1.01.2019

बीते छह साल में हर दूसरे-तीसरे साल मौत की अफवाहों का शिकार होते रहे कादर खान ने 81 बरस की उम्र में इस नए साल पर दुनिया को अलविदा कह दिया। अफगानिस्तान से मुंबई और फिर पूरी दुनिया पर छा जाने की उनकी दास्तां संघर्षों से भरी रही है। उनकी पहचान परदे से ज्यादा परदे के पीछे के किरदार यानि संवाद लेखक के तौर पर थी।

उनके लिखे डायलॉग की अहमियत ऐसे समझ सकते हैं कि जब उन्होंने रोटी (1974) के संवाद लिखे तो मनमोहन देसाई इस कदर खुश हो गए कि फीस के अलावा उन्हें अपना निजी टेलीविजन, घड़ी और एक मोटा लिफाफा थमा आए।
खैर, उनकी पहली बड़ी पहचान मुकद्दर का सिकंदर (1978) के संवाद से मिली। जिसमें कब्रिस्तान में बैठा फकीर (कादर ख़ान) अपनी मां के गुजरने पर रो रहे बच्चे से कहता है,” इस फकीर की एक बात याद रखना. जि़ंदगी का सही लुत्फ उठाना है तो मौत से खेलो, सुख तो बेवफा है चंद दिनों के लिए आता है और चला जाता है दुख तो अपना साथी है, अपने साथ रहता है, पोंछ दे आँसू. दु:ख को अपना ले. तक़दीर तेरे क़दमों में होगी और तू मुक़द्दर का बादशाह होगा…”

उनका लिखा अग्निपथ (1990) में एक चर्चित डायलॉग है-”विजय दीनानाथ चौहान, पूरा नाम, बाप का नाम दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान, गांव मांडवा, उम्र 36 साल 9 महीना 8 दिन और ये सोलहवां घंटा चालू है..”

अमिताभ-गोविंदा सहित कई कलाकारों को ”हीरो” बनाने वाले कादर खान ने परदे पर कॉमेडी और विलेन से लेकर कई अलग-अलग किरदारों को जिया। उन्होंने द्विअर्थी संवाद भी लिखे, जिसके चलते उन पर लानतें भी भेजी गई। हालांकि उनकी पहचान कॉमेडी और संजीदा डायलॉग ज्यादा रहे।
अफगानिस्तान से आने के बाद मुंबई की बस्ती कमाठीपुरा में संघर्ष के दिन बिताने वाले कादर खान इंजीनियरिंग के प्रोफेसर भी रहे और फिल्मों में अतिव्यस्तता के दौर में उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से अरबी भाषा में डिप्लोमा भी हासिल किया।

बीते कुछ सालों से अपने मरने की खबरों पर मुस्कुरा रहे कादर खान फिल्मों को छोड़ अपने दिल के और खास दीन के काम में लगे हुए थे। उन्हें याद करते हुए फिल्म हिम्मतवाला (1983) की एक क्लिप। यह क्लिप मेरे लिए खास क्यों है, यह इसे पूरा देखकर आप समझ जाएंगे। वैसे बताता चलूं कि इस फिल्म से कादरखान विलेन के रोल से कॉमेडी में शिफ्ट हुए थे।
भिलाई में तब यह फिल्म न्यू बसंत टॉकीज में लगी थी और कादर खान व जितेंद्र के इसी डॉयलॉग की वजह से फिल्म खूब चली थी। तब फिल्मों की ट्रेड मैगजीन में खास तौर पर इस डॉयलॉग का जिक्र करते हुए इस फिल्म की पब्लिसिटी की गई थी।

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