फोर्स के जवानों ने एक नही सुना और सुख्खी को जिंन्दा फोलिथीन में बाध दिया। शायद पोड़ियम सुख्खी को झिल्ली में बांधने से सुख्खी साँस नही ले पायी और जान चली गयी ःः. गोड़ेलगुड़ा, कोर्रापाड़ पंचायत, पोलमपल्ली में हुई हत्या की रिपोर्ट .

लिंगा राम कोडपी की रिपोर्ट घटना स्थल से लोटकर .

11.02.2019

हाल में दिनाँक 2/2/1019 दिन शनिवार को छत्तीसगंढ़ राज्य के सुकमा जिला, कोन्टा ब्लाक,गाँव गोड़ेलगुड़ा, कोर्रापाड़ पंचायत, पोलमपल्ली थाना, में हुए फर्जी मुठभेड़ की बात करे तो जाँच की आवश्यकता हैं हीं नहीं।

अपने आप को बचाने के लिए पुलिस प्रशासन लोंगों को न्याय के नाम पर जाँच करने का झाँसा दिया करता हैं। जाँच में होता कुछ नहीं हैं सिर्फ जाँच के नाम पर न्याय देने में देरी किया जाता हैं, और ठंड़े बस्ते में ड़ाल दिया जाता है। पुलिस व्यवस्था को पूरा पता हैं कि कौन सी पार्टी उस गाँव में गयी थी, फिर जाँच किस बात का?

उस गाँव के आस-पास चार गाँव में (C.R.P.F) केन्द्रीय रिजर्व बल मौजूद हैं। फुसवाड़ा ग्राम में C.R.P.F. की 74 वी बटालियन, कांकेर लंका C.R.P.F. 74 वी बटालियन, तेमेलवाड़ा में C.R.P.F. की 150 वी बटालियन, गोरघोन्ड़ा गाँव में C.R.P.F. की 223 वी बटालियन हैं।

गाँव की एक महीला के कहे अनूसार उस घटना दिनाँक 2/2/1019 शनिवार के दिन सुबह 7-8 बजे फोर्स में एक भी (S.P.O.) नहीं था तो बात साफ हैं कि C.R.P.F.फोर्स द्वारा पोड़ियम सुख्खी/ पति देवा कि फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या किया गया हैं। F.I.R. प्रथम सुचना रिफोर्ट C.R.P.F. के खिलाफ होना चाहिएं, लेकिन C.R.P.F. के खिलाफ पुलिस प्रशासन रिपोर्ट दर्ज करेगा नहीं। पोड़ियम सुख्खी के चार छोटे-छोटे बच्चे हैं 1) जोगा6 वर्ष, 2) लख्खा 4 वर्ष, 3) दूले 3 वर्ष, 4) राकेश 3 महीना, इंन बच्चों कि माँ सुख्खी बच्चों से बोलकर गयी होगी कि मैं कुछ लकड़िया जंगल से लेकर आती हूं फिर दूध पिलाती हूं। राकेश को अब माँ का दूध नहीं मिल पायेगा।

छत्तीसगंढ राज्य शासन और पुलिस व्यवस्था को इंन बच्चों से कोई लेना देना नहीं हैं। बस्तर के आदीवासी सोये हुएं हैं इन आदिवासीयों को नीद से कैसे जगाया जाएं। आदीवासी नीद से जागेगे तो नक्सल के नाम पर फर्जी हत्याएं बंद होगीं। बस्तर संभाग के आदीवासी या देश का बुध्दीजिवी वर्ग कुछ नहीं बोलेगा। विरोध नहीं होना चाहिए, मरने वाली आदीवासी महिला हैं किसी को क्या फर्क पड़ता हैं। देश के बुध्दीजीवि वर्ग कि बात छोड़िए, बंस्तर संभाग के आदीवासी राजनितीकार व नेता कुछ बोलना ही नहीं चाहते तो देश के बुध्दीजिवी वर्ग को कोसना या बोलना व्यर्थ हैं।

