8.03.2019 /धमतरी 

धमतरी में सीटू यूनियन से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया. इस अवसर पर उन्होंने सभा की, “1500 में दम नहीं, कलेक्ट्रेट रेट से कम नहीं” के नारे लगते हुए रैली निकाली, जिलाधीश कार्यालय पर प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की. ये महिलायें मंडी, आंगनबाड़ी, मध्यान्ह भोजन, बीड़ी, भारतमाता वाहिनी, कमांडो आदि असंगठित क्षेत्र से जुड़ी हुई थीं.

सभा को सीटू के राज्य महासचिव अजीत लाल, जिला सचिव समीर कुरैशी, आंगनबाड़ी यूनियन के राज्य अध्यक्ष गजेंद्र झा सहित अनुसुईया टुंड्रा, सीता साहू, कुमारी साहू, गंगा विश्वकर्मा, नैमिन निषाद, जयश्री गोस्वामी आदि स्थानीय महिला श्रमिक नेताओं ने संबोधित किया. उन्होंने अपने कार्य स्थल पर काम की कठिन परिस्थितियों और लैंगिक भेदभाव के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि पुरूषों के बराबर काम करने के बावजूद उन्हें समान मजदूरी से ठेकेदारों द्वारा वंचित किया जाता है. राज्य सरकार के बजट में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को कुछ भी राहत न मिलने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई. उन्होंने संसद तथा विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण की भी मांग की.

माकपा राज्य सचिव और छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार श्रम कानूनों को लगातार कमजोर कर रही हैं, जिसका नतीजा हैं कि वे न्यूनतम मजदूरी तक से वंचित हैं. राज्य में जो योजनाकर्मी काम कर रहे हैं, उन्हें न्यूनतम वेतन देने के लिए केवल 2500 करोड़ रुपयों की जरूरत है, लेकिन यह राशि देने से सिर्फ इसलिए इंकार किया जाता है कि इससे कॉर्पोरेट मुनाफों को नुकसान पहुंचता है.

माकपा नेता ने कहा कि आज सांप्रदायिकता के नाम पर पूरे समाज को बांटने की कोशिश हो रही है और इसका नुकसान महिलाओं को ही उठाना पड़ता है. इसी का नतीजा है कि ईज्जत के नाम पर हत्याएं हो रही हैं, बलात्कारियों के पक्ष में जुलूस निकल रहे हैं, प्रेम विवाह को निशाना बनया जा रहा है और मंदिरों तक में महिलाओं के प्रवेश का विरोध किया जा रहा है. सांप्रदायिक ताकतें फासीवादी आधारों पर समाज का पुनर्गठन करने पर तुली हुई है और अंध-राष्ट्रवादी भावनाएं फैला रही हैं.

पराते ने अपने संबोधन में संगठन को मजबूत करने औए आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा की पराजय सुनिश्चित करने की भी अपील की.

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