जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय

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4.02.2019

माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी                                          प्रधानमंत्री, भारत सरकार तथा सांसद, वाराणसी 

श्रीमान नितिन गडकरी जी
जल परिवहन मंत्री तथा जल संसाधन मंत्री

श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी  
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश

विषय: बनारस के नाविक समाज के पारंपरिक अधिकारों की बहाली व गंगा संरक्षण।

माननीयो,

बनारस नाविक समाज के लोग पहले ही बेरोजगारी की बड़ी समस्या परेशान है, ऐसे में हमारे परंपरागत काम-काज यानी नाव संचालन, मत्स्य पालन व रेत के क्षेत्र में कार्य जिसमें हजारों लाखों परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी आत्मनिर्भर ससम्मान रोजी-रोटी कमाकर जीवन बसर कर  रहे थे, पिछले कुछ सालों से इनके रोजगारों को छीना जा रहा है।
          बनारस में नाविकों का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी पुरानी यहां की सभ्यता, काशी विश्वनाथ और माँ गंगा है। हजारों साल से ये बनारस के घाटों पर रहते हैं। माँ गंगा ही उनकी आजीविका का साधन है। 

गंगा में क्रूस चलाने की शुरुआत के साथ ही इन मल्लाहों के रेत निकालने, किनारों पर खेती करने के परम्परागत रोजगार को रिवर फ्रंट के नाम पर खत्म किया जा रहा है। मछली मारने पर भी रोक लगा दिया गया है। रोजगार के आभाव में भोजन के बिना उनके बच्चे कुपोषित हो रहे है। 

वाटर वेज के तहत इलाहाबाद से हल्दिया तक गंगा में बड़े-बड़े मालवाहक जहाजों को चलाया जाना  है जबकि गंगा में पानी ही नही है। यह योजना नदी और इस पर आश्रित पूरी जनसंख्या को विस्थापित करने वाली है। ये मल्लाह-मछुआरे सब बर्बाद हो जाएंगे और जलीय पर्यावरण और जीवों का भी विनाश निश्चित है। 

हम बनारस के विकास के विरोधी नहीं हैं लेकिन ये कौन सा विकास है जिसमे बनारस के लोग ही शामिल नहीं हैं। हम माँ गंगा की सफ़ाई में पूर्ण रूप से सहयोग करेंगें।  नाविक समाज 28 दिसंबर, 2018 से नाव बन्द कर के अपनी मांगों को ले कर धरने पर है। लेकिन कोई सुनवाई नही हो रही है।

ये आंदोलन मात्र नाविकों की आजीविका ही नहीं बल्कि गंगा के पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान वाले रूप को जिंदा रखने के लिए भी है।

आप तीनों से कहना है कि–

–माननीय नरेंद्र मोदी जी आप ना केवल देश के प्रधानमंत्री हैं बल्कि बनारस के सांसद भी हैं इस नाते आपकी दोहरी जिम्मेदारी और लोगो की आशा बनती है।

–माननीय नितिन गडकरी जी आप दो मंत्रालयों के मंत्री हैं। जल परिवहन का तात्पर्य सिर्फ बड़ी क्रूस या जहाज ही नहीं है। ये नाविक सदियों से गंगा के पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए, लोगों और सामानों को लेकर नदी पार कराते आए हैं।  आप परिवहन मंत्री के साथ गंगा पुनर्जीवन मंत्री भी हैं। गंगा का पुनर्जीवन के लिए, गंगा के साथ गंगा के पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए अपनी आजीविका प्राप्त करते हुए नाविक समाज को जिंदा रखने की भी जिम्मेदारी आप की है।

–माननीय योगी जी, राज्य के मुख्यमंत्री की भी जिम्मेदारी बनती है कि राज्य के गरीब तबके के लोगों के रोजगार बचे रहें, खासकर जो गंगा के साथ सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी रिश्ता बना कर जी रहे हैं।

अतः आपसे निवेदन है कि माँ गंगा जो सबकी जीवन रेखा है को, तथा उनपर आश्रित पुत्रों को बचानें की इस लड़ाई में आप नाविक समाज का साथ दें।

नाविक समाज की प्रमुख मांगे इस प्रकार हैं:–

1.गंगा में क्रूज संचालन  बन्द हो।
2.नावों के लाइसेंसों का पुराने नियम के साथ रिन्युअल हो।
3.गोताखोरों की नियुक्ति जल पुलिस में स्थायी रूप से हो।
4.वाटर स्पोर्ट काशी से बंद हो।
5.घाटों /तालाबों पर सरकारी/कम्पनी और अवैध कब्ज़ा बन्द हो, हटाया जाए।
6.विलुप्त डॉल्फिन एवं अन्य मछलियों के संरक्षण के लिए बड़े जहाजों के संचालन की योजना रद्द हो।  
7.गंगा, वरुणा, अस्सी में बह रहे सैकड़ो नालों, सीवरों को बन्द किया जाए।
8.प्राइवेट कम्पनी या बाहर के व्यापारियों द्वारा नाव लाकर हो रही नाविक समाज की जीविका समाप्ति रोकी जाए।
9.गंगा के निर्मलीकरण के नाम पर आवंटित बजट की लूट बंद हो, इस काम का क्रियान्वयन समयबद्धता के साथ पूरा हो और गंगा सफाई वाटर वेज के नाम पर सरकार सही तथ्य सामने लाये।
10. मल्लाह समाज को  गंगा किनारे खेती और वन क्षेत्र के विकास हेतु पट्टे आवंटित किए जाए ।  

