सुधा भारद्धाज द्वारा 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए लिखा गया पत्र.

8 मार्च को रायपुर में महिला अधिकार मंच की रैली प्रदर्शन के समय पुष्पा ने पढकर सुनाया यह पत्र जो उन्होंने यरवड़ा जेल पूणे से लिखखर भेजा है.

जम्मू दीदी मंनला लाल जोहार लइका मनला…

मैं अभी सोच रही थी कि पिछले 30 सालों से छत्तीसगढ़ की मेहनतकश महिलाओं ने मुझे कितना सिखाया, अपनाया और साथ दिया। दल्ली की महिलाओं ने मजदूर साथियों के घरों में मेरी जड़ों को जमाया। केडिया डिस्टलरी की महिलाओं ने अधिकार की तीखी लड़ाई में शामिल होना सिखाया, इदावनी से लेकर कोसमपाली तक की वीडियो ने जमीन बचाने की कठिन लड़ाई समझाई। मुगर्डिह, मजदूर नगर और जामुन की महिलाओं ने सिर्फ बस्ती बचाना नहीं, पत्नियों की परिवार में और यूनियन में महिलाओं की बराबरी की लड़ाई सिखाइ। शहीद स्कूल की युवा बेटियों ने नई सोच और नए सपने के बीज बोने सिखाएं। इसलिए हजारों मील दूर रहकर भी मैं आज अपने आप को आप ही के बीच में महसूस कर रही हूं। पर आज नियोगी जी ,शहीद अनुसुइया, शहीद सत्यभामा के सपनों का नया जनवादी छत्तीसगढ़ बनाने का रास्ता बहुत मुश्किलो और चुनौतियों से भरा है।

आज पूरे देश में धर्म के नाम पर दंगा करवाने की कोशिश में चल रही है। कठिन संघर्षों के बाद दलितों और मजदूरों ने जो अधिकार प्राप्त किए हैं उन्हें पैरों तले लोन देने की कोशिश चल रही है। किसानों को कर्ज़ के बोझ तले कुचला जा रहा है। खनन कंपनियां आदिवासियों के जल जंगल, जमीन को खाने के लिए मुंह बाए खड़ी है।

महिलाएं इन सब मोर्चे पर आगे हैं उन्हें और आगे बढ़ना है। और दूसरी ओर कार्यस्थल की गैर बराबरी परिवार में गुलामी और समाज में कुरूर यौन हिंसा से भी लड़ना है। हम सब और ज्यादातर मजबूत हो ,हमारा बहनापा का मजबूत हो, हमारा संगठन मजबूत हो,हमारी बेटियां मजबूत हो, यही आज के दिन मेरे दिल से कामना है। क्योंकि हम छत्तीसगढ़ की नारी हैं फूल नहीं चिंगारी हैं। 

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