लाल गलियारे से… : उत्तम कुमार, सम्पादक दक्षिण कोसल.

14.03.2019 

मेरे खासमखास और पत्रकार राजकुमार सोनी की पिछली दो किताब बदनाम गली, भेड़िए और जंगल की बेटियां के बाद कोई एक साल के अंतराल के बाद उनकी नई पुस्तक लाल गलियारे से… विमोचन के लिए तैयार है। उम्मीद की जानी चाहिए कि नाम के अनुरूप भारत के राजनैतिक गलियारे में बीज रूप में मौजूद नए वैकल्पिक राजनैतिक पर यह पुस्तक खुलासा करेगा।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजकुमार ने अपने पुस्तक के विमोचन के लिए विशेष तैयारी की है। बिना पढ़े पुस्तक पर कुछ भी लिखना मुश्किल काम है। हां एक ऐसे समय पर जब वर्तमान राजनीति पर से लोगों का विश्वास उठ रहा है लाल गलियारे से… लोगों का आस जगता है। ऐसे विषय पर लिखना जो वर्जित है वर्तमान समय पर चुनौती भरा काम है। कई लोगों का जीवन इस विषय ने चौपट कर दिया है तो कई लोगों का जीवन इस वर्जित विषय ने उज्जवल भी किया है। पत्रकारिता के क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान से लेकर इस विषय ने कईयों को मुख्यधारा के राजनीति में शिखर तक पहुंचाया है।
उम्मीद की जानी चाहिए यह पुस्तक ख़तरनाक शब्द माओवाद और माओवादियों की राजनीति को खुलकर बताने में सफल रहेगा। यह शायद यह भी बताएगी कि कैसे आदिवासी क्षेत्र युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गई है। हजारों की संख्या में आदिवासी जेलों में बंद है। बेकसूर आदिवासी गोलियों तथा बलात्कार के शिकार हो रहे हैं। पत्रकार मारे जा रहे हैं, तो कई पत्रकार जेलों की हवा खा चुके हैं। लाल गलियारे से… उम्मीद है कि वह जनताना सरकार पर खुल कर बात करेगी। उम्मीद यह भी हैं कि पुस्तक करोड़ों की राशि जो केंद्र से पहुंच रहे हैं के हिसाब किताब पाठकों के बीच रखेगा। सरकार क्यों नहीं चाहती इस समस्या पर बातचीत कर समधान निकालना? हजारों की संख्या में सुरक्षा बल आदिवासी क्षेत्र में तैनात क्यों है? क्या यह बात सही है कि दुनिया का सबसे महंगी जल, जंगल और खनिज सम्पदा इन्हीं क्षेत्रों में है? इस पुस्तक से काफी उम्मीद है।
राजकुमार ने बताया है कि विमोचन के अवसर पर देश के प्रसिद्ध लोग उपस्थित रहेंगे। दंतेवाड़ा छोड़ने मजबूर कर दिए गये हिमांशु कुमार विशेष वक्ता के रूप में मौजूद रहेंगे। आलोचक प्रणय कृष्ण, बसंत त्रिपाठी, सत्यप्रकाश सिंह, पीयूसीएल के उपाध्यक्ष कमल शुक्ला के साथ इस गरिमामय कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखर आलोचक सियाराम शर्मा करेंगे जिन्होंने माओवाद पर काफी कुछ लिख छोड़ा है।
खैर, लाल गलियारे से…में मुख्य रुप से युद्धरत बस्तर और छत्तीसगढ़ की राजनीति का सच पढ़ने को मिलेगी। माओवाद के खात्मे के नाम भाजपा कांग्रेस सरकार में कैसा कुछ भयावह घट रहा है इसकी एक बानगी इस पुस्तक में मिल सकती है।आखिर सच को कहां से पाएं? सरकारी रिपोर्टों में? पुलिस विज्ञप्ति तथा बयानों में? या भूमिगत युद्धरत संगठनों के दस्तावेजों में? उम्मीद है तमाम सच्चाई के बीच सच बताने में पुस्तक तथ्यों, आकंड़ों, भंगिमाओं और बयानों के साथ पाठकों के बीच पहुंचने में सफल होगा। उम्मीद रखनी चाहिए घेरा, देश, मोर्चा जैसे सफल नाटकों के मंचन के बाद राजकुमार अपने तीसरे पुस्तक में छत्तीसगढ़ में सुरसा के मुंह की तरह बढ़ते भयावह माओवादी समस्याओं पर समाधान सुझाने में सफल रहेंगे।
ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं राजकुमार सोनी…
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dakshinkosal.mmagzine@gmail.com

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