Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

💋💋💋💋💋
        चुम्बन
💋💋💋💋💋

होठों के तरल में वे चुम्बन डूबते उतराते गये
जो वर्जनाओं की दीवार पर
प्रेम की परिभाषा लिखते रहे

लैला के नर्म नाज़ुक होठों पर
रक्त में सनी रेत है
जो संगसार किये जाते मजनूं के
होठों से उस तक पहुँची है

वारिनिया के सूखे होठों पर
उस रक्त की पपड़ी है
जो कोड़ों की मार सहते हुए
स्पार्टकस के होठों पर जम गया था

महिवाल के होठों पर चिपकी है
उस कच्चे घड़े की मिट्टी
जो सोहनी को
चनाब की लहरों में बहा ले गई थी

हीर के होठों पर लगा है
नफ़रत की चाशनी में पगे
उस मीठे लड्डू का ज़हर
जिसने राँझे को भी
मौत के आगोश में ले लिया था

सलीम के होठों पर
उस गारे के निशान मौजूद हैं
जिसकी मदद से जिंदा चुनवा दिया गया था
अनारकली को दीवारों में

आर्मेनिया की गलियों में अब भी गूँजती है
शीरीं की चीख
जो पहाड़ के बीच सड़क काटते हुए
मर जाने वाले
मेहनतकश फ़रहाद के होठों से
निकलकर आई थी

इन चुम्बनों में आवाज़ नहीं है
फिर भी किंवदंतियों की तरंगों में
इनकी गूँज सुनाई देती है
इतिहास की कंदराओं में

संसार के तमाम प्रेमी जोड़ों के होठ
इस वक़्त सिर्फ चुम्बनों में व्यस्त नहीं हैं

उनसे निकल रही हैं प्रेम की कहानियाँ
जो घृणा के प्रतिपक्ष में
प्रतिरोध का आख्यान रच रही हैं ।

***

शरद कोकास

■■■■■■■■■

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.