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महेंद्र दुबे ,वरिष्ठ अधिवक्ता ,छत्त्तीसगढ उच्च न्यायालय .

इस पुरानी बेवफा दुनिया का रोना कब तलक
आइये मिल जुल के हम दुनिया नई पैदा करें!

पाकिस्तान के सीनियर जर्नलिस्ट रऊफ क्लासरा 27 फरवरी को अपने टाक शो में कह रहे थे कि पाकिस्तानी वजीरेआजम इमरान खान को इंडियन प्राइम मिनिस्टर से बैठ कर बात करनी चाहिये और इंडियन पायलट अभिनन्दन वर्धमान को “एज ए गेस्चर ऑफ पीस” इंडिया के हवाले कर देना चाहिये! रउफ क्लासरा ये बात तब कह रहे थे दोनों मुल्क के दरम्यान जंग की कशीदगी थी और उन्मादी वार मोंगर्स, युद्ध के रास्ते अपनी अपनी देशभक्ति का गुबार निकालना चाह रहे थे! कल्पना कीजिये कि स्थिति इसके उलट होती, कोई पाकिस्तानी पायलट ऐसी हालत में इंडिया के कब्जे में होता और यही बात रउफ क्लासरा की जगह कोई इंडियन जर्नलिस्ट कहा होता तो अब तक गद्दार घोषित होकर ट्रोलरो की शाब्दिक पत्थरबाजी से लहूलुहान हो चुका होता, उसके घर और आफिस पर लोग देशभक्ति के गोले दाग रहे होते और वो मुंह छुपाये भागता फिर रहा होता!

पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट मीडिया, और सोशल मीडिया ने देश के मनस्थिति पर कब्जा कर रखा है! दीगर पॉलिटकल थॉट्स की लाइंस को अलहदा रखिये तो पाकिस्तान को लेकर हम वही और वैसा ही सोचते है जो वो चाहते है, वो हर वख्त हमारे दिमाग में जंग के उन्माद का कच्चा माल भरते रहते है और जिस उन्मादी नरेटिव को तैयार करने के लिए वो कच्चा माल काम आना है, उस नरेटिव के समर्थन में टीवी डिबेट्स, सेमिनारों, जलसों और अखबारों के कालमों में तर्कों का असला बारूद बिखरते रहते है! इस तरह के क्रिएटेड नरेटिव्स हमको कभी अपने विवेक से ये सोचने नहीं देते कि रउफ क्लासरा जैसे पाकिस्तान में बैठे लाखों समझदार लोग पाकिस्तान को मुल्ला मिलिट्री अलाएंस से निजात दिलाने के लिए अपनी जान पर खेल कर लगातार बोल रहे है, लिख रहे है! मजहबी और दहशत गर्द तंजीमों के खिलाफ लिखने वाले सैकड़ों सेकुलर ब्लागर वहां मारे जा चुके है, सैकड़ों लापता है और ऐसी लाखों आवाजें आज भी वहां चीखती रहती है जिनकी जान हमेशा सांसत में बनी रहती है। सीमांत गांधी की सेकुलर पार्टी नेशनल अवामी पार्टी जिसे मजहबी और दहशतगर्द तंजीमें पाकिस्तान का दुश्मन समझती है, पिछले कुछ सालों से वोट शेयर के मामले में पहले के मुकाबले काफी ऊपर उठी है। पाकिस्तान की ये सेकुलर आवाजें अमन चाहती है और सरकार द्वारा तालिबान, जैश-ए-मोहम्मद जैसी तंजीमों को पालने पोषने और टेरेरिस्ट कैम्प चलाने का न केवल तथ्य रखती है बल्कि इसके लिए पिछली सरकारों को आड़े हाथों भी लेती है!

ये देश सिर्फ आपका नहीं है, मेरा भी है! मैं मोदी का समर्थक होने से देशभक्त या मोदी का विरोधी होने से देशद्रोही नहीं हो जाता हूं! आपके राष्ट्रवाद और मेरे राष्ट्रवाद में फर्क होने से मेरा नाम गद्दारों की सूची में नहीं चढ़ जाता है।

1942 में गांधी जी ने “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का नारा दिया था! एक तरफ पूरी कांग्रेस आंदोलन कर रही थी दूसरी तरफ बाबा साहेब अम्बेडकर इस आंदोलन से अलग रहे, कम्युनिस्टों ने इसका विरोध किया यहां तक की आज के सबसे बड़े राष्र्रवादी संगठन आरएसएस भी इससे दूर ही रही मगर गांधी जी ने किसी को देशद्रोही नहीं कहा जबकि तब गांधी जी का कद इतना बड़ा थी कि उनके एक बयान से पूरा हिंदुस्तान इन पर थूकने लगता! जब अपनी सोच के हिसाब से आपसे अलग ख्याल रखने वाला मेरे जैसा कोई सामान्य नागरिक कहता है कि मैं जंग नहीं चाहता तो आप उसे देशद्रोही कह कर, संविधान की हत्या करते है, गांधी के राष्ट्रवाद का चरित्र हनन करते है, देश के सेकुलर फैब्रिक को नुकसान पहुचाते है!

देशभक्त होने से ज्यादा जरूरी देशप्रेमी होना है! देश की भक्ति मत कीजिये देश से प्रेम कीजिये! भक्ति आंखे बन्द करती है मगर प्रेम आगाह करता है, सही और गलत की पहचान करने की समझ देता है! देश सरहदों में सिमटी कोई बेजान जमीन नहीं है, देश के लोग देश है, जो मैं हूं, आप है, वो है। देश से न मैं अलग हूं, न आप और न वो! इस ख्याल से बचिए कि वो सिर्फ इसलिए गद्दार है क्योकि वो “वो” है! कोई दहशतगर्द या उसके समर्थक चाहे वो सीमा पार का हो या सरहद के भीतर का हो, देश का दुश्मन है, मेरा दुश्मन है आपका दुश्मन है मगर इस दुश्मनी में इस पार या उस पार के उन दोस्तों की बलि मत चढ़ाइये जो हमारी आपकी तरह पूरी ईमानदारी से शांति चाहते है और हमारी आपकी तरह अमन और तरक्की के लिए लड़ रहे है! वैसे भी हम वसुदैव कुटुम्बकम की संस्कृति वाले ही न है! चलिये हम सब मिल कर कहते है…..

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