समाजवाद_के_भूत_से_डरती_ट्रम्प मण्डलीःः.बादल सरोज .

11.02.2019

तभी तो लुटेरों को आतंकित कर रहा है कम्युनिज्म का भूत.

फरवरी के महीने में ही 28-29 साल के दो युवाओं ने कहा था कि “यूरोप को एक भूत आतंकित कर रहा है ; कम्युनिज्म का भूत । इस भूत को भगाने के लिये पोप और जार, मेटरनिख और गीजो, फ्रांसीसी उग्रवादी और जर्मन पुलिस के भेदिये – बूढ़े यूरोप के सारे सत्ताधारी एक हो गये हैं ।” युवा कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स की 1848 में #कम्युनिस्ट_मैनिफेस्टो में लिखी गयी इस आरम्भिक उक्ति को 5 फरवरी 2019 को दुनिया के दो कोनो – लन्दन और वाशिंगटन – में उसके चरितार्थ की निरंतरता में पूरी दुनिया ने देखा ।

साम्यवाद के भूत से आतंकित, मार्क्स से डरा हुआ गिरोह चोरों की तरह 5 फरवरी 2019 को लन्दन के हाईगेट कब्रिस्तान में जा घुसा और मार्क्स और जेनी मार्क्स की कब्र को क्षति पहुंचाने की कोशिश की । हाईगेट सीमेट्री के रखरखाव से जुड़े अधिकारी के अनुसार यह “किसी सनकी का काम नहीं है । यह एक राजनीतिक कार्यवाही है – अस्वीकार्य राजनीतिक कार्यवाही – क्योंकि हमलावर ने हथौड़े से कब्र पर लगी पट्टिका में से कार्ल मार्क्स के नाम को खोदकर मिटाने की कोशिश की है । ”

● 1883 में कब्र में सो गए मार्क्स के नाम को खोदने और मिटाने के लिए दक्षिणपंथी गिरोह आज भी पूरे उन्माद से लगे हैं ; वे किस कदर असफल रहे हैं, वे हमेशा ही असफल रहने वाले हैं इस बात का सबूत दूर अमरीकी महाद्वीप में मार्क्स के समाजवाद के भूत से थरथर कांपती दुनिया की “महाशक्ति” संयुक्त राज्य अमरीका की संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इसी दिन दिए भाषण में मिल रहा था ।

● वेनेज़ुएला में तख्तापलट करने की अपनी अहंकारी इच्छा को दोहराते हुए ट्रम्प बोले कि यह देश समाजवाद के रास्ते पर चल रहा है इसलिए अमरीका और दुनिया भर के लिए खतरा है । अगले ही वाक्य में बिल्ली थैले से बाहर आन टपकी और ट्रम्प महाशय को समाजवाद का यह खतरा अमरीका में भी पाँव जमाता नजर आ गया ।

● वे बोले कि “चिंता की बात है कि हमारे देश में भी समाजवाद को अपनाने की बातें की जा रही हैं …… आज की रात हम संकल्प लेते हैं कि हम अपने देश को समाजवादी देश कभी नहीं बनने देंगे ।” मार्क्स ने – अगर ऐसा होता होगा तो – ट्रम्प की इस घबराहट को देखकर जरूर अपनी कब्र में एक दिलकश ठहाका लगाया होगा ।

● यह घबराहट अकेले ट्रम्प की नहीं है । व्हाइट हाउस के आर्थिक परामर्शदाताओं की परिषद ( White house council of economic advisers) की इसी दिन जारी एक रिपोर्ट “समाजवाद की महंगी कीमत चुकानी होगीं” में यह घबराहट समूचे विस्तार से पसरी हुयी है । इन भाड़े के कलमघिस्सुओं ने अमरीका में समाजवाद की बात करने वालों को डरावना साबित करने वाली अपनी 72 पेज की “अलार्मिंग रिपोर्ट” में 144 बार समाजवाद शब्द का इस्तेमाल किया है ।

● उसके खतरे गिनाते गिनाते वे कहते हैं कि “यदि अमरीका ने मुफ़्त शिक्षा, मुफ़्त स्वास्थ्य आदि आदि वेनेज़ुएला जैसी समाजवादी नीतियां अपना ली तो अमरीकी अर्थव्यवस्था 40% सिकुड़ जायेगी ।” मुफ़्त शिक्षा जैसी नीति को यह रिपोर्ट “लेनिन और माओ जैसी नीति” करार देती है ।

