पत्रकार वार्ता :  8 मार्च 2019 अंतराष्ट्रीय महिला दिवस,संघर्षशील महिलाओं का कूच राजधानी की ओर: .छत्तीसगढ़ महिला अधिकार मंच

रायपुर : 7.03.2019 

आज रायपुर में महिला अधिकार मंच ने पत्रकारों को संबोधित करते हुये कहा कि कल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन रायपुर में संघर्ष को हम सब मिलकर आगे बढाएंगे जिसके लिए सभी संघर्षशील और प्रगतिशील महिलाओं को 8 मार्च 2019 को रायपुर मे एकत्रित होने के लिए आमंत्रित करते है। ग्राउंड मे आम सभा के बाद सभी साथियों द्वारा गिरफतारी दी जाएगी.

आगे उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पूरे विश्व मे महिलायों को सम्मान देने,सामाजिक से लेकर राजनितिक जीवन मे महिलाओं द्वारा प्राप्त की गयी उपलब्धियों को मनाने और लिंग समानता पर बल देने के लिए मनाया जाता है। साथ ही यह एक एैसा दिन है जो महिलाओं के संघर्ष और आन्दोलनों को सम्मानित करता है और अपने अधिकार व सम्मान के लिए संघर्ष की प्रेरणा देता है। आजकल बाजार ने अपने फायदे के लिए इस दिन को त्यौहार के जैसा बना दिया है और अपना सामान बेचने के लिए महिलायों का इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए जरूरी है कि हम इस दिन के इतिहास को लगातार याद करें।

पूंजीवादी,मनुवादी जातिगत, पित्रसत्तात्मक समाज और सरकारों द्वारा अलग-अलग रूपों मे हम पर हिंसा किया गया है,जिसमें जातिगत हिंसा की बहुत बड़ी भूमिका रही हैं।इसका विरोध हम महिलाएं ऐतिहासिक रूप से करती आई है। छत्तीसगढ के परिप्रेक्ष्य मे केन्द्र और राज्य की कॉरपोरेट परस्त सरकार द्वारा पिछले कुछ सदियों से संसाधनो की लूट और विकास के नाम पर ना सिर्फ आदिवासी जनता से उनके जल,जंगल,जमीन छीने बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का हनन भी किया, किसानों से उनकी कृषि भूमि छीन कर बडी-बडी कंपनियों को दे दिया हैं। किसी भी तरह के विरोध को गैरकानूनी बता कर कुचला गया है। आदिवासियों के नक्सल उन्मूलन के नाम पर फर्जी एनकाउन्टर,सरेंडर और गैर कानूनी गिरफतारियां होती रही है।

सुरक्षाबलों और पुलिसफोर्स द्वारा बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों मे महिलाओं के ऊपर हुए यौनिक हिंसा की घटनाएं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा सामने लाई गई है। हिंसा के अलग-अलग रूपो का जैसे- मजदूरों की आजिविका छीनना या उनको न्यूनतम वेतन ना देना, महिलाओं पर तेजाब छिडकाव, और महिलाओं के साथ हो रहे यौनिक शोषण का, व अत्यधिक संसाधनों के खनन का, तथा वंचितों के लिए लड रहें मानव अधिकार कार्यकर्ताओ की गिरफतारी का छत्तीसगढ साक्षी रहा है।

इस तरह की प्रताड़ना व दमनात्मक हिंसा को खत्म करने के लिए,हिंसा मुक्त समाज बनाने के लिए, और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए,हम राज्य की महिलाओं को एकजुट होने का आव्हान करते है। खासकर एैसे समय मे जब पुलवामा के नाम पर सियासी ताकतें जाति और धार्मिक हिंसा फैला रहें है,तब हम औरतें युद्ध और बदले की आग को आगे ना बढाकर समानता और न्याय की लडाई को आगे ले जाना चाहते हैं, हम देख रहे है किस तरह 2 मुल्को की लडाई मे बेंगुनाह लोग मारे जा रहे करते है जिसमें महिला संगठन देशों के बीच शान्ति की मांग करते है । यह बहुचर्चित मसला हमारे सामने रख दिया गया है ताकि हम सुप्रिम कोर्ट के द्वारा 13 फरवरी को आए वनाधिकारिक पटटों के निरस्तीकरण के आदेश,जिससे कई लाख आदिवासी प्रभावित होंगे, उसे भूल जाय और मुल्कों की लडाई मे व्यस्त हो जाए,हालंकि इस पर अभी रोक लगा दिया पर यह भी एक चुनावी पैतरा है जिसे हम साफ देख सकते है |

