21.03.2019

सर, इधर हम गूगल में सर्च किया तो पता चला कि मार्च-अप्रैल-मई में आपका परदेश का कोई टूर प्रोग्राम ही नहीं है| क्या बात हो गई सर, अब तो आप अक्खा पार्टी बोले तो अपने चेले-चपाटी-भक्त सभी लोगों को चौकीदार बना दिया है| अब इधर से तो आप बोले तो एकदम निसफिकर होंकर घूमने जा सकते हैं| इत्ता सारा चौकीदार होते फिकिर करने का क्या जरूरत? वैसे भी बोले तो आपकी तो एकदम हेबिट में है कि कोई भी खास बात होते ही आप घर छोडकर घूमने निकल जाते हैं| बोले तो बचपन का हेबिट| वैसे नोटबंदी की घोषणा करने के बाद भी आप एकदम जापान को निकल लिए थे| आपने जब भारत के भगौड़े लोगों को जापान में सुन्दर एक्टिंग कर बताया था कि आप भारत में क्या शरारत करके जापान आये हैं तो वो लोग तो हँसे थे, अपुन भी आपकी एक्टिंग के कायल हो गए थे|

अपुन का सोचना है कि सर आपने अभी इतने बड़े बड़े काम किये हैं कि 2-3 महिने तो आराम से दुनिया का चक्कर लगा सकते हैं| सोचिये सर, जब आप अमेरिकन भारतीयों को बताएँगे कि कैसे आपने दुनिया की सबसे बड़ी सदस्यता वाली पार्टी के सब लोगों और आपके भक्तों को चुटकी बजाते ही चौकीदार बना दिया तो वे लोग कितने खुश होंगे| एकदम चुटकी बजाते बजाते 2-3 करोड़ लोगों को रोजगार देने का चमत्कार भला कोई और कर सकता है, दुनिया में? जब आप बताएँगे कि कैसे आपने आतंकवादियों को घर में घुसकर मारा तो वो अमेरिकी भारतीय कितने खुश होंगे| इधर भारत में तो देशी लोग रहते हैं तो उनके लिए तो घर की मुर्गी दाल बरोबर, सबूत माँगते हैं| अब इन ना-समझों को कौन समझाए कि अपुन उधर बम गिराने को गया था फोटो खींचने को नहीं| वैसे भी ट्रम्प सर से गले मिले बहुत समय हो गया है| वह भी जरूरी काम है| थोड़ा चायना भी धौंस में आएगा कि अपुन का पक्का दोस्ती है ट्रम्प साहब से|

वैसे घूम कर आईये सर, आप परदेश में ज्यादा खुश रहते हैं, खूब सेल्फी खिंचवाते और खींचते हैं| भारत में तो आपको सेल्फी के नाम से (योग दिवस) गुस्सा आ जाता है| भारत में तो आपकी मुस्कराती तस्वीर देखने हम तरस जाते हैं| ये राहुल बाबा आपको बहुत चिढ़ाता है, इसलिए आप हमेशा गुस्से में ही रहते हैं| आपकी मुस्कराती-हंसती तस्वीर तो विदेश से ही आती है| ड्रम बजाते, बांसुरी बजाते, काले बच्चे के कान खींचते| वो जब आप इंग्लैंड गये थे तो वहां के ब्रिटिश भारतीयों को संबोधित करने के लिए जब आपका एंट्री स्टेज पर होने वाला था तो उधर का आपका वो इवेंट मैनेजमेंट करने वाला क्या गाना बजाया था ” बचना ओ हसीनो, लो मैं आ गया” बोले तो एकदम मजा आ गया था। अपुन उसको लाइव देखा था। सच विदेश में आप कितने खुश रहते हैं! इधर का चिंता मत करिये| ये जो बड़ा काम हुआ है न एयर स्ट्राईक का, उससे पाकिस्तान या आतंकवादियों को कोई फर्क पड़े या न पड़े, पर विपक्ष एकदम नील डाउन बोले तो घुटना टेक हो गया है| पूरा भक्त लोग हाथ में मोबाईल लेकर डिजिटल है और आपके तरफ से एकदम जैसे ही कोई विरोध में बोलता है तो उसे देशद्रोही-राष्ट्रद्रोही बोलकर चुप करा देते हैं|