मेधा पाटकर, नर्मदा बचाओ आन्दोलन व जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम);  पी. चेन्निया, आंध्र प्रदेश व्यवसाय वृथिदारुला यूनियन (एपीवीवीयू), नेशनल सेंटर फॉर लेबर व एनएपीएम (आंध्र प्रदेश); रामकृष्णम राजू, यूनाइटेड फोरम फॉर आरटीआई व एनएपीएम (आंध्र प्रदेश); प्रफुल्ला सामंतरा, लोक शक्ति अभियान व एनएपीएम (ओड़ीशा); लिंगराज आज़ादसमाजवादी जन परिषद, नियमगिरि सुरक्षा समिति, व एनएपीएम (ओड़ीशा); कविता श्रीवास्तव, पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयुसीएल) व एनएपीएम; संदीप पाण्डेय, सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (उत्तर प्रदेश); रिटायर्ड मेजर जनरल एस. जी. वोम्बत्केरे, एनएपीएम (कर्नाटक); गेब्रियल दिएत्रिच, पेन्न उरिमय इयक्कम, मदुरई व एनएपीएम (तमिलनाडु); गीथा रामकृष्णन, असंगठित क्षेत्र कामगार फेडरेशन, एनएपीएम (तमिलनाडु); डॉ. सुनीलम व आराधना भार्गव, किसान संघर्ष समिति व एनएपीएम,  राजकुमार सिन्हा (मध्य प्रदेश); अरुल डोस, एनएपीएम (तमिलनाडु);  अरुंधती धुरु व मनेश गुप्ता, एनएपीएम (उत्तर प्रदेश); ऋचा सिंह, संगतिन किसान मजदूर संगठन, एनएपीएम (उत्तर प्रदेश); विलायोदी वेणुगोपाल प्रो. कुसुमम जोसफसरथ चेलूर  एनएपीएम (केरल); मीरा संघमित्रा  एनएपीएम (तेलंगाना व आंध्र प्रदेश);गुरुवंत सिंह, एनएपीएम, पंजाब; विमल भाई, माटू जनसंगठन, एनएपीएम (उत्तराखंड); जबर सिंह, एनएपीएम (उत्तराखंड); सिस्टर सीलिया,डोमेस्टिक वर्कर्स यूनियन व एनएपीएम (कर्नाटक); आनंद मज्गओंकर, कृष्णकांत, स्वाति देसाई , पर्यावरण सुरक्षा समिति व एनएपीएम (गुजरात); कामायनी स्वामी व आशीष रंजन, जन जागरण शक्ति संगठन व एनएपीएम (बिहार); महेंद्र यादव, कोसी नवनिर्माण मंच व एनएपीएम (बिहार); सिस्टर डोरोथीउज्जवल चौबे  एनएपीएम (बिहार);दयामनी बारला, आदिवासी मूलनिवासी अस्तित्व रक्षा समिति व एनएपीएम;बसंत हेतमसरिया, अशोक वर्मा  (झारखंड); भूपेंद्र सिंह रावत, जन संघर्ष वाहिनी व एनएपीएम (दिल्ली); राजेन्द्र रविमधुरेश कुमारअमित कुमारहिमशी सिंहउमा, एनएपीएम (दिल्ली); नान्हू प्रसाद, नेशनल साइकिलिस्ट यूनियन व एनएपीएम (दिल्ली); फैज़ल खान, खुदाई खिदमतगार व एनएपीएम (हरियाणा); जे. एस. वालिया, एनएपीएम (हरियाणा); कैलाश मीना,एनएपीएम (राजस्थान); समर बागची व अमिताव मित्रा, एनएपीएम (पश्चिम बंगाल); सुनीति एस. आर.सुहास कोल्हेकरव प्रसाद बागवे, एनएपीएम (महाराष्ट्र);गौतम बंदोपाध्याय, एनएपीएम (छत्तीसगढ़); अंजलि भारद्वाज,अमृता जोहरी नेशनल कैंपेन फॉर पीपल्स राइट टू इनफार्मेशन व एनएपीएम; कलादास डहरिया, रेला व एनएपीएम (छत्तीसगढ़); बिलाल खान, घर बचाओ घर बनाओ आन्दोलन व एनएपीएम।  
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