13.01.2019

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को पुनर्बहाल किये जाने के 48 घंटे के भीतर ही खुद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व लिए गए फैसले से “ट्रांसफर” कर दिया गया है।

#सीपीएम_पोलिट ब्यूरो ने इसकी भर्त्सना करते हुए इसे सीबीआई को अपने चंगुल में लेकर अपनी राजनीतिक और चुनावी तिकड़मों
के औजार में बदलने की कोशिश बताया है ।
★ सीपीएम के मुताबिक़ भाजपा सरकार के आलोचकों और विरोधियों को खामोश करने के लिए उन्हें परेशान और ब्लैकमेल करना चाहती है और अपने वफादारों को बचाना चाहती है । अपनी इस हरकत के जरिये मोदी सरकार रोज ब रोज सामने आ रहे घोटालों के उजागर होने से भी बचना चाहती है ।
★ 23 अक्टूबर 2018 की आधी रात किये तख्तापलट और उसके लिए आधार बनाये गयी अपुष्ट और संदेहास्पद सीवीसी रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने अवैधानिक माना और उसके कारण हटाये गए आलोक वर्मा की बहाली के आदेश दिये । दुसरे तख्ता पलट में उनका तबादला दूसरी जगह कर दिया जबकि उनके रिटायरमेंट में कुछ ही दिन बाकी थे ।
★ सख्त विरोध दर्ज कराये जाने और सीवीसी रिपोर्ट पर आलोक वर्मा को अपना पक्ष रखने का मौक़ा दिए बिना प्रधानमन्त्री मोदी की यह कार्यवाही अपने भ्रष्टाचार, अपने दरबारी पूंजीपतियों के उन कारनामों को छुपाने की कोशिश है जिनके चलते राष्ट्रीय सुरक्षा तक खतरे में पड़ी है । जिनमे सरकार की लिप्तता उच्चतम स्तर तक है ।
★ जाहिर है, मोदी सरकार बहुत कुछ छुपाना चाहती है । आम चुनाव के कुछ ही सप्ताह बचे हैं और मोदी सरकार घबराई हुयी है कि कहीं राफेल सौदे सहित उसके तमाम घोटाले उजागर न हो जाएँ ।
★ सीबीआई की स्वायत्तता का पूरी तरह भट्टा बिठा दिया गया है । चाहें रिज़र्व बैंक हो या न्यायपालिका हो या सूचना आयोग या भारतीय लोकतन्त्र के बाकी स्तम्भ ; यह सरकार पूरी बदहवासी के साथ सारी संवैधानिक संस्थाओं को ध्वस्त करने में लगी है ।
★ भारत के लोग भाजपा/एनडीए के सारे वाग्जालों और कामों की असलियत जान चुके हैं और आगामी चुनावों में वे इसका जोरदार जबाब देंगे ।

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