भेड़िया मामले में कुछ गफलत हो गयी है लगता है ।
राजेश भाई की कविता यह है ;
खतरनाक विचार
#राजेश_जोशी की आज लिखी कविता
( काॅमरेड बादल के लिये , उनकी एक पोस्ट पढ़कर ; Rajesh Joshi)

सबसे पहले भेड़िये आये और उन्होंने मेरे गले को
अपने जबड़ों में दबोच लिया
कि कोई आवाज़ बाहर न निकल सके ।
फिर गीदड़ आये ,
पाँत बनाकर आये श्रृगाल
लोमड़ियों के झुण्ड के साथ ।
फिर कुत्ते आये , खूंखार कुत्ते
जिनको महज कुत्ता कहना संभव नहीं था

सबने चींथ चींथ कर
क्षत विक्षत कर डाला मेरी देह को
फिर थक कर भेड़ियों ने कुत्तों से पूछा
कुत्तों ने गीदड़ों से पूछा
गीदड़ों ने लोमड़ियों से पूछा
कि इस देह में तो वो खतरनाक विचार
कहीं भी नज़र नहीं आ रहा
जिनके लिये हमने इसको मारा ?

अचानक भेड़िये , गीदड़ , लोमड़ियाँ और कुत्ते
घबरा कर चारों दिशाओं में दौड़ने लगे !

22.12.18