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नंद कश्यप 

लगभग सारे चैनल एक बात को खास तौर पर रेखांकित कर रहे हैं वह यह कि विपक्ष के पास चेहरा नहीं है।यह भी मतदाता पर एक मनोवैज्ञानिक हमला है।हम प्रतिनिधि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हैं जहां सांसद प्रधानमंत्री चुनते हैं। आर्थिक सांस्कृतिक भौगोलिक विविधताओं से संपन्न इस विशाल देश को 130 करोड़ जनता चलाती है।उसे किसी राजा या तानाशाह की जरूरत नहीं है।

कोई चैनल यह नहीं बतला रहा कि विकसित योरोपीय देशों में पिछले पांच वर्षों में कितने प्रधानमंत्री के चेहरे के साथ चुनाव लड़े गए। यहां तक कि ब्रिटेन में दो चुनाव के बीच दो प्रधानमंत्री हो चुके हैं। लेकिन ये देश अपने आप में संपन्न और मजबूत लोकतंत्र कहलाते हैं। वैसे भी भारत में पिछले 30 वर्ष से अधिक हो चुके हैं मिली जुली सरकारों के कामकाज की।असल मुद्दा है चंद अमीरों के द्वारा हमारे प्राकृतिक संसाधनों के लूट का। यूपीए सरकार के दस वर्षों में इस देश के आदिवासियों, दलितों किसानों आम आदमी के पक्ष में सर्वाधिक कानून बने खासकर काम के अधिकार का ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, वनाधिकार कानून, सूचना के अधिकार का कानून,भूमि अधिग्रहण कानून, आदि। इन कानूनों ने जनता का सशक्तिकरण किया। लुटेरे कारपोरेटों को यह नापसंद था।उन लोगों ने आरएसएस के सहयोग से अन्ना हजारे को मैदान में उतारा। और मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए बकायदा पेश किया।

मोदी जनता की पसंद न होकर पूंजीपतियों कारपोरेटों अंबानी अडानी द्वारा प्रायोजित,योग, धर्म की खाल ओढ़े कुछ बाबाओं को भी इसमें शामिल किया गया था। इनमें से कुछ बाबाओं पर बलात्कार और हत्या के आरोप है और वो जेल में बंद हैं। मोदी के आने के बाद न ही लोकपाल बना,न ही किसी कोल माफिया,टू जी स्पेक्ट्रम चोर,काला धन, वाले को जेल की सजा हुई है।उल्टे मोदी के मित्र उद्योगपति का एक हिस्सा लगभग एक लाख करोड़ रुपए लेकर विदेश फरार हो गया।नोट बंदी से काला धन तो बाहर नहीं आया, हां एक करोड़ से अधिक लोग एक झटके में बेरोजगार हो गए।आज तक उसका असर है।

और अब फिर से चुनाव आ चुके हैं। बाबाओं के चेहरे इस कदर विकृत हैं कि अब वो मोदी का प्रचार करेंगे तो वोट ही काटेंगे। जनता के पास ले जाने भाजपा के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं था। पुलवामा कर लिया। देशभक्ति देशभक्ति का खेल भी ज्यादा नहीं चला तो प्रधानमंत्री “मैंने मारा मैंने मारा” चिल्लाना शुरू कर दिया।अब चूंकि दांव पर कारपोरेट और अडानी अंबानियों का धंधा लगा हुआ है और मीडिया इनके नियंत्रण में है इसलिए ये चेहरा दिखाकर वोट मांगने की फिराक में है। लेकिन भाजपा के पा सिर्फ एक योग्य चेहरा है। मोदी। लेकिन विपक्ष के पास जन सरोकार से जुड़े लोकतंत्र सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध अनेक योग्य चेहरे हैं और वह सरकार देश के किसानों मजदूरों आदिवासियों दलितों की बेहतर सरकार होगी।वह सरकार आरएसएस नीत संविधान विरोधी मनुवादी सरकार से लाख गुना ज्यादा बेहतर सरकार होगी।

इसलिए चेहरे पर नहीं जनता के असली मुद्दों पर वोट करें। मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, राफेल विमान घोटाले, तमाम भाजपा शासित राज्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर भाजपा का असली चेहरा जनता के सामने लाने की जरूरत है।

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