छत्तीसगढ़ की संघर्षशील महिलाएं, राज्य सरकार का ध्यान राज्य में हो रहे महिला हिंसा , शोषण और असुरक्षित माहौल पर उठाना चाहते है जिसका कारण ऐतिहासिक रूप से पूंजीगत, जातिगत और पित्रसत्तात्मक व्यवस्था में है | हमारा मानना है की छत्तीसगढ़ सरकार इससे निपटने के लिए मजबूत शासकीय तंत्र बनाने में न सिर्फ नाकाम रही है बल्कि जहाँ शासन और शासकीय व्यक्ति इस हिंसा और दमन में शामिल है, उनको सरकार द्वार पनाह दी गयी है| नयी सरकार आने के बाद भी बस्तर में सुरक्षा बलों द्वारा आदिवासी महिलाओं पे लैंगिक और शारीरिक हिंसा रुक नहीं रहा है ना ही कांग्रेस सरकार द्वारा इसपे कारवाई के लिए कोई कदम उठाये गए है| इस व्यवस्था में बदलाव और सुधार के लिए हम राज्य सरकार से यह मांग रखते है –

1. बस्तर में सुरक्षा बालों द्वारा आदिवासी महिलायों पे हिंसा बंद हो जिसकी कड़ी नयी सरकार आने के बाद बी रुकी नहीं है| पुराने हिंसा के केसेस जैसे पेद्दगेल्लुर, नेन्द्रा, हाल में हुए सुकमा और भैरमगढ़ के ताड़ीबल्ला और कोरसागुडा की घटना जिसमें दो छोटी लड़कियों के साथ बलात्कार भी हुआ, दंतेवाडा के समेली में सुरक्षा बल द्वारा बच्ची पे लैंगिक हिंसा और आत्महत्या , मीना खालको (बलरामपुर) के वसे में न्यायिक जांच की अनुशंसा के बावजूद कोई कारवाई नहीं हुई है | बस्तर का सैन्यकरण बंद किया जाए जो मुख्यतः कॉर्पोरेट घरों को जमीन देने के लिए किया जा रहा है |

2. पिछले कुछ सालों में राज्य में लैंगिक हिंसा के कई केसेस सामने आये खासकर जिसमें अमीर या ताकतवर व्यक्ती जिम्मेदार थे जैसे भिलाई की आरती , मंजीत कौर बल, कोमाखान से दलित युवती इन सभी केस में शासन और पुलिस द्वारा महिलायों की सुनी नहीं गयी या फिर न्याय मिलने ने बहुत देरी हुई| सरकार इन केसेस पे जल्द न्याय के लिए दबाव डाले |

3. जेन्डर-आधारित हिंसा को एक जन-स्वास्थ्य संबंधी मुद्दा माना जाए और आवश्यकता पड़ने पर शीघ्र बचाव एवं स्वास्थ्य देखभाल, व्यापक मेडिकल देखभाल और पीड़ित व्यक्तियों को लगातार सहायता सुनिश्चित किया जाए। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में इसके लिए जेंडर आधारित हिंसा से निपटने के लिए विशेष नीति बनायी जाए | ट्रांसजेंडर समुदाय पे होने वाली हिंसा से निपटने और सामाजिक, राजनैतिक और कानूनी अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है | ट्रांसजेंडर पर्सन्स(प्रोटेक्शन ऑफ़ राइट्स) बिल, 2018 को ट्रांसजेंडर समुदाय की मांगों के आधार पर केंद्र सरकार को संशोधित करने की जरूरत है | जेन्डर-आधारित हिंसा से निपटने के लिए शासन की कुछ तंत्र है जैसे पुलिस, सखी वन स्टॉप सेंटर, डिस्ट्रिक्ट प्रोटेक्शन ऑफिसर, अस्पतालों और पुलिसद्वारा पालन किये जाने वाले नियम है जिनका कडाई से पालन हो |

4. नसबंदी काण्ड को तीन साल हो गए लेकिन आज भी दोषियों पे कोई कार्यवाही नहीं हुई है | सरकार नसबंदी काण्ड से सीख लेने में असफल रही है जहां आज भी महिलायों को सरकारी अस्पतालों में नसबंदी सेवाएं नहीं मिल रही| सरकार को गर्भनिरोध के अस्थायी साधनों और पुरुषों की भागीदारी बढाने पर जोर देने की जरूरत है| जिसके लिए एक मजबूत स्वास्थय तंत्र की जरूरत है |