बस्तर के जंगलो में जब संयुक्त फोर्स नक्सल आफरेशन के नाम पर निकलती हैं तो शायद यह सोच कर निकलती है कि हम जंगल में शिकार के लिए जा रहे हैं। तबी तो जवान बंदूको के साथ-साथ एक फोलीथीन और रस्सी साथ में रखते हैं, शिकार के बाद आदिवासीयों के मृत शरीर को झिल्ली से लपेट कर रस्सी में बान्धां जाता हैं, और नक्सल के नाम पर मिड़ीयी व लोगों के सामने रखा जाता हैं। पुलिस व्यवस्था के बड़े अधिकारी नक्सल को मारने का दावा करते हैं, और लोगों से वाहवाही लेते हैं, सरकार भी शाबासी देने में पीछे नहीं हैं।

मैं,सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी व सुकमा जिला से सर्व आदिवासी समाज के कुछ गिने चुने आदीवासी युवा इस घटना कि जाँच करने के लिए गोड़ेलगुड़ा गाँव कि ओर जा रहे थे, तब हमारी चेकिंग हर जंगह हो रही थी। नाम पता और आईड़ी फ्रूफ मांगा जा रहा था। हत्या पुलिस ने नहीं बल्की हमने किया हैं, हमे लंग रहा था कि हम जाँच नहीं कोई अपराध करने के लिए गोड़ेलगुड़ा गाँव जा रहे हैं।

हंम व सुकमा के कुछ पंत्रकार गाँव पहुचे, हमसे पहले पूरे गाँव को पुलिस ने घेर रखा था। सुकमा पुलिस विभाग से S.D.O.P. अधिकारी स्वर्गीय सुख्खी के परिवार व घर के आस-पास पुलिस फोर्स लगा कर मड़रा रहे थे। गाँव तक रास्ते भर जगह-जगह फोर्स के जवान दिख रहे थे। हमे लग रहा था कि कोई नेता इस घटना कि जाँच करने के लिए आ रहा होगा। गाँव के लोगों से मिलने से पता लगा कि पुलिस सबूत खत्म करने व सुख्खी के मृत शरीर को जलवाने के लिए पुलिस लगा हैं। हंम भंगल के घर पर रूक गये हमें देखते हि गाँव के लोंग जमा हुएं। गाँव वालों में सुख्खी की संगीनी हुँगी हमसे मिली और पुरा घटना क्रम बताया। हुँगी हमें बताती हैं कि तीन महीलाएं लंकड़ी लेने के लिए जंगल की ओर जा रही थी। फोर्स सामने से आ रही थी पहली गोली जब फोर्स की ओर से चला तो तीनों महिलाओं ने अपने हाथों को ऊफर किया और बोले कि हम लंकड़ी वाले हैं। फोर्स ने एक नहीं सुनी फायरिग करते रहे। हुँगी के कहे अनूसार फोर्स द्वारा तीन गोलिया चलाई गयी।

तीन गोलियों में एक गोली स्वर्गी सुख्खी को लगी, दूसरी गोली कलमू देवे को लगी जो की अभी घायल हैं और इलाज चल रहा हैं। दो महिलाओं को गोली लगने पर हुँगी घायल महिला को घटना स्थल से गाँव लेकर गयी। गाँव में जाकर सुख्खी को फोर्स द्वारा गोली मारने कि बात अन्य महिलाओं को बताया। गाँव से दो महिलाए पोडियम हुर्रे व मड़कम भीमें गंजी से पानी लेकर पोड़ियम सुख्खी को पानी पीलाने कि कोशिश कर रहे थे। सुख्खी गोली लगने पर जिंन्दा थी। हुर्रे और भीमे हमे बताती हैं कि सुख्खी को जब फोर्स के जवान झिल्ली में बांध रहे थे तब सुख्खी हाथ उठा कर चिल्ला व बोल रही थी कि, “ माँ मुझे प्यास लगी हैं पानी पिलाओं ” ।

