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9.02.2019

एक ओर घाटी में नर्मदा जयंती मनाने की तैयारी  जोरशोर से चल रही है, जबकि दूसरी ओर माँ नर्मदा की हालत दिन-ब-दिन ख़राब होती जा रही है |

बड़े बड़े बांधो से नर्मदा को रोकने के बाद अब पानी की पीने लायकता कम होते होते, एकेक जगह लोगों के सवाल खड़े किये जा रहे हैं | सबसे अधिक संकट गुजरात के नर्मदा वासी तथा सरदार सरोवर की नहरों के किनारे रहने वालों पर मंडरा रहा हैं |

पीने के लिए पानी लेने से रोक दिया गया हैं, गुजरात सरकार ने | यह बात तब हुई जबकि जलाशय से निकलकर कैनाल में जा रही मछलियाँ कई टन तक मृत होकर किनारे पर ढेर इकठ्ठा हुआ| मछलियों के साथ पानी भी जहरीला और पानी के लिए अयोग्य है, यह पता चला है, जल प्रदूषण ही नहीं जल जहरीला बनने से|

इस पर गुजरात और केंद्र सरकार अलग अलग कारण बताते हुए सबको भ्रमित कर रही है | पहले खबर आयी कि सरदार सरोवर के टर्बाइन्स से निकले पानी में कुछ रासायनिक दृव्य पाए गए, फिर खबर फैली कि डैमसाईट के कर्मचारियों का कहना है, सी-प्लेन जलाशय में चलाने के इरादे से मगर मच्छों को हटाने (या मारने) के लिए कुछ दृव्य पानी में डाले जिससे मछली तो लाखों की तादाद में मर गयी | करीबन 500 मगरमच्छों में से 15 मगर मच्छों को वन विभाग से हटाकर जलाशय में डाले गए हैं और अधिक डाले जाने वाले हैं | मादी मगरमच्छ पहले मर जाएगी और और 40 % तक उतार से एवं जमीन पर सांस लेना असंभव होने से गर्भधारणा रूकती है | यह सब हो रहा है सरदार पटेल और पर्यटन के नाम पर| पर्यावरणीय दृष्टि से यह जलसंपत्ति का विनाश लाएगी | नर्मदा का वाहन माना गया मगरमच्छ का अपना स्थान और योगदान है |

अब शासकीय खबर यह है कि नर्मदा में सरदार सरोवर के ही नीचे भूकंप की हलचल होकर, धरती से टाक्सिक गैसेस निकली है जिससे यह पानी का प्रदूषण हो रहा है| जहरीलापन आया है| राजपीपला के गुजरात जल बोर्ड के अधिकारी श्री झा ने कहा पानी शुद्ध करे बिना पीना संभव नहीं है| केमिकल्स नहीं है लेकिन पीने लायकता खत्म हो चुकी है | यह मुख्य नहर एवं वाडिया शाखा नहर से लिए सेम्पल में सल्फाइड की मात्र बढ़ने से पाया गया है | एक अंदाजा है कि मछली मरने से तथा किसी कंपनी से पानी छोड़ा जाने से तथा शौचालय वगेरह का गन्दा पानी बड़ी मात्रा में छोड़ा जाने से यह हुआ हैं | मछली के मरने का दूसरा कारण बताया जा रहा है, पानी में आक्सीजन की मात्रा का कम होना | पानी में आक्सीजन की मात्रा 4.2 mg/l तक हो गयी हैं | गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा है कि पानी पीने योग्य नहीं हैं एवं उन्होंने इसकी जांच शुरू कर दी हैं | गुजरात के मुख्य सचिव, जे.एन.सिंह का कहना है कि पानी में गन्दगी के चलते नर्मदा और छोटा उदयपुर जिले के 138 गाँवों में इसी महिने फरवरी से, नर्मदा के पानी पीने पर पूरी रोक लगा दी है | एक तरफ इन गांवों में पानी की रोक लगा दी गयी है जबकि यही पानी गुजरात के बड़े शहरों – बड़ोदा, अहमदाबाद, गांधीनगर को आज तक पहुँचाया जा रहा हैं |

इन सब कारणों से स्पष्ट हैं कि पूरी जल -जांच के बिना सरदार सरोवर उस उद्देश्य के लिए निरुपयोगी हुआ हैं |

म.प्र. की पिछली सरकार कई बड़ी नर्मदा लिंक परियोजनाएं लेकर आई थी जिससे वो नर्मदा का पानी मालवा तक ले जाने की बात करते थे | पर पिछले वर्ष जहाँ नर्मदा में पानी ही नहीं था, ऐसी स्थिति में अगर इन बड़ी लिंक योजनाओं पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो नर्मदा में सिर्फ प्रदूषण ही नहीं बढेगा बल्कि नर्मदा का खत्म होना भी तय है |

सबसे खतरनाक बात है भूगर्भशास्त्रीय संकट की | आज तक मध्य प्रदेश में नयी शोध-जांच केन्द्रों में से 7 है, जो मृतवत है| इन केन्द्रों में कोई कर्मचारी अपने बरतन, बकरियों के साथ रहते है| एक मशीन लगी है, जिससे जानकारी पिछले कुछ सालों से सीधी गांधीनगर भेजी जाती है तो 3 रिक्टर स्केल के अधिक मात्रा की भू हलचल की खबर तक लोगों को नहीं है | क्या नयी सरकार अपनी जांच का खुद अवलोकन करेगी ?

 

कैलास अवास्या मुकेश भगोरिया कमला यादव राहुल यादव मेधा पाटकर

संपर्क – सौरव – 8287509616

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