यूनाइटेड नेशन्स की मानव अधिकार परिषद् ने अपनी रिपोर्ट में सुधा भारद्वाज और सोनी सोरी की प्रताड़ना को रेखांकित किया.

संयुक्तराष्ट्र संघ के मानवाधिकार परिषद
के 40 वें सत्र (फरवरी 25 मार्च 22 , 2019)
का एजेंडा विषय क्रमांक 3

सभी मानव अधिकारों, नागरिक, राजनितिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की बद्दोत्तरी और सुरक्षा, जिनमें विकास का अधिकार शामिल है.
महिला मानव अधिकार रक्षकों की दशा
मानव अधिकार रक्षकों की परिस्थिति पर स्पेशल रपट.

(United Nations A/HRC/40/60 : General Assembly Distr.: General 10 January 2019)

छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में, इस रपट के कुछ अंश निम्नलिखित हैं:

देशज महिला मानव अधिकार रक्षकों एवं अल्पसंख्यक समूहों से महिला मानव अधिकार रक्षकों .

Indigenous women human rights defenders and women human rights defenders from minority groups

63 . देशज महिला रक्षक अक्सर अपनी ज़मीन, क्षेत्र और  प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकारों की रक्षा में सक्रिय रहती हैं. वे अक्सर कोरोपोरेशनों और स्थानीय प्राधिकरणों की कार्यवाई का प्रतिरोध करती हैं, जो इनसे कहीं अधिक संसाधनों से लैस रहते हैं. भौगोलिक तौर पर तितर -बितर किये  जाने और अक्सर ग्रामीण इलाकों में रहने के कारण, वे अन्य साथी महिला रक्षकों से संपर्क करने में कठिनाइयों का सामना करती हैं.

63. Indigenous women defenders are often involved in protecting their rights to their lands, territory and natural resources. They often resist the actions of corporations and local authorities that are much better resourced. Geographically dispersed and often living in rural areas, they can find it difficult to connect with fellow women defenders.

64 .अल्पसख्यक समुदाय की महिला रक्षक पूर्वाग्रहों और भेदभावों के खतरों का कहीं ज़्यादा ही सामना करती हैं, खासकर उनके अल्पसंख्यक और सक्रिय होने के कारण. भारत के छत्तीसगढ़ में, उदाहरण के तौर पर, सोनी सोरी नामक आदिवासी स्कूल शिक्षिका अपनी सक्रियता के कारण पुलिस द्वारा लगातार निंदा, उत्पीड़न और डराने-धमकाने का शिकार होती रहीं हैं. फरवरी 2016 में अज्ञात हमलावरों द्वारा वे एसिड हमले की शिकार हुईं, जिन्होंने उन्हें चेतावनी दी कि बस्तर ज़िले के इंस्पेक्टर जनरल से कोई शिकायत न करें, और उनके अलावा उन्होंने उनकी बेटी को भी धमकाया. सन 2011 में उन्हें आठ अलग-अलग आरोपों में गिरफ्तार किया गया था. जिनमें से सात प्रकरणों में उन्हें बरी कर दिया गया, और आठवें में उन्हें ज़मानत मिल गई. उन्होंने रपट की थी कि हिरासत में उन्हें यातना दी गई थी, और योनिक उत्पीडन का उन्हें सामना करना पड़ा.

64. Women defenders belonging to minority groups are often at greater risk of prejudice and discrimination because of their activism and their minority backgrounds. In Chhattisgarh, India, for example, Adivasi schoolteacher Soni Sori continues to be slandered, harassed and intimidated by the police for her activism.23 In February 2016, she was the victim of an acid attack by unidentified assailants who warned her not to complain about the Inspector General of Bastar District and threatened her daughter. In 2011, she was arrested on eight charges. She was acquitted of seven of them and granted bail in connection with the eighth. While in custody, she reported being tortured and sexually harassed.

65 सुधा भारद्वाज, एक वकील हैं, और जो अदिवासियों, दलितों, मज़दूरों और किसानों की मदद करती हैं, बदनाम करने वाले एक शातिर अभियान को उन्हें सहना पड़ा, और उन्हें २८ फरवरी 2018 को विधिविरुद्ध क्रिया – कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 (U.A.P.A.) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. उनके घर पर छापा मारा गया, उनकी व्यक्तिगत सामग्री को ज़प्त किया गया, और उन्हें घर में नज़रबंद रखा गया.

65. Sudha Bhardwaj, a lawyer who assists Adivasis, Dalits, workers and farmers, endured a vicious smear campaign and was arrested on 28 August 2018 under the Unlawful Activities (Prevention) Act.24 Her house was raided, her personal items seized, and she has been placed under house arrest.

(यूनाइटेड नेशंस की स्पेशल राप्पोर्तयूर की रपट अंग्रेजी मूल से हिंदी में अनुवादित)

(United Nations A/HRC/40/60 : General Assembly Distr.: General 10 January 2019)

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