8-9 जनवरी को पंचायतों पर , ‘ग्रामीण जनधरना’ देगी:    छत्तीसगढ़ किसान सभा

6.01.2018
छत्तीसगढ़ किसान सभा ने 8-9 जनवरी को प्रदेश की 200 पंचायतों पर *’ग्रामीण जनधरना*’ आयोजित करने का निर्णय लिया है. ये जनधरने मोदी सरकार की कृषि विरोधी नीतियों के खिलाफ और नवगठित कांग्रेस सरकार से किसानों की जल-जंगल-जमीन की समस्याओं को हल करने के लिए सर्वसमावेशी कदम उठाने की मांग करते हुए आयोजित किए जायेंगे. इन जनधरनों में गांवों के सभी लोगों को और किसानों-आदिवासियों के बीच काम करने वाले सभी जनसंगठनों को शामिल होने का आह्वान किया गया ही. इसके लिए 1-7 जनवरी तक सप्ताहव्यापी प्रचार अभियान भी चलाया जाएगा.

आज यहां जारी एक बयान में छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने बताया कि इन जनधरनों के जरिये जहां केंद्र की मोदी सरकार से स्वामीनाथन आयोग के सी-2 फार्मूले के अनुसार फसल की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने, किसानों की संपूर्ण क़र्ज़ मुक्ति के लिए कदम उठाने, मनरेगा मजदूरी 600 रूपये प्रतिदिन करने, 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों को 5000 रूपये मासिक पेंशन देने तथा कृषि संकट हल करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की जायेगी, वहीँ राज्य की नवगठित कांग्रेस सरकार से आदिवासियों को वनभूमि के पट्टे देने, भूमि अधिग्रहण क़ानून के अनुसार अधिग्रहित, लेकिन अनुपयोगी पड़ी जमीन को मूल भूस्वामियों को लौटाए जाने व अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को पुनर्वास-नौकरी देने, संविधान में आदिवासियों की रक्षा के लिए बने प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन करने, भूराजस्व संहिता में किए गए आदिवासीविरोधी संशोधनों को विधानसभा से वापस लेने, मनरेगा में बड़े पैमाने पर काम शुरू करने और वर्षों से लंबित बकाया मजदूरी देने की मांग की जायेगी.

किसान सभा नेताओं ने कहा है कि हालांकि नवगठित कांग्रेस सरकार द्वारा समर्थन मूल्य, क़र्ज़ माफ़ी, टाटा के लिए अधिग्रहित भूमि की वापसी जैसे किसानों के लिए उठाये गए कुछ कदम स्वागत योग्य हैं, क्योंकि इससे किसानों को कुछ रहत तो मिली है, लेकिन इससे प्रदेश में व्याप्त कृषि संकट हल होने वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों पर चढ़े कुल कर्जों का 55% क़र्ज़ महाजनों, निजी बैंकों व स्व-सहायता समूह से लिया गया क़र्ज़ है. जब तक सरकारी बैंकों से लिए गए कर्जों के साथ ही इन कर्जों से भी किसानों को मुक्त करने के लिए कदम नहीं उठाये जाते, तब तक यह राहत भी ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ ही साबित होगी और किसान आत्महत्याएं रूकने वाली नहीं है. उन्होंने कहा कि ग्रामीणजनों को महंगाई की मार से बचाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत और सार्वभौमिक बनाए जाने की भी जरूरत है.

उल्लेखनीय है कि 8-9 जनवरी को ही पूरे देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र से जुड़े 25 करोड़ मजदूर व कर्मचारी भी मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ दो-दिनी हड़ताल पर जा रहे हैं.

*संजय पराते*, अध्यक्ष, (मो.) 094242-31650
*ऋषि गुप्ता*, महासचिव, (मो.) 094062-21661

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