छत्तीसगढ़ विधानसभा: बदले बदले सरकार नज़र आये आज सदन में .सबकुछ उल्टा पुल्टा .

राजकुमार सोनी, अपना मोर्चा के लिये
रायपुर. सोमवार को छत्तीसगढ़ की विधानसभा का नजारा थोड़ा अलग था. पिछले सत्र तक रमन सिंह और संसदीय कार्यमंत्री अजय चंद्राकर राज्यपाल की अगवानी करने परिसर तक जाते थे, लेकिन इस बार रमन सिंह सदन में बैठे रहे. विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे और नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से धरमलाल कौशिक बाहर गए तो यह उक्ति चरितार्थ होते हुए नजर आई- मानुष बली न होत है समय होत बलवान… भिल्लन लूटी गोपिका वही अर्जुन वहीं बाण.
भाजपा की सरकार रहने के दौरान देश-दुनिया के भगवाधारी, बाबा, कीर्तनकार और प्रवचन देने वाले प्रायः छत्तीसगढ़ आया करते थे. अमूमन जितने भी संत और बाबा छत्तीसगढ़ पधारे उन सबने बड़े-बड़े पंडालों के नीचे यही दोहराया कि मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए. मनुष्य समय का दास होता है, लेकिन यह बात सत्ता के नशे में चूर भाजपाइयों को समझ में नहीं आई. पांचवी विधानसभा के पहले अधिवेशन में सोमवार सात जनवरी को भाजपा के मुट्ठी भर सदस्यों ने धारा 144 लागू होने के बाद भी विधानसभा गेट पर प्रदर्शन को लेकर हंगामा मचाया भी तो उनकी आवाज फीकी पड़ गई. भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने मोर्चा संभाला तो लगा कि अगर वे नेता प्रतिपक्ष होते तो शायद ज्यादा बेहतर होता. रमन सिंह ज्यादातर समय खामोश बैठकर अपनी उंगलियों के नाखूनों को देखते रहे. नेता प्रतिपक्ष धरम कौशिक ने दो बार टोका-टाकी की, लेकिन लग रहा था कि वे विपक्ष के नेता नहीं ब्लकि अब भी खुद को विधानसभा का अध्यक्ष मानकर चल रहे हैं.
सदन के बाहर भी कट लो… 
यह तो हुआ सदन का नजारा. कमोबेश यही स्थिति सदन के बाहर की भी थी.प्रायः सभी अफसर भाजपा के नेताओं से दूरी बनाकर चल रहे थे. वे पत्रकार भी छिटक गए हैं जो कल तक डाक्टर रमन सिंह के लिए चालीसा लिखा करते थे और चालीसा पढ़ा करते थे. हालांकि कंसोल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से लाभान्वित दरबारी अब भी इंटरव्यूह वगैरह के चक्कर में पड़े हुए दिखाई देते हैं, लेकिन ज्यादातर का रुख बदल गया है. रमन सिंह के कतिपय कर्मठ कर्मचारी अवश्य उनके आसपास है. इनमें से एक ओपी गुप्ता है जिन पर भी तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं. कहा जा रहा है कि उन्होंने अपना एक निजी मकान सरकारी खर्च पर किराए पर चढ़ा रखा है. एक दूसरे ओएसडी अरुण बिसेन है जिनका नाम सेक्स सीडी कांड में उछला है. हाल के दिनों में कांड से जुड़े एक प्रमुख आरोपी कैलाश मुरारका ने कोर्ट में शपथपत्र देकर कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह के निर्देश के बाद अरुण बिसेन ने मंत्रियों की सेक्स सीडी देखने के लिए मुंबई के होटल सहारा में उनसे मुलाकात की थी. इधर यह भी चर्चा है कि बिसेन अब धरम कौशिक के निज सहायक बनने की कवायद कर रहे हैं. विधानसभा परिसर में यदा-कदा सुपर सीएम को लेकर भी चर्चा होती रहती है. चर्चा में यह बात भी सामने आई है कि सुपर सीएम के राजधानी में ही पांच-छह मकान है. हर बार वे मकान बदल-बदलकर रहते हैं और इन दिनों केंद्र में जमने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं.
