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14.01.2019

रायपुर. छत्तीसगढ़ में अब से दो महीने पहले तक चपरासी से लेकर अफसर का सिंह होना अनिवार्य था. कह सकते हैं कि सिंह लॉबी काफी हावी थीं. इस लॉबी में आबकारी महकमे में संविदा में लगभग नौ साल से तैनात विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी समुंद्र सिंह का नाम भी शामिल था. लेकिन जैसी ही सरकार बदली समुंद्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया और अब किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं. इधर  आबकारी महकमा समुंद्र सिंह की तलाश कर रहा है. वजह यह है कि समुंद्र सिंह को नौकरी से इस्तीफा से देने से पहले नोटिस देना था कि वे अब नौकरी नहीं कर सकते. उन्हें एक महीने की तनख्वाह भी जमा करनी थीं. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और अचानक-भयानक ढंग से गायब हो गए.

नियमानुसार अब आबकारी महकमा उनके विधायक कालोनी स्थित 36 नंबर के मकान पर नोटिस चस्पा करने के लिए चक्कर काट रहा है. आबकारी विभाग के आयुक्त कमलप्रीत ने बताया कि समुंद्र सिंह के नाम पर नोटिस जारी किया गया है, लेकिन वे मिल नहीं रहे हैं. यहां तक उनका फोन नंबर भी बंद है.

छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती सरकार ने शराब ठेके की नीलामी को बंद कर सरकारी दुकान को खोलने का जो निर्णय लिया था उसके पीछे समुंद्र सिंह की ही भूमिका मानी जाती है. आबकारी विभाग की सूत्रों की मानें तो शराब दुकानों के सरकारीकरण के बाद समुंद्र सिंह का ओहदा काफी बढ़ गया था. उन पर यह आरोप भी लगता रहा है कि वे एक शराब माफिया के बेहद करीबी थे और उस माफिया के इशारे पर यह तय करते थे कि किस शराब दुकान में कौन सी ब्रांड बेची जाएंगी. पूर्व आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल करीबी समझे जाने वाले समुंद्र सिंह पर यह भी आरोप भी लगा कि संविदा में रहने के दौरान उन्होंने कई ऐसे लोगों को लाभ पहुंचाया जो न तो शराब के क्रेता थे और न ही विक्रेता. जब ठेका पद्धति लागू थीं तब रामलाल-श्यामलाल सहित अन्य कई लोग शराब दुकान का ठेका पाने में सफल हो गए थे. इधर जनता कांग्रेस के प्रवक्ता नितिन भंसाली का कहना है कि समुंद्र सिंह भले ही कहीं जाकर छिप गए हों, लेकिन उन्हें खोजकर पूछताछ जरूरी है. भंसाली का आरोप है कि समुंद्र सिंह ने संविदा में पदस्थ रहने के दौरान कम से कम पांच हजार करोड़ का घोटाला किया है. भंसाली ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से समुंद्र सिंह के प्रत्येक कारनामों के जांच की मांग भी की है.

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