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रितेश वर्मा / पत्रिका .काम

अंबिकापुर . हाथियों का जहाँ रहवास होता हैं वह क्षैत्र काफी सम्रद्ध माना जाता हैं .लेकिन कोयला खनन को अनुमति देने के लिये वन विभाग ने सभी नियमों को ताक पर रखते हुये उदयपुर वन परिक्षेत्र में हाथियों की उपस्थिति से ही इंकार कर दिया हैं .इसी आधार पर पर्यावरण मंत्रालय द्वारा वन भूमि से कोयला खनन की अनुमति दे दी हैं .अब न ही इस क्षेत्र में जंगल बचे हैं और न ही हरियाली ही दिखाई दे रही हैं. चारों तरफ सिर्फ़ कोयले का डस्ट और पेड़ों के ठूंठ दिख रहे हैं .

उदयपुर वन परिक्षेत्र के चारों तरफ सिर्फ घने जंगल ही नजर आते थे लेकिन अब सिर्फ़ कटे पेड़ों के ठूंठ ही ठूंठ दिख रहे हैं. राजस्व रिकॉर्ड में उदयपुर वन परिक्षेत्र की जो भौगोलिक परिस्थिति दिखाई गई वहाँ छोटे और बड़े झाड का जंगल दिखाया गया हैं.लेकिन कोयला खनन के लिये इसे अनदेखा करते हुये वन विभाग ने जो रिपोर्ट पेश की है उसके आधार पर राजस्थान विधुत निगम को कोल उत्खनन की अनुमति पर्यावरण व वन मंत्रालय द्वारा दी गई हैं .उदयपुर वन परिक्षेत्र में कोल उत्खनन के लिये वन विभाग ने हाथियों की उपस्थिति से ही इंकार कर दिया हैं .हांलाकि बाद में वनमंडलाधिकारी ने सिर्फ उदयपुर वनपरिक्षेत्र में भटके हुये कुछ हाथियों को गुजरते हुये देखा जाना बताया हैं .इससे पूरे वन विभाग की स्थिति संदेहास्पद हो जाती हैं .

हाथियों की रहती हैं हमेशा उपस्थित .

वर्ष 2007 व उसके पहले से उदयपुर के परसा केते माईंस के आपपास हमेशा हाथियों की सक्रियता बनी रहती हैं .कई हाथियों के दल उदयपुर वन परिक्षेत्र और कोल माईंस के आसपास गुजरते हुये देखा गया हैं .

पेड़ो की कटाई के कारण हाथी पहुंच रहे हैं बस्ती मे.

कोल उत्खनन के लिये जिस तेजी से जंगल कटाई की जा रही हैं उसकी वज़ह से हाथियों के विचरण का क्षेत्र काफी संकुचित हो गया हैं, जिसके कारण हाथी बस्ती में जाकर जानमाल का नुकसान कर रहे है. उत्खनन के लिये जारी अनुमति के अनुसार काटे गये पेड़ों से अधिक पोधारोपण कंपनी द्वारा किया जाना है.

तीन वर्षों में हाथी के हमले से हुई हैं पांच मौत 


हाथी के हमलों में परसा केते माईंस के आसपास के क्षेत्र में हाथियों की सक्रियता के कारण पांच लोगों की मौत हो चुकी हैं .एक सप्ताह पूर्व दंतैल हाथी के हमले में दो लोगों की मोत हुई .इसके पहले भी उदयपुर के खरसुरा क्षेत्र में हाथी के हमले से दो लोग मारे गये .खरसुरा माईंस से लगा क्षेत्र हैं.2017 में भी एक मौत हुई हैं .लगातार हाथी के हमले से इसके पहले भी हमले में मौत होती रहीं हैं .जब कि हाथी और इंसान के द्वंद को रोकने के लिये वन विभाग कई योजना इस क्षैत्र के लिये बना चुका हैं.

सुप्रीम कोर्ट में जल्द ही दायर होगी पीआईएल .

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