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क्या 12, 15 साल के बच्चे नक्सली होते हैं ?? अगर ऐसा है तो चूल्लू भर पानी में डूब मरो सरकार जी क्योंकि फिर ये नक्सली नहीं आपके पापों की जन्म कुंडली है जो ये आदिवासी बच्चे स्कूल जाने के बजाय नक्सली बन रहें हैं !

आपने आजादी के 70 सालों में क्या दिया है इस देश को यह सवाल तो पुछी जायेगी ! आपसे यह सवाल भी पुछी जायेगी की आजादी के सबसे पहले व सबसे ज्यादा जिन आदिवासियों ने कुर्बानी दी उसका हिसाब क्या है ? आप से पुछी जायेगी विरसा मुंडा, तिलका मांझी, रघुनाथ महतो के कुर्बानी का हिसाब ! क्या दिया है आपने आजाद भारत में किसानों-आदिवासियों को ??

एक तरह किसानों को इतना कंगाल बना कर उसके बच्चों को इतना विवस होना पड़ता है कि गोली खाने के लिए सेना व अर्धसैनिक वलों में भुखा पेट नौकरी करनी पड़ती है ! रोटी-दाल मांगने पर स्पेंड कर देते हो ! झुठी युद्ध का महौल क्रियेट कर युद्ध में झोंक देते हो तो दुसरी तरफ इन्हीं किसानों के बच्चों से किसानों के बच्चों को नक्सली बता मरवाते हो ! सिर्फ इसलिए कि आपका बाप आवारा पुँजीवाद संसाधनों को लूट की पुरी छूट बनी रहे ! सिर्फ इसलिए कि इन आवारा पुँजीवाद के सहारे आपकी सत्ता बनी रहे ! अरे सरकार जी जिनके पुर्खों की पीढ़ियाँ दर पीढ़ियाँ गुजर गई इन संसाधनों के बचाने में उसे आप उनका वाजिब हक् तो आपने कभी दिया नहीं लेकिन गोलियों से उनके कलेजे के टुकड़े को आप छीन रहें हैं तो सिर्फ इसलिए कि लोग डर कर आवारा पुँजीवाद का विरोध न कर सकें ! अगर आपके लूट को विरोध करना नक्सली है तो वह इंसान जिसके दिलों में मानवता है वह नक्सली है ! अगर आपके मालिक का विरोध करना अगर बागी है तो समझिए हर वो आवाज मानवता के लिए उठती है वह बागी है !

अंतिम जोहार आपको आदि किसानों के बच्चों !
C&P

हेमंत वैष्णव की फेसबुक वाल से आभार सहित