91 वर्ष की उम्र तक मजदूरों, मेहनतकशों के हक में खड़ी रहने वाली जीवट पेरिन दाजी आज हमारे बीच नहीं रहीं. ःः कॉमरेड_पेरीन_दाजी_को_दी_गई_अश्रुपूरित_विदाई..

6.02.2019

पेरिन दाजी का जन्म 25 नवम्बर 1939 में एक सम्पन्न पारसी परिवार में हुआ था। सुविधाजनक जीवन को छोड़कर कॉमरेड होमी दाजी के साथ प्रेम और शादी कर इस संघर्ष में खुद ही शामिल हो गईं। 18 बरस की आयु में कॉमरेड होमी दाजी से शादी के बाद पेरिन दाजी हर संघर्ष में साथ रहीं।

उन्होंने घर की सारी जिम्मेदारी सम्भाल होमी दाजी को देश के मेहनतकशों के हक में लड़ने को मुक्त कर दिया था और घर की जिम्मेदारी के साथ देश की राजनीतिक गतिविधियों से सरोकार रख गलत नीतियों के खिलाफ भी हमेशा खड़ी रहती थीं। कॉमरेड पेरिन दाजी केवल कॉमरेड होमी दाजी की पत्नी ही नहीं थीं वे कामरेड थीं।

इंदौर में भारतीय महिला फेडरेशन की स्थापना करने वाली साथियों में पेरिन दाजी की मुख्य भूमिका रही। वे इंदौर भारतीय महिला फेडरेशन की सचिव भी रहीं।
होमी दाजी की मृत्यु के बाद पेरिन दाजी ने हिम्मत नहीं हारी और बिना समय गंवाए मेहनतकशों के हक में लड़ने आ गईं।

शहरी आवागमन में चलने वाली बस के कन्डेक्टर, ड्राइवर के अधिकारों के लिए सामने से आती बस के सामने हाथ फैलाकर खड़ी होने वाली पेरिन दाजी गीता भवन अस्पताल के तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की लड़ाई, ऑटो चालकों की लड़ाई, संविदा शिक्षकों के संघर्ष, आशा कार्यकर्ता-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हक की लड़ाई, जूनियर डॉक्टर्स की मांगों में, नगरनिगम के तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के हक, नर्मदा आंदोलन के संघर्ष की साझी रहीं।

हुकुमचंद मिल में लोगों की झिड़कियाँ के बाद भी हर बैठक में बिला नागा पहुँचने वाली और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को ये बोलने वाली की जब तक हुकुमचंद मिल के मज़दूरों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा मैं हरगिज नहीं मरने वाली। और जब हुकुमचंद मिल में काम करने वालों को मुख्यमंत्री द्वारा नजरअंदाज किया तो भरी भीड़ में अकेली घुसकर काला झंडा दिखाने का काम पेरिन दाजी ही कर सकती थीं।

इसके अलावा जाने कितनी महिलाओं, युवाओं को नोकरी पर लगवाने के अलावा हार्ट का वाल्व बदलवाने के लिए पैसा इकट्ठा करवाना, तो किसी महिला को ब्यूटी पार्लर के लिए स्पेशल कुर्सी की व्यवस्था करवाना हो, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई के बन्दोबस्त की सारी जिम्मेदारी में पेरिन दाजी लगी ही रहती थीं।

सारिका श्रीवास्तव
राज्य सचिव
मध्य प्रदेश भारतीय महिला फेडरेशन

 

#कॉमरेड_पेरीन_दाजी_को_दी_गई_अश्रुपूरित_विदाई

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की वयोवृद्ध पर जोशीली नेञी का पेरीन दाजी ने 91बर्ष तक
सतत करने वाली आज इन्दौर में नही रही ।
वह देश के मशहूर मजदूर नेता का होमी दाजी
की जीवन संगनी थी ।उनका जन्म भले अमीर
परिवार में हुआ पर जीवन हमेशा संघर्षों में बीता ।आर्थिक ,सामाजिक ,पारिवारिक ,राजनीतिक सभी तरह के कष्टों व मुसीबतों को झेला है
अपेक्षित उम तक शहर के प़तिष्ठत स्कूल सेन्ट रेफिल स्कूल में शिक्षिका रह कर घर गृहस्थी सम्हाली ।परिवार का सारा आर्थिंक बोझ उठाया फिर पार्टी में मोर्चा सम्हाला ,शहर मे होने वाले तमाम संघर्षों में अपनी हिस्सेदारी ,जिम्मेदारी व नेतृत्व कारी भूमिका निभाई ।
आज 12 बजे उनका शव चिमनबाग स्थित घर
पर जहां आासपास व शहर के लोगो ने अपने
श्रध्दा सुमन अर्पित किये ।इसके बाद शव वाहन से शहीद भवन ,न्यु देवास रोड लाया गया जहां पार्टी ध्वज झुकाया गया और शामिना लगाकर तख्त पर रखा गया जहां विभिन्न सामाजिक ,सांस्कृतिक ,राजनीतिक
दलो के लोगो ने अपनी श्रध्दाजलि अर्पित की।
वहां जनगीत गाये गये,नारे लगाकर उन्हे याद
किया गया ।
इसके बाद शव को लाल कपडे व बेनर,फ्लेक्स ,प्ले कार्ड से सजी खुली गाडी में उनके शव को रखकर नारे लगाते जनगीत गाते पुरूष,महिलाओं ,नौजवानों की जोशीले नारे लगाते शव याञा मालवा मिल मुक्ति धाम पर पहुंची । जहां दाहसंस्कार के बाद सभा हुई जिसे आनन्द मोहन माथुर,कल्याण जैन,अनिल ञिवेदी, आलोक खरे, सत्यम पाण्डेय, मोहन निमजे , राजेश,शर्मा, सारिका श्रीवास्तव,सरोज कुमार ,विनीत तिवारी आदि ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व , जीवटता, सक़ियता व गरीब मजदूरों के हक अधिकारो के प़ति समर्पण व सोच को याद करते हुये सभी ने अपनी ओर व संस्थाओ की ओर से श्रध्दाजली व संवेदना व्यक्त की।

एस के दुबे
जिला सचिव मण्डल सदस्य,(सीपीआई)

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