भारत में इस्लामी आतंकवाद एक सरकारी शगूफा है:. हिमांशु कुमार

4.02.2019

{ हिमांशु कुमार की फेसबुक से आभार सहित }

भारत में दमनकारी कानून बनाये गये उसमें 95% तक निर्दोष मुसलमानों को जेलों में ठूंस दिया गया

इन जेल में डाले गये मुसलमानों में से 98% निर्दोष पाए गये

कोई आठ साल कोई सोलह साल कोई तेईस साल बाद जेल से निर्दोष साबित होकर निकले

इंडियन मुजाहिदीन नाम का संगठन सरकारी शगूफा साबित हो चुका है

मैंने आजमगढ़ संजरपुर और अनेकों इलाके का दौरा किया

मैं उन लोगों से मिला हूँ जिन्हें आतंकवादी केसों में झूठा फंसाया गया

अमेरिका में काले और अप्रवासी गरीबों को जेलों में भरा जाता है

भारत की जेलें आदिवासियों, दलितों और मुसलमानों से भरी हुई हैं

आज तक आपने कोई ऐसा अमीर जेल में नहीं देखा होगा

जो अपने मजदूरों को कानून से भी कम मज़दूरी देता हो

ना आपने ऐसा कोई पूंजीपति जेल में देखा होगा जिसने मुख्यमंत्री और कलेक्टर को रिश्वत देकर किसानों की ज़मीन हड़प कर अपना कारखाना बना लिया हो

जब पूंजीवाद का नया दौर आया और सरकारों ने लोककल्याण कारी राज्य से अपना मुंह मोड़ कर पूंजीवाद की सेवा करना लक्ष्य बना लिया

तब सवाल उठा कि अब सरकार को जनता क्यों चुनेगी ?

तब सोचा गया कि जनता को बहकाओ कि तुम खतरे में हो और सरकार तुम्हारी रक्षा कर रही है

अमेरिका इस प्रोजेक्ट का जन्मदाता था भारत भी उस प्रोजेक्ट का हिस्सा बना

अमेरिका की सीआईए ने आतंकवादी खड़े किये नशे का करोबार फैलाया जिसे नारको टेररिज्म कहा जाता है

उसके बाद अमेरिका ने इस आतंकवाद को खत्म करने के नाम पर मुस्लिम बहुल तेल के इलाकों पर हमले शुरु किये

भारत में भी उसी दौर में टाडा पोटा मकोका के तहत हजारों मुसलमान नौजवानों को जेलों में डाला

कई सारे मामलों में सरकारी एजेंट मुस्लिम नौजवानों को भड़काने के मामले सामने आये

बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हजारों मुस्लिम नौजवानों को इसलिए जेलों में डाला गया कि यह लोग बदला ले सकते हैं

हाँलाकि आज तक किसी ने बदला नहीं लिया

ना बाबरी मस्जिद का, ना गुजरात दंगों का ना मुज़फ्फर नगर दंगों का

लेकिन भारतीय मुसलमानों को हमेशा शक़ के दायरे में रखने का काम भारत की राजनीति ने किया

भारत के मुसलमानों ने हमेशा धर्मनिरपेक्षता के नाम पर वोट दिया

भारत में मुसलमानों के नाम पर कई पार्टियां बनाई गईं

लेकिन भारत के मुसलमानों ने उन पार्टियों को हमेशा ठुकरा दिया

आज भी मुसलमान धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए कभी मायावती कभी अखिलेश और कभी कांग्रेस को वोट देते हैं

आज़ादी की पहली लड़ाई में सबसे ज़्यादा कुर्बानी मुसलमानों ने दी थी

अट्ठारह सौ सत्तावन के गदर में फांसी पर चढ़ने वालों की लिस्ट चेक कीजिये

आपको ज़्यादा नाम मुसलमानों के मिलेंगे

भारत के बंटवारे का पहला प्रस्ताव हिन्दू महासभा ने 1933 में पारित किया था

उसके एक साल बाद मुस्लिम लीग ने कहा कि ठीक है अगर आपको हमारे साथ नहीं रहना तो हम अपना अलग देश मांग लेते हैं

इसलिए अगर भारत के विभाजन के लिए कोई ज़िम्मेदार है तो यही हिंदुत्व की राजनीति करने वाले हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हैं

याद रखिये मुस्लिम लीग की स्थापना हिन्दुओं के खिलाफ नहीं हुई थी

लेकिन संघ ने शुरू में ही घोषित कर दिया था कि हमारे दुश्मन अँगरेज़ नहीं हैं बल्कि मुसलमान और कम्युनिस्ट हैं

इन संघियों की चालाकी देखिये कि यह लोग विभाजन की सारी ज़िम्मेदारी गांधी के सर पर डाल देते हैं

साम्प्रदायिक एकता की बात करने वालों को पकिस्तान परस्त कह कर उस पर टूट पड़ना संघ की पुरानी रणनीति है

याद कीजिये गांधी को इन्होनें पाकिस्तान की हिमायत करने वाला कह कर ही मारा था

भारत के मुसलमानों ने आज़ादी से पहले भारत में रहना चुना

दंगों में मुस्लिम लीग ने बड़ी संख्या में उदार मुसलमानों को मारा था

आज़ादी के बाद से आज तक पाक के लिए जासूसी के मामलों में पकड़े गये लोगों में अधिकाँश हिन्दू हैं

फिर भी संघ अपने नेटवर्क के माध्यम से लगातार मुसलमानों को देशद्रोही साबित करने का प्रचार करता रहता है

संघ के निशाने पर वह उदारवादी हिन्दू भी हैं जो संघ के इस झूठे प्रचार का भंडाफोड़ करते रहते हैं

क्योंकि संघ खुद को भारत के सारे हिन्दुओं का प्रतिनिधि साबित करना चाहता है

लेकिन जब उदारवादी हिन्दू ही संघ के खिलाफ बोलते हैं तो संघ के अस्तित्व की जड़ हिल जाती है

उदारवादी हिन्दू और उदारवादी मुसलमान ही भारत में साम्प्रदायिक संगठनों का खात्मा कर संविधान के राज को लागू करेंगे.

***

हिमांशु कुमार ,गांधी वादी कार्यकर्ता 

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