5.03.2019

भैरमगढ में जन सभा प्रारंभ .सोनी सोरी ,लिंगा राम कोडोपी और हजारों ग्रामीण आदिवासी सुना रहे हैं अपनी व्यथा.उनकी मांग है कि 7 फरवरी को भैरमगढ के गांव में दस आदिवासियों और बच्चों की हत्याकांड के जिम्मेदार सुरक्षाबलों पर अपराध दर्ज किया जाये .

7 फरवरी 2019 अबुझमाढ़ पहाड़ी पर स्थित ताडिबल्ला, भैरमगढ़ तहसील, बीजापुर में आदिवासी बडी संख्या में कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम देख रहे थे जो संभवतः माओवादियों ने आयोजित किया था. यहीं पर सुरक्षाबलों ने एक तरफा फायरिंग शुरू कर दी ,इसके पहले ही माओवादी वहाँ से भाग गये .ग्रामीण पुलिस को कहते रहे कि हम सब ग्रामीण ही है ,हमारा कोई संबंध माओवादियों से नहीं  है ,लेकिन पुलिस वालों ने हमारी नहीं सुनी.हम लोग वहाँ से भागने लगे तो दौड़ा थोड़ा कर हमारे बच्चों को मार डाला .कुछ स्कूल जाने वाले बच्चे थे और बांकी अन्य आदिवासी . पुलिस के लोगों ने निशाना लगा लगा कर घरों में घुस कर मारा.हमारे आसपास के गांँव के दस लोग मारे गये.

हत्याकांड के बाद  सुरक्षाबलों ने हथियार शव के पास रख दिये.गौरतलब है कि इस घटना को सरकार और गृह मंत्री सैनिको की एक बड़ी जीत के नाम पर दिखा रहे है, लेकिन इस घटना के बारे में ज़रा सी भी पूछताछ या कार्यवाही करे तो एक बेहद ही खौफनाक हकीकत सामने आ पड़ती है. बस्तर के कई ग्राम के आदिवासी सरकार के झूठ का पर्दाफाश कर अपनी कहानी सुनाने के, और न्याय की गुहार लगाने के लिए आज 5 मार्च 2019 को भैरमगढ़ में एकत्र हुये जिनकी संख्या हजारों में है ।

दिनांक 7 फरवरी को बीजापुर पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग की ओर से यह कहा गयख कि नक्सलियों और संयुक्त सुरक्षा बल के बीच मुठभेड में दस नक्सली की मौत हो गई. उसी दिन से हम इन तथाकथित “नक्सलियों” के परिजन और अन्य ग्रामवासी न्याय की अपेक्षा में इधर-उधर गुहार लगा रहे है और लड़ाई लड़ने की इस कड़ी में कल भैरमगढ़ में घटना के अपने विवरण का एक काउंटर ऍफ़.आई.आर दर्ज कराने  की मांग कर रहे हैं .
अभी सभा चल रही है. सभा में बड़ी संख्या में पत्रकार तथा जनसंगठनो के कार्यकता शामिल हैं .

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