फोर्स के जवानों ने एक नही सुना और सुख्खी को जिंन्दा फोलिथीन में बाध दिया। शायद पोड़ियम सुख्खी को झिल्ली में बांधने से सुख्खी साँस नही ले पायी और जान चली गयी। गाँव की महिलाओं को फोर्स नें सुख्खी को पानी पिलाने दिया होता तो शायद पोड़ियम सुख्खी व राकेश की माँ जिंन्दा होती। फोर्स इतनी निर्दयी कैसे हो सकती हैं? क्या फोर्स इंनसान नहीं हैं? क्या फोर्स को प्रशिक्षण में इंनसानियत का पाठ पढ़ाया नही जाता होगा?

सुकमा जिला के पुलिस अधिक्षक जितेन्द्र शुक्ला यह दावा कर रहे है कि महिलाओं को गोलिया क्रास फायरिग व मुठभेड़ में लगा हैं। मैंने घटना स्थल का मुआयना किया उस स्थल पर कीसी भी पेड़ में एक भी गोलियों के निशान नहीं हैं और न ही कारतूस के खोखे मिले हैं। गाँव के लोगों से भी पुछताछ किया तो ग्रांमीणों ने बताया कि कोई मुठभेड़ नही हुआँ हैं।

इस घटना कि तहकीकात स्वयं स्थानीय कांग्रेसी नेता कवासी लखमा को करना चाहिए ? नेताजी तो विधान सभा चुनाव जीतने व मंत्री बनने कि खुशी मनाने में व्यस्थ हैं। अपने आदीवासी भाईयों व बहनों के साथ नक्सल के नाम पर अन्याय में न्याय दिलाने के लिए सरकार से बात-चीत कब करेगे?

पुलिस ही आदीवासीयों की हत्या करे और जाँच भी पुलिस करे तो न्याय कब मिलेगा? आज तक घटना हुएं आठ दिन हो गये हैं। सुकमा पुलिस प्रशासन इस घटना पर आज तक जाँच हि कर रहा हैं। पुलिस प्रशासन को बोलने वाला कोई नही, धीरे से सुकमा पुलिस घटना के जाँच को ठंड़े बस्ता में ड़ाल देगी।

इस बार इस घटने में पुलिस प्रशासन द्वारा अपराधीयों को गिरफ्तार व जेल नही भेजा गया तो बस्तर संभाग के तीन जिला दंन्तेवाडा, सुकमा, बिजापूर के संमस्त आदिवासी महा रैली करने के लिए दंन्तेवाड़ा जिला में अपनी बात रखने को आयेगें। यह एक ही घटना नही है इस घटना के अलावा अन्य कई घटनाएं हैं जिनके विरोध को लेकर आदिवासी एक जगह पर इक्कट्टा होगें। मुख्य रूप से जिला सुकमा से मड़कम हिड़में कि घटना, बुरकापाल कि घटना, दंन्तेवाड़ा से ग्रांम समेली पाण्ड़ू पारा कि घटना, बिजापूर से चिन्नागेल्लूर पेद्दागेल्लूर कि घटना, और कोरसेगुड़ा की इन सभी व अन्य घटनाओं को लेकर आदिवासी संस्क्तीकरण महा रैली होगी। रैली के माध्यम से आदीवासी सरकार को चेताने की कोशिश करेगे। यह रैली बस्तर संभाग में आदीवासी स्वाभिमान को लेकर होगी देश के तमाम बुद्धिजीवि वर्ग इस आदिवासी स्वाभिमान रैली में भाग ले सकते हैं। बंस्तर संभाग के कुछ आदीवासी इलाकों में क्रान्ती की ज्वाला भड़क रही हैं, इस क्रान्ती की आग को सही दिशा की ओर लेकर जाना देश के बुद्धीजीवी वर्ग कि जिम्मेदारी होगी।

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रैली में करीब एक से ढ़ेड़ लाख आदिवासीयों के आने की संभावना हैं।

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