भैरमगढ : 7 फरवरी को फर्जी मुठभेड़ में मारे गये दस आदिवासियों और बच्चों के परिजन और ग्रामीण आयेंगे कल भैरमगढ अपनी कहने के लिये . कलेक्टर से कहा उन्हें आने दें.

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4.03.2019

सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी ने बीजापुर के कलेक्टर को पत्र लिखकर कहा है कि 7 फरवरी को दस आदिवासियों की सुरक्षाबलों द्वारा कि गई हत्या के खिलाफ़ और सुप्रीम कोर्ट की रोशनी मे अपनी बात कहने पांच मार्च को बीजापुर आ रहे है .

सोनी ने पत्र में लिखा है कि आदिवासियों का जीवन संघर्ष से भरा से उसकि हर सुबह शाम वे डर और मौत के भय में जीवन बिता रहे है .वे भैरमगढ आकर अपना दर्द बताना चाहते है .उन्होंने कलेक्टर से ग्रामीणों को आने देने किसी प्रकार के व्यवधान न होने की बात कही है .

सोनी ने एक दिन पहले एक साक्षात्कार में कहा कि सात फरवरी को कुछ ग्रामीण कोई नक्सली सांसकृतिक कार्यक्रम देखने गये थे ,वहीँ सुरक्षाबलों ने हमला कर दिया जिससे नक्सली तो सब भाग गये लेकिन दस निर्दोष आदिवासी मारे गये जिसमे बच्चे शामिल है.

पुलिस ने इन सब आदिवासियों को नक्सली बता दिया ओर उन्हें मरने के बाद ड्रेस पहना दिया और शव के पास बंदूके़ रख दी.सोनी ने घटना स्थल जाकर सबूत पत्रकारों को दिखाये जिसमे़ बच्चों के पानी पीने की बोतल और महिलाओं के कपडे दिखाये तथा प्रशन किया कि पुलिस को यह सबूत क्यों नहीं दिखे , जिस लक्ष्मी का उन्होंने ब्लाउज दिखाया वह गांव में जिंदा हैं .साधारण आदिवासियों को नक्सली सिद्ध करने के लिये बंदूकें क्यों रख दीं.

सोनी ने छत्त्तीसगढ में आई कांग्रेस की सरकार से अपील की है कि इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच कराई जाये तथा हत्या करने वाले सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ़ कार्यवाही की जाये.

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