उत्तम कुमार, सम्पादक दक्षिण कोसल

24.12.2018

किसानों की कर्जमाफी के वादे को पूरा करने के बाद छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने घोषणापत्र में किए गए अपने एक अन्य वादे को पूरा करने आगे बढ़ रही है। आज सीएमओ के ट्यूटर हेंडल में ट्यूट किया गया है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बस्तर जिले में टाटा संयंत्र के लिए अधिग्रहित भूमि किसानों को वापस करने के लिए अधिकारियों को मंत्रिपरिषद में प्रस्ताव लाने के निर्देशित किया है। टाटा इस्पात संयंत्र के लिए बस्तर जिले के लोहांडीगुड़ा क्षेत्र में जिन किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई थी, उन्हें उनकी जमीन वापस दिलाने मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री बघेल नेे अधिकारियों को जरूरी प्रक्रिया पूर्ण करने और मंत्री परिषद की आगामी बैठक में प्रस्ताव लाने के निर्देश दिए हैं।

मालूम हो कि आदिवासी बहुल बस्तर जिले के लोहांडीगुड़ा क्षेत्र में टाटा इस्पात संयंत्र के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की गयी थी। आपको विदित हो कि 22 मार्च 2016 को कांग्रेस ने विधान सभा का बहिर्गमन किया था। बस्तर में टाटा इस्पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित की गई भूमि किसानों को वापस करने की मांग को लेकर कांग्रेस सदस्यों ने विधान सभा में हंगामा खड़ा कर दिया था। साथ ही राजस्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय के बयान से असंतुष्ट होकर नारेबाजी करते हुए बहिर्गमन किया था। कांगे्रस सदस्य दीपक बैज, लखेश्वर बघेल, मोहन मरकाम ने ध्यानाकर्षण सूचना के तहत यह मामला उठाया था। बैज ने कहा, बंदूक की नोंक पर किसानों की जमीन ली गई है। 10 वर्ष बाद भी प्लांट स्थापित नहीं किया गया है। टाटा ने संयंत्र लगाने में असमर्थता जताई है। भूमि अधिग्रहण नियम के अनुसार पांच वर्ष में उद्योग नहीं लगाने पर भूमि वापस करने का प्रावधान है।

उन्होंने मंत्री से इस पर अमल करने की मांग की थी। भूमि के बदले में उन्हें आज तक नौकरी नहीं मिली है। इसी तरह पुनर्वास नीति के लाभ से वंचित हैं। दीपक बैज ने यह मामला उठाते हुए कहा, जमीन अधिग्रहण करने ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है। सुनवाई के समय जनप्रतिनिधियों को वहां जाने से रोका गया। उन्होंने जानना चाहा कि पुनर्वास नीति के तहत कितने लोगों को नौकरी व मुआवजा दिया गया। राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने अपने जवाब में बताया लोहाण्डीगुड़ा क्षेत्र के छोटे परोदा, बेलर, बंडाजी, कुम्हली, छिन्दगांव, टाकरागुड़ा, धुरागांव, सिरिसगुड़ा, दाबपाल तथा बेलियापाल की निजी भूमि 1764.61 हेक्टेयर का अधिग्रहण भूमि अर्जन अधिनियम 1894 के प्रावधानों के तहत किया गया था। इसके अतिरिक्त 278.84 हेक्टयर शासकीय भूमि का हस्तांतरण भी उद्योग विभाग को किया गया है। इस परियोजना में कुल 1707 किसान प्रभावित हुए हैं।

जिसमें से 1165 किसानों को मुआवजा भुगतान कर दिया गया है। शेष 542 किसानों को मुआवजा भुगतान हेतु समुचित प्रयास किए जाने के बाद भी उनके द्वारा मुआवजा प्राप्त नहीं करने के कारण उनकी मुआवजा की राशि कोषालय में जमा कर दी गई है। जहां तक प्रभावित किसानों के पुनर्वास का प्रश्र है, सभी प्रभावित किसानों को राज्य के आदर्श पुनर्वास नीति 2005 के तहत पुनर्वास की पात्रता है, जो उद्योग स्थापना के समय प्रभावित किसानों को प्रदाय किया जाएगा। वर्तमान में अर्जित भूमि पर प्रभावित किसानों का कब्जा है। उन्होंने कहा, उद्योग लगाने के बाद किसानों को नौकरी देना है। उद्योग नहीं लगा, इसलिए नौकरी व बेरोजगारी भत्ता देने का सवाल ही नहीं है। जमीन आज भी सीएसआईडीसी के नाम पर दर्ज है। कंपनी को जमीन का कब्जा नहीं दिया गया है। सरकार इस समस्या का समाधान करेगी।

किसानों को जमीन वापस करने के मामले में मंत्री शुरू से अंत तक गोलमोल जवाब देते रहे। भूपेश बघेल ने कहा, सरकार को नीतिगत फैसला लेना होगा। जिन 542 किसानों ने मुआवजा नहीं लिया है, पहले उनकी जमीन वापस की जाए। कवासी लखमा ने कहा, किसानों का पट्टा जब्त किया गया है। सरकार उनका धान नहीं खरीद रही है।अर्थात विधान सभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने जनघोषणा पत्र में प्रदेश के किसानों से यह वादा किया गया है कि औद्योगिक उपयोग के लिए अधिग्रहित कृषि भूमि, जिसके अधिग्रहण की तारीख से 5 वर्ष के भीतर उस पर कोई परियोजना स्थापित नहीं की गई है, ऐसे जमीनों को किसानों को वापस की जाएगी।

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बस्तर में की गई रैली के दौरान किसानों को विश्वास दिलाया था कि उन्हें उनकी जमीन वापस दिलाई जाएगी।सोमवार को मुख्यमंत्री बघेल ने किसानों से किए गए इस वादे का उल्लेख करते हुए बस्तर जिले में टाटा इस्पात संयंत्र के लिए 10 गांवों के किसानों की अधिग्रहित जमीन वापस करने के लिए अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के लिए कहा है।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, ‘राहुल जी ने चुनाव से पहले बस्तर में आदिवासियों से वादा किया था, हमने उस वादे को पूरा किया। यह जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के हक की पुनस्र्थापना की तरह है। हम आदिवासियों का विश्वास जीतना चाहते हैं और विकास की यह दिशा ही माओवाद को अलग-थलग करेगी।ज्ञात हो कि टाटा संयंत्र के लिए यह जमीन फरवरी 2008 और दिसंबर 2008 में अधिग्रहित की गई थी, जिस पर अब तक संबंधित कंपनी द्वारा कोई उद्योग स्थापित नहीं किया गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से टेलीफोन से बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे काफी कोशिशों के बाद भी बातचीत नहीं हो सकी.

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उत्तम कुमार ,संपादक ,दक्षिण कोसल