सफ़दर हाशमी को याद करते हुए ःः  जीवेश प्रभाकर

 12 अप्रॅल , 1954 – 2 जनवरी,1989
तीस साल पहले 1 जनवरी, 1989 को जब दिल्ली से सटे साहिबाबाद के झंडापुर गांव में ग़ाज़ियाबाद नगरपालिका चुनाव दौरान नुक्कड़ नाटक ‘हल्ला बोल’ के प्रदर्शन करती टीम पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। इस हमले में सफ़दर हाशमी बुरी तरह से जख्मी हुए और सिर में लगी भयानक चोटों की वजह से 2 जनवरी को सफ़दर हाशमी की मृत्यु हो गई थी ।
एक मार्क्सवादी नाटककार, कलाकार, निर्देशक, गीतकार और कलाविद थे। सफ़दर हाशमी को नुक्कड़ नाटको के साथ जुड़ाव के लिए जाना जाता है। सफ़दर हाशमी ‘जन नाट्य मंच’ के संस्थापक सदस्य थे।
सफ़दर हाशमी का जन्म 12 अप्रॅल 1954 को दिल्ली में हुआ था। इनका शुरुआती जीवन अलीगढ़ और दिल्ली में बीता, जहां एक प्रगतिशील मार्क्सवादी परिवार में उनका लालन-पालन हुआ, इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली में पूरी की। दिल्ली के सेंट स्टीफेन्स कॉलेज से अंग्रेज़ी में स्नातक करने के बाद इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में एम.ए. किया। यही वह समय था जब वे कम्युनिस्ट पार्टी की सांस्कृतिक यूनिट इप्टा (भारतीय जन नाट्य संघ) से उनका जुड़ाव हुआ।
आगे चलकर सफ़दर जन नाट्य मंच (जनम) के अहम् संस्थापक सदस्य बने। यह संगठन 1973 में इप्टा से अलग होकर बना, सीटू जैसे मज़दूर संगठनों के साथ ‘जनम’ का अभिन्न जुड़ाव रहा। इसके अलावा जनवादी छात्रों, महिलाओं, युवाओं, किसानों इत्यादी के आंदोलनों में भी इसने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
1975 में आपातकाल के लागू होने तक सफ़दर हाशमी ‘जनम’ के साथ नुक्कड़ नाटक करते रहे, और उसके बाद आपातकाल के दौरान वे गढ़वाल, कश्मीर और दिल्ली के विश्वविद्यालयों में अंग्रेज़ी साहित्य के व्याख्याता के पद पर रहे। आपातकाल के बाद सफ़दर हाशमी वापिस राजनैतिक तौर पर सक्रिय हो गए।1978 तक ‘जनम’ भारत में नुक्कड़ नाटक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संगठन के रूप में उभरकर आया। एक नए नाटक ‘मशीन’ को दो लाख मज़दूरों की विशाल सभा के सामने आयोजित किया गया। इसके बाद और भी बहुत से नाटक सामने आए, जिनमें निम्न वर्गीय किसानों की बेचैनी का दर्शाता हुआ नाटक ‘गांव से शहर तक’, सांप्रदायिक फासीवाद को दर्शाते (हत्यारे और अपहरण भाईचारे का), बेरोजगारी पर बना नाटक ‘तीन करोड़’, घरेलू हिंसा पर बना नाटक ‘औरत’ और मंहगाई पर बना नाटक ‘डीटीसी की धांधली’ इत्यादि प्रमुख रहे। सफ़दर हाशमी ने ‘जनम’ के निर्देशक की भूमिका बखूबी निभाई, उनकी मृत्यु होने तक जनम लगभग 24 नुक्कड़ नाटकों के हज़ारों प्रदर्शन कर चुका था। इन नाटकों का प्रदर्शन मुख्यत: मज़दूर बस्तियों, फैक्टरियों और वर्कशॉपों में किया गया था।
सफ़दर हाशमी ने बहुत से वृत्तचित्रों और दूरदर्शन के लिए एक धारावाहिक ‘खिलती कलियों का निर्माण भी किया’।उनके द्वारा रचित “एक चिड़िया ,अनेक चिड़ियाँ ” विज्ञापन गीत दूरदर्शन पर अत्यधिक लोकप्रिय हुआ । इन्होंने बच्चों के लिए किताबें लिखीं और भारतीय थिएटर की आलोचना में भी अपना योगदान दिया।
आज उनके शहादत दिवस पर उन्हें याद करते हुए अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए एकजुट होने का संकल्प दोहराते हैं ।
( जीवेश प्रभाकर )

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