5.प्रदेश में महिलायों और बालिकायों की आवासीय संस्थायों जैसे कन्याआश्रम, जुवेनाइल होम्स, हॉस्टल में पिछले सालों में कई लैंगिक हिंसा के मुद्दे आये है और साथ ही इसमें रहने की स्थिति खराब है जिसे निपटने के लिए सरकार कड़ी निगरानी के लिए कदम उठाये | इसके लिए सरकार द्वारा स्वतंत्र सोशल का प्राव्शान ऑडिट किया जाए जिसमें महिला संगठनों को भी शामिल किया जाए |

6. मूलभूत शासकीय सेवायों जैसे शिक्षा , स्वास्थय , पोषण पर सरकार तंत्र पूर्ण रूप से जिमीदारी ले| इसमें निजीकरण , पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप्स, आउटसोर्सिंग, ठेका प्रथा बंद की जाए | लोगों को पूर्ण रूप से निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ, प्राथमिक से टर्शिअरी स्तर तक, एवं सरकारी अस्पतालों में सभी आवश्यक औषधियां एवं जांच सेवाएं सुनिश्चित की जाए|

7. मजदूर महिलायों को समान वेतन एवं मजदूर वर्ग को कार्यस्थल में सुरक्षा के लिए कानूनों का सख्ती से पालना किया जाए | न्यूनतम वेज , पर्याप्त क्षतिपूर्ति, सामाजिक सुरक्षा, मातृत्व सहायता, झूलाघर की उपलब्धता एवं कार्यस्थल में हिंसा और शोषण मुक्त वातावरण सुनिश्चित करना अत्यंत जरूरी है | मितानिन आंगनवाड़ी , मध्यान्ह भोजन रसोइया और अन्य असंगठित मजदूरों को नियमित किया जाए , न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए |

8.. सरकार के कुछ कदम जैसे पत्रकार सुरक्षा कानून और आदिवासी बंदी की रिहाई के लिए बनायी गयी जांच समिति का हम स्वागत करते है| हम उम्मीद करते है की इससे राज्य में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आदिवासियों पर दमन की कड़ी बंद होगी और उम्मीद करते की यह जांच समिति समयबद्धऔर संवेदनशील तरीके से क्रियान्वन करे और इससे बंदियों की रिहाई करे .

 हम राज्य सरकार से मांग करते है की देश में भीमा कोरेगांव के नाम पर सुधा भारद्वाज और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए महाराष्ट्र और केंद्र सरकार पर दबाव डाले | वही CSPSA कानून, जिसका राज्य में नक्सल उन्मूलन के नाम पे आदिवासियों के दमन में इस्तेमाल होता आया है | बस्तर में राजनातिक बंदी खासकर महिला राजनैतिक बंदियूं की रिहाई के लिए कदम उठाये जाए |

9. पेसा और वनाधिकार कानून का पालन किया जाए जिससे आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित हो | महिलायों के लिए इन कानूनों के अधिकारों जैसे कानूनी मालिकाना, समिति और निर्णय लेने में भागीदारी , इसका पालन हो | उछातम न्यायालाय के निरस्त पट्टों के आदिवासियों को जमीन से बेधाखाल करने के निर्णय का सबसे ज़्यादा प्रभाव महिलायों पर पढेगा जो रोजमर्रा के कामों के लिए जंगल पर निर्भर है | इस फैसले का राज्य सरकार विरोध करे और आदिवासी अधिकारों के लिए पैरवी करे|

10. राज्य में हिंदूवादी और जातिवादी ताकतों द्वारा अल्पसंख्यकों पर हमले के मुद्दों पर सरकार कार्यवाही करे एवं उनके संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा करे | राज्य में हो रहे गौ ह्त्या और धर्मांतरण के नाम पे हो रही हिंसा और गिरफ्तारियों पे समिति का गठन करके कारवाई की जाए |

ऐसे संघर्ष को हम सब मिलकर आगे बढाएंगे जिसके लिए सभी संघर्षशील और प्रगतिशील महिलाओं को 8 मार्च 2019 को रायपुर मे एकत्रित होने के लिए आमंत्रित करते है। ग्राउंड मे आम सभा के बाद सभी साथियों द्वारा गिरफतारी दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ महिला अधिकार मंच
दिनांक :8 मार्च 2019
स्थान- गांधी मैदान,नगर निगम के सामने (काली बाडी,रायपुर)
समय: 11 बजे

संपर्क-
राजिम – 9165234809, दुर्गा- 9584411113, रिनचिन- 9516664520,

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