भारतीय वन सेवा के अफसर श्री निवास राव एक बार फिर आरोपों से घिर गए हैं. : रमन सिंह के खास अफसर रहे हैं.

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अपना मोर्चा के लिये 

13.01.2019 , रायपुर 

रायपुर.पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के बेहद करीबी और खास माने जाने वाले भारतीय वन सेवा के अफसर श्री निवास राव एक बार फिर आरोपों से घिर गए हैं. उन पर राष्ट्रीय वन खेलों के लिए ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली ट्रेक सूट, टीशर्ट, जूते तथा अन्य खेल सामाग्री खरीदने का आरोप लगा है. सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने शनिवार को एक आडियो जारी किया है जिसमें एक शख्स उन्हें यह जानकारी दे रहा है कि वन अफसर राव ने एडिडास जैसी नामी के नाम पर नकली ट्रेक सूट खरीद लिया है. बातचीत से यह भी पता चलता है कि खेल के आयोजन के लिए साढ़े तीन सौ इनोवा और साढ़े चार सौ बसें चलाई गई और बगैर टेंडर के ढ़ाई सौ अफसरों के लिए बैलेजर बनवा लिया गया. आडियो में यह जानकारी भी है कि प्रत्येक खिलाड़ी की भोजन की थाली का रेट 12 सौ रुपए निर्धारित किया गया है और इसका ठेका भी अफसर ने अपने किसी खास को दे दिया है.

कुणाल शुक्ला का कहना है कि 13 दिसम्बर को भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ली थीं और न ही मंत्रिमंडल का गठन हुआ था, लेकिन रमन के कार्यकाल में अवैध तौर-तरीकों से पैसा कमाने वाले अफसर ने इसी तिथि को एक कंपनी को खेल सामानों की सप्लाई का ठेका दे दिया. निविदा में अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए नाइक, रिबॉक, लोट्टो जैसी कंपनियों से रेट भी आमंत्रित करने थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. गौरतलब है कि श्री निवास राव जहां कही भी पदस्थ रहे हैं वहां विवादित रहे हैं. जब वे दुर्ग में पदस्थ थे तब सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल करीम ने उन पर नियम-प्रावधानों से हटकर अनावश्यक बजट खर्च करने का आरोप लगाया था. उनके बारे में यह भी कहा गया था कि वे भ्रष्टाचार में लिप्त रेजरों को मनमाफिक पदस्थापना देते रहे हैं. उनकी बस्तर की पदस्थापना भी कई कारणों से सुर्खियों में रही है. कहा जाता है कि ठीक चुनाव के पहले वन मंत्री महेश गागड़ा उन्हें बस्तर ले गए थे ताकि वे तेंदूपत्ता के सरहदी बिचौलियों को लाभ दिलाकर चुनाव के लिए फंड़ की व्यवस्था कर सकें. उन पर सामाजिक वानिकी जगदलपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा व बस्तर वन मंडल में अरबों के कागजी कार्य कराए जाने का आरोप भी लगता रहा है. एक बड़ा आरोप कोंडागांव के विधायक मोहन मरकाम ने भी लगाया था. राव के कार्यकाल में ही वन विभाग ने क्लोनल नीलगिरी की पौधों की खरीदी थीं. सामान्य तौर पर नीलगिरी का एक पौधा आठ रुपए में मिल जाता है, लेकिन विभाग ने उसे 732 रुपए में खरीदा था. पौधों को बेचने का काम नागपुर की फर्म सापरा इंटरनेशनल वेयर हाउस एंड लाजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड ने किया था

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