय रखना ही असल बहादुरी है. मुझे गर्व है कि मेरी पॉलिटिक्स में करुणा का भाव है.”

जेसिंडा लगातार युद्ध और न्यूक्लियर हथियारों के विरोध में बोलती देखी जाती हैं. क्राइस्टचर्च आतंकी हमले के बाद भी उन्होंने मुसलमान समुदाय से ये वादा किया कि वो वहां के ‘गन-लॉ’ बदल देंगी. यानी लोगों को जो आसानी से बंदूक रख पाने की सुविधा मिली है, उसमें बदलाव करेंगी.

जेसिंडा वही कर रही हैं जो किसी भी प्रधानमंत्री को करना चाहिए. हमारे राजनेताओं को इनसे सबक लेना चाहिए. जो घड़ी-घड़ी युद्ध के लिए न सिर्फ तैयार रहते हैं. बल्कि उसके आधार पर वोट भी ले आते।

होली पर इससे अच्छा कुछ नही मिल सकता था।

Kartikey Singh की वॉल से

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