केन्द्र के इशारे पर की गई फर्जी गिरफ्तारी . छत्तीसगढ़ सरकार को बदनाम करने का पुलिस कर रही हैं षड्यंत्र .

जारी रहेगी  फर्जी मुठभेड़ और गिफ्तारियां : पीएम की हत्या के षड्यंत्र को सही ठहराने सीजी पुलिस ने की फर्जी गिरफ़्तारी , नई सरकार को बदनाम करने का काम शुरू

 SHUBHAM SHUKLA ःः हिन्दी ब्लिट्ज 

बस्तर । प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तमाम वादों और दावों के बीच भिलाई रेंज के आईजी जीपी सिंह ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा षड्यंत्र पूर्वक अर्बन नेटवर्क व प्रधानमंत्री के खिलाफ हत्या की साजिश के नामपर जेल में बंद कई समाजसेवियों, वकील, पत्रकार को दोषी साबित करने के लिए फिर एक निर्दोष सरकारी कर्मचारी को भयावह नक्सली बता गिरफ्तार कर संकेत दे दिया है कि प्रदेश में कुछ भी नही बदलने वाला ।

ज्ञात हो कि कल राजनांदगांव पुलिस ने नक्सल अर्बन नेटवर्क के एक बड़े सूत्रधार को दबोचकर नक्सल मोर्चे को फेल करने में एक बड़ी सफलता हासिल करने का दावा करते हुए बताया था कि उसे बाघनदी क्षेत्र से जिले में दाखिल होने के दौरान रविवार को उसे गिरफ्तार किया है । साथ ही आईजी जीपी सिंह ने यह भी दावा किया था किआरोपी एक बड़े नक्सल कैडर का है, जो नक्सल संगठन में शीर्ष स्तर के पदाधिकारियों में गिना जाता है । जानकारी के मुताबिक पुलिस ने मूर्ति उर्फ वेंकट को कुछ सामान के साथ हिरासत में लिया है ।

जबकि गिरफ्तार आरोपी के भाई आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध समाजसेवी और सिविल लिबर्टीज कमेटी के सदस्य नारायणा राव ( +917382179137 )ने फोन कर बताया है कि उसके भाई वेंकट को छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा नागपुर से परिवार को बिना कोई सूचना दिए उठा लिया गया है , जिसे वे कई दिनों से ढूंढ रहे हैं । उन्होंने कि बताया कि उनका भाई का किसी भी प्रकार से नक्सली सम्बन्ध नही है , वह भारत सरकार के एक विभाग नेशनल जियोफिजिकल विभाग में है कार्यरत है । उनका काम शोध व वैज्ञानिक का है , जिसके तहत अंदुरनी इलाकों में जाकर मिनरल्स के सम्बंध में उन्हें जांच करना होता है ।

इधर पुलिस ने दावा किया है कि पूर्व में मिली कई सूचनाओं के तहत उसने 1980 से नक्सलियों के अर्बन नेटवर्क को मजबूत बनाने में काफी अहम भूमिका अदा की है । राजनांदगांव जिले के अंदरूनी इलाकों में भी उसकी सांगठनिक गतिविधियों में भागीदारी रही है ।
2016 और 2017 में नक्सल कैडर की बैठक ले चुका है वेंकट ने 2016 में शीर्ष नक्सल कैडर दीपक तिलतुमड़े और देवजी के साथ छुईखदान के कौरवा के जंगल में लंबी बैठक की थी । साथ ही 2017 में भी उसने पगारझोला में तीन दिनों तक रहकर नक्सल संगठन पर मीटिंग ली थी । लंबे समय से उसकी आवाजाही पर पुलिस नजर रखी हुई थी ।

रायपुर से प्रकाशित एक अखबार के अनुसार पुलिस ने यह दावा भी किया है कि वेंकट ने स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचने के आरोप में बंद प्रसिद्ध समाजसेवी व अधिवक्ता सुधा भारद्वाज सहित अन्य सभी की भूमिका है । इसी आरोप ने पुलिस की भूमिका को संदिग्ध बनाते हुए उसे केंद्र के इशारे पर षड्यंत्र के तहत काम करने का संदेही बना दिया है ।

कुल मिलाकर नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने के एक सप्ताह के भीतर यह कथित फर्जी गिफ्तारी नई सरकार के कथनी और करनी के अंतर को बता रही , वहीं जीपी सिंह जैसे अधिकारी सरकार को चुनौती भी दे रहे कि वह तो पहले की तरह ही फर्जी काम कर नक्सलवाद बढाते रहेंगे , भले ही मुख्यमंत्री इसे सामाजिक, राजनैतिक समस्या बताते रहे । नक्सली क्षेत्रों में तैनात लाखों की फोर्स को नही हटाने के निर्णय ने भी संकेत दिया है कि कुछ भी बदलने वाला नही है ।

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