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25.12.2018

ज़ाकिर हुसैन , भिलाई 

 

आप सभी को क्रिसमस की ढेर सारी मुबारकबाद के साथ आज कुछ खास बातें भिलाई के सबसे पुराने चर्च पर। सेक्टर-6 का क्रिश्चियन कम्यूनिटी चर्च का मौजूदा भवन बने अब 53 साल पूरे हो चुके हैं। इस चर्च की खास बात ये है कि यहां पुलपिट (प्रवचन की जगह) के ठीक नीचे एक टाइम कैप्सूल दफन है। सुनने में शायद कुछ लोगों को अजीब सा लगे लेकिन ये हकीकत है। क्रिश्चियन कम्यूनिटी चर्च के प्रमुख पदाधिकारी और भिलाई की चर्चित हस्ती रहे स्व. डीसी हेनरी ने कुछ साल पहले इस बारे में मुझे विस्तार से बताया था.

भिलाई स्टील प्रोजेक्ट की शुरुआत के साथ जब देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग आना शुरू हुए तो स्वाभाविक था कि इनमें क्रिश्चियन समुदाय के लोग भी थे। शुरूआत में क्रिश्चियन समुदाय के लोगों के लिए कोई एक प्रार्थना स्थल नहीं था। दिवंगत हेनरी ने अपने एक आलेख में इसकी जानकारी देते हुए मुझे बताया था कि 7 सितंबर 1956 को गॉस मेमोरियल सेंटर रायपुर मेें 5 प्रमुख अग्रणी एवं अलग-अलग कलीसियायों के पासबानों ने कम्यूनिटी चर्च बोर्ड का गठन कर भिलाई में कम्यूनिटी चर्च स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। इसके बाद 17 फरवरी 1957 को कैंप-2 में बीएसपी के बाल मंदिर में आराधना शुरू हुई। प्रार्थना और चर्च से जुड़ी दूसरी गतिविधियां बाद के सालों में भी अस्थाई स्थलों में चलती रही।
5 अक्टूबर 1958 को कम्यूनिटी चर्च बोर्ड भिलाई के अध्यक्ष रेव्ह. टी. एसबैगर्स ने भिलाई के लिए क्रिश्चियन कम्युनिटी चर्च को अधिकृत नियमित चर्च (recognized regular church) घोषित किया। हालांकि तब तक चर्च का मौजूदा भवन नहीं बना था। तब भिलाई स्टील प्लांट ने सेक्टर-1 क्लब का भवन मसीही समुदाय को अराधना के लिए दिया था। इसके बाद बीएसपी ने 1961 में सेक्टर-6 की मौजूदा जगह पर 16 हजार वर्गफुट का भूखंड चर्च बनाने के लिए दिया। 2 अप्रैल 1961 को ईस्टर के दिन ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष रेव्ह. टी. एसबैगर्स के हाथों हुई। कुछ दिन बाद टिन शेड और चटाई की दीवारों का ढांचा तैयार कर आराधना शुरू की गई।

रही बात टाइम कैप्सूल की तो इस बारे में दिवंगत हेनरी जी ने बताया था कि मसीही परंपरा में भी किसी ऐतिहासिक भवन के निर्माण से पहले उसकी नींव में तत्कालीन समय के जरूरी दस्तावेज किसी सुरक्षित बक्से में डालकर जमीन में गहरे दफन किया जाता रहा है। जिससे भविष्य के लिए आज का इतिहास सुरक्षित रहे। इस परंपरा का निर्वाह भिलाई में भी किया गया। इसके लिए 25 दिसंबर 1965 कोःः क्रिसमस के दिन एक ऐतिहासिक समारोह हुआ, जिसमें तांबे की छोटी पेटी में पवित्र बाइबिल, इस चर्च भवन की ड्राइंग-डिजाइन,भिलाई में तब के मसीही समुदाय के लोगों की सूची और चर्च के पदाधिकारियों के नाम सहित कुछ जरूरी दस्तावेज रखे गए और इन्हें वर्तमान भवन के पुलपिट के स्थान पर गहरे खोद कर दफन किया गया।

इसके बाद टीन शेड और चटाई से घिरे अस्थाई चर्च की जगह पक्के भवन का निर्माण तेजी से शुरू हुआ और 3 अप्रैल 1966 को पॉल पारकर व बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. गुरुबचन सिंह ने पाम संडे के दिन मौजूदा चर्च भवन का लोकार्पण किया। तब से यह चर्च मेल-मिलाप और भाईचारे की रोशनी बिखेर रहा है।

*© & ℗ mzhbhilai251218*

ज़ाकिर हुसैन ,भिलाई 

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