जनकल्याण फैसले
बहरहाल पांचवी विधानसभा के प्रथम अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में हाल के दिनों में सरकार के लिए गए फैसलों को जनकल्याणकारी ठहराया. राज्यपाल ने कहा कि नई सरकार ने गठन के पहले दिन यानि 17 दिसम्बर को 16 लाख 65 हजार से अधिक किसानों का 6 हजार सौ करोड़ से अधिक का कर्ज माफ कर दिया गया है. राज्यपाल ने कहा कि कर्ज माफी के निर्णय को अमलीजामा पहनाने के क्रम के प्रथम चरण में दस दिनों के भीतर, लिकिंग के तहत की गई धान खरीदी के एवज में 12 सौ 48 करोड़ रुपए की राशि 3 लाख 57  हजार किसानों के खाते में जमा कर दी गई. उन्होंने सदन को बताया कि राष्ट्रीयकृत बैंकों से संबंधित अल्पकालीन कृषि कर्ज को भी परीक्षण के दायरे में ले लिया गया है.
राज्यपाल ने कहा कि किसानों की आर्थिक उन्नति से ही ग्रामीण जन-जीवन में खुशहाली और विकास का रास्ता खुलेगा इसलिए नई सरकार ने 2018-19 में 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का निर्णय भी लिया है. राज्यपाल ने वर्ष 2013 की झीरम घाटी की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा इस घटना की वजह से लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून व्यवस्था के प्रति आस्था गहरा धक्का पहुंचा था फलस्वरुप झीरम घाटी की घटना के विभिन्न पहलुओं की एसआईटी से जांच का निर्णय भी एक बेहतर कदम है. राज्यपाल आनंदी बेन ने सदन में बताया कि दस साल पहले बस्तर के लोहाण्डीगुड़ा इलाके के कई गांवों की जमीन अधिग्रहीत कर ली गई थी. नई सरकार ने जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसानों की भूमि लौटाने का जो फैसला लिया है उससे बस्तर के जनजीवन में व्यवस्था के प्रति विश्वास पैदा हुआ है. राज्यपाल ने पांच डिसमिल से कम रकबे की खरीदी-बिक्री, नामांतरण-पंजीयन से रोक हटाने को भी राहत भरा कदम बताया. उन्होंने कहा कि नई सरकार के इस फैसले से छोटे भूखंडधारक और कमजोर तबके के लोग राहत का अनुभव कर रहे हैं. राज्यपाल ने सदन में जानकारी दी कि नई सरकार गांवों के नालों का क्रमबद्ध संरक्षण करेगी. पशुधन के संवर्धन के लिए  नस्ल सुधार कार्यक्रम चलाएंगी और जैविक खाद की लघु उत्पादक ईकाईयों का निर्माण करेगी. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में हर किसान के पास छोटी-बड़ी बाड़ियां है. सरकार बाड़ियों को नया जीवन देने के लिए हर संभव प्रयास करेगी ताकि ग्रामीण किसानों की आमदानी में भी इजाफा हो सकें. राज्यपाल ने बताया कि सरकार औद्योगिक विकास की पक्षधर है, लेकिन सामाजिक सरोकार की घनिष्ठता भी बरकरार रखना चाहती है, इसलिए छोटी पूंजी वाली इकाईयों की स्थापना विशेष रुप से जोर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा, लोगों को अच्छा मकान, अच्छी शिक्षा और ग्रामीणों को जल-जंगल-जमीन पर अधिकार की बात अब केवल कानून की किताबों में ही नहीं रहेगी ब्लकि इसे मूर्तरुप  दिया जाएगा.
माओवादी समस्या से निपटने होगी पीड़ित पक्षों से चर्चा
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सरकार सामाजिक समरसता और सौहार्द कायम रखना चाहती है सो माओवाद प्रभावित इलाकों में शांति के लिए विशेष प्रयास करेगी और शांति बहाल करने के लिए पीड़ित पक्षों से चर्चा करेगी. राज्यपाल के अभिभाषण के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में अपने मंत्रियों का परिचय दिया और दस हजार 395 करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट पेश किया. अब इस बजट पर 8 जनवरी को पक्ष और विपक्ष के सदस्य चर्चा करेंगे. सदन में थोड़े समय के लिए विपक्षी सदस्यों ने इस बात को लेकर अवरोध पैदा किया कि विधानसभा और उसके आसपास धारा 144 लागू होने के बाद भी कतिपय लोग विधानसभा के गेट के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं. विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की मांग की तो मुख्यमंत्री बघेल ने सदन में जानकारी दी कि सभी प्रदर्शनकारी हटा दिए गए हैं.

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