अभी आपका संस्कृति मंत्री बढ़िया बोला कि अकेले पप्पू से काम नहीं चल रहा था तो अब वो अपनी पप्पी को भी लेकर आ गया है| बोले तो आप लोगुन का ये संस्कृति का शिक्षा देने का काम है न, एकदम सॉलिड है।अपुन का तो दिमाग फिर जाता है। कैसे सिखाता है आप लोग, कोई समझ नहीं सकता। आपका नेता लोग, मंत्री, सांसद, विधायक एक से एक कमेंट मारता है। बोले तो विपक्ष का कोई इतने नीचे गिरना भी चाहे तो लाख कोशिश के बाद भी इतना नीचे नहीं गिर सकता। ये मणिशंकर, शशि थुरूर, दिग्विजय सिंह तो आपके साधारण कार्यकर्ता के पाँव की धूल के बरोबर भी नहीं हैं। आपके ये रविशंकर, संबित पात्रा भी एकदम स्पेशल माइंडलेस बात करता है। सोशल मीडिया में जमकर ताली बजा| चुनाव -वुनाव की चिंता मत करिये, वो तो आपको मीडिया ने पहले ही 542 में से 546 सीट दिलवाकर जितवा दिया है| चुनाव को तो आपके अध्यक्ष अकेले मेनेज कर लेंगे| वैसे भी वे बोल चुके हैं कि आपको अभी 50 साल और राज करना है| आंकड़ों में तो सर, सच आपकी पार्टी के अध्यक्ष का कोई जबाब नहीं| बढ़िया तरीके से जुगाड़ करते हैं|

 

बहुत दिन हो गए सर देश में आप बोर हो गए होंगे| घूम आईये| आप तो वैसे भी मानते हैं कि भारत में रहना भी कोई रहना है लल्लू | पर हम लल्लू क्या करें ? हम तो राजकपूर की मेरा नाम जोकर के जोकर हैं..जीना यहाँ, मरना यहाँ, यहाँ के सिवा जाना कहाँ?

देखिये ये जो आप कहते हैं कि हर भारतीय चौकीदार है, भारत तोड़ो गेंग को एयर स्ट्राईक का सबूत चाहिये, साले- जीजा को अपना विकास करना है, भाषण में आपका गुस्सा, ये सब तो चुनावी हथकंडे हैं, अपुन को मालूम है| असली काम तो देश का विकास करना है| अब यदि देश का विकास करना है तो देश-देश तो घूमना ही पड़ेगा| विकास केवल देश में रहकर हो सकता तो आजादी के बाद के 60 साल में कांग्रेस ने कर न लिया होता| नहीं हुआ न| इसलिए आप तो 23 मई तक 5-6 देश जो छूट गए हों या फिर से एक बार अमेरिका, जापान, जहां आपको अच्छा लगे, जहां आपको खुशी मिले, वहाँ हो आईये|

वैसे भी सर, ये तो सच्चाई है कि विकास तो अब भारत में अपने बलबूते कोई कर ही नहीं सकता है| 27बरस पहले मनमोहनसिंह जी ने देश को उस रास्ते पर डाल दिया है कि अपने बूते पर तो आप क्या कोई भी कुछ नहीं कर सकता| जब आप प्रधानमंत्री बनने के लिए गाँव-गाँव घूम रहे थे और विकास की जो जड़ी-बूटी दिखा रहे थे, आपको मालूम था कि असल की नक़ल है| ये जनता समझती ही नहीं है कि बिना विदेश जाए और बिना अम्बानी-अदानी का विकास कराये देश का विकास हो ही नहीं सकता| इसलिए सर, आप तो घूम आईये|

आपका यह कहना भी सच है कि विदेश में आपके जाने से संबंध सुधरेंगे| आखिर रूसियों के साथ संबंध सुधारकर राजकपूर जी को भी तो फ़ायदा ही हुआ था, तो फिर आपको क्यों नहीं होगा? वहीं सुधारिए सर..यहाँ तो(भारत में) बहुत मुश्किल है| लोग समझते ही नहीं है| भारत में संबंधों को खराब रखना सिद्धांत की बात है और सिद्धांत की बात पर तलवारें चलाने की हमारी पुरानी परंपरा है, समझौते की नहीं| बल्कि, यहाँ मेहनत करना ही बेकार है|

वैसे एक सच्ची बात बताऊँ, जब आप विदेश जाते हैं तो आपकी बहुत याद आती है| अब क्यों न पूछिए, लल्लू लोग ऐसे ही होते हैं, वे 40वर्ष पुरानी इमरजेंसी को ऐसे याद करते हैं, जैसे कल की ही बात हो! मुंबई ब्लास्ट की बरसी मनाते हैं! बाबर-औरंगजेब हमें ऐसे याद आते हैं जैसे कल हमारे सामने ही मरे हों| दरअसल पुराने में खोये रहना लल्लूओं की फितरत होती है| अब आप ही देखिये, आप छोड़ पा रहे हैं क्या राजीव गांधी का डिजिटल इंडिया, भारत में बनाओ-विदेश के लिए, या मनमोहन का एफडीआई, नहीं न! इसलिए आप हमारी चिंता न करो और विदेश घूम आओ|

आपकी यात्रा सुखद हो, आप खूब घूमें-फिरें, सेल्फी लें और जहां जाएँ कुछ न कुछ बजाकर आयें| हाँ , अदानी भैया को जरुर साथ ले जाएँ , मन बहला रहेगा| हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं|

अरुण कान्त शुक्ला, 21मार्च, 2019