● हालांकि खुद ट्रम्प अपने स्टेट ऑफ़ यूनियन भाषण में अमरीका में घटते रोजगार अवसरों और बढ़ती बेरोजगारी का जिक्र करने को मजबूर होते है । उनका निशाना अमरीका में लगातार लोकप्रियता की अगली पायदानों पर चढ़ते बर्नी सैंडर्स हैं । पिछले चुनाव में उन्होंने आख़री चरण में हिलेरी क्लिंटन के पक्ष में अपनी दावेदारी छोड़ दी थी । इस बार 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में उनके डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने की प्रबल सम्भावनाये । बर्नी सैंडर्स स्वयं को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट कहते हैं ।

● ट्रम्प और वे जिस जंगखोर नस्लवादी कारपोरेट का प्रतिनिधित्व करते हैं उसका ब्लड प्रेशर न्यूयॉर्क से अमरीकी संसद (कांग्रेस) की सबसे युवा सदस्या ओकेसिओ-कॉर्टेज (Ocasio-Cortez) ने भी बढ़ाया हुआ है । वे वैश्विक पूँजी की खलमण्डली के समागम में दावोस भी पहुँच गयी थीं । वहां भी बोली और अमरीका में भी बर्नी सैंडर्स और डेमोक्रेटिक पार्टी के अपने जैसों के साथ बोल रही हैं कि एक निश्चित आमदनी के बाद टैक्स की दर 75% होनी चाहिये, मुफ़्त स्वास्थ्य – मेडिकेयर – सबके लिए होना चाहिये । रोजगार को लेकर भी इन सबकी मांगे कारपोरेट पूँजी के मुनाफों की वाट लगाने वाली हैं ।

● ट्रम्प का समाजवाद प्रलाप जिस आभासीय बुनियाद पर टिका है, वह अब लुप्त प्रायः हो चुकी है । द्वितीय विश्वयुध्द के बाद “साम्यवाद के मंडराते भूत” से निबटने के लिए अमरीका ने अरबों डॉलर – जी हाँ अरबों डॉलर – प्रतिवर्ष खर्च करके दुनिया भर में कुत्सित प्रोपेगंडा युध्द छेड़ा था । इसी प्रोपेगंडा के हिसाब से हॉलीवुड की फिल्में बनी (याद कीजिये जेम्स बांड) उपन्यास लिखवाये गए, गप्पें गढ़ने की फैक्ट्रीज खोली गयीं, मैकार्थीवाद के जरिये अमरीकी साहित्य-संस्कृति-प्रशासन-समाज से प्रगतिशील लोग भगाये गये । (यही समय था जब चार्ली चैपलिन को अमरीका छोड़ना पड़ा था)

● भारत सहित सारे गैर समाजवादी देशों में फोर्ड फाउंडेशन जैसे कुटिल संस्थान खड़े किये गए । यह पूरे शीत-युध्द काल में चला, आज भी जारी है । ट्रम्प को लग रहा है कि इस तरह पनपाया गया “समाजवाद का भय” अब भी काम आ जायेगा । वे भूल गये कि विचार ख़ास किस्म के आर्थिक सामाजिक संकट की उपज भी होते हैं, समाधान भी । पूँजीवाद अपने जर्जर युग में ज्यादा आदमखोर हो जाता है तो जनता सहज ही समाजवाद की ओर उन्मुख हो जाती है ।

यह कहानी सिर्फ अमरीका की नहीं है ।

● वाशिंगटन में सैंडर्स और कॉर्टेज हैं तो लन्दन में ब्रैक्सिट के जंजाल में फंसी कंजरवेटिव पार्टी की प्रधानमन्त्री थेरेसा मे की नींद उड़ाने वाले जेरेमी कोर्बिन हैं जो अपने आपको “सोशलिस्ट लेबर” कहते हैं और अपने भाषणों से पूरे ब्रिटेन को जगाये हुए हैं ।

● 1848 में दो युवाओं ने कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो में पूँजीवाद के जिस विनाशकारी चरित्र को बयान किया था, वह अब महामारी बनकर सामने आ गया है । श्रम, मनुष्यता, प्रकृति और पृथ्वी सब खतरे में है । अब जब बीमारी वही है तो उपचार और दवा भी वही लगेगी जो मार्क्स और एंगेल्स बता कर गए हैं ।

★ तभी तो लुटेरों को आतंकित कर रहा है कम्युनिज्म का भूत !!

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बादल सरोज ,माकपा मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेता 

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