युध्द के ख़िलाफ़ ‘: शरद कोकास 

कवि  उठो लिखो कविता युध्द के ख़िलाफ़
युध्द में प्रयुक्त प्रक्षेपास्त्रों के ख़िलाफ़
प्रक्षेपास्त्र चलाने वाले हाथों के ख़िलाफ़
हाथों को आदेश देने वाले दिमागों के ख़िलाफ़

लिखो कि अभी वसुंधरा पर
हम सांस लेना चाहते है खुली हवा में

लिखो कि अभी आकाश में
हम देखना चाहते हैं चमकता हुआ सूरज

लिखो कि हर शाम घर लौटकर
बच्चों के साथ खेलना चाहतें है

लिखो कि अभी जिए नहीं है हमने
जिंदगी के आने वाले अच्छे दिन

लिखो अभी जीवन के प्रति
बहुत कुछ उत्तरदायित्व शेष हैं

हवस के घोड़ों पर सवार
तानाशाहों के लिये यह चेतावनी है

दुनिया में जब तक इंसानों के बीच
शेष बची है जीने की इच्छा
तब तक वे करते रहेंगे विरोध
अपने बेमौत मारे जाने का ।

विरोध अपने बेमौत मारे जाने का ।

■ शरद कोकास ■

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