अंतागढ़ में वन अधिकार कानून एवं भूमि आदिग्रहण सम्बंधित परिस्थितिया.ःः   आदिवासी जन वन अधिकार मंच कांकेर

अंतागढ़ में वन अधिकार कानून एवं भूमि आदिग्रहण सम्बंधित परिस्थितिया.ःः
आदिवासी जन वन अधिकार मंच
कांकेर.

23.12.2018

1. सामुदायिक वन अधिकार प्रक्रिया का गैर कार्यान्वयन
वर्ष 2014 से लेकर वर्तमान तक अंतागढ़ तहसील के बहुतायत क्षेत्रों के ग्राम सभाओ ने वनाधिकार कानून के नियमो और प्रावधानों के अनुसार सामुदायिक वन अधिकार पत्र भर विशेष ग्राम सभा मे अनुमोदन के पश्चात उप खण्ड स्तरीय समिति को जमा कर चुके है, परन्तु जिस पर आज तक कोई सुनवाई हुयी नहीं जवाब मिला उन दावा पत्रों के कोई रिकॉर्ड पाना मुमकिन नहीं है । केवल हमारी जानकारी में 22 ग्राम सभाओ ने आज से 3-4 वर्ष पहले दावा पत्र दर्ज किये थे, पर एक भी ग्राम को वन अधिकार हक़ प्रदान नहीं किया गया है। जिन ग्रामो को सरकार द्वारा कागज़ी तौर पे अधिकार प्रदान किया है, उनमें दावा पत्रों के वन विभाग के द्वारा भरा गया है , नियम अनुसार ग्राम सभा द्वारा नहीं।

और इन कागज़ी अधिकारों की जानकारी या फ़िर पट्टा , किसी भी ग्राम सभा को प्रदान नहीं किया गया है. गैर कार्यान्वयन की शिकायत दर्ज होने के बाद भी , न तो कोई जानकारी प्रदान की जाती है, और न ही कानून के पालन में सुधार आता है। कुछ अधिकार पत्रों मे ग्राम सभा के नाम के जगह संयुक्त वन प्रबंधन के नाम दर्ज है जो कनूनत गलत है I

2 . रावघाट खदान एवं रेलवे लाइन को स्थापित करने हेतु कानूनो का समस्त उल्लंघन
रावघाट परियोजना के निर्माण कार्य के लिए वन अधिकार कानून, पैसा कानून, भूमि अघिग्रहण कानून एवं संविधान का उल्लंघन किया गया है।
अदला बदली की गैर कानूनी प्रक्रिया द्वारा 4 ज़िलों की 138 हेक्टेयर पांचवी अनुसूची द्वारा सुरक्षित भूमि को भिलाई स्टील प्लांट की सामान्य क्षेत्र की भूमि के बदले हस्तांतरित किया गया है। इस प्रक्रिया में भू राजस्व सहिंता और राजस्व पुस्तक परिपत्र का उल्लंघन है , और वन अधिकार मान्यता कानून का भी पालन नहीं किया गया है। साथ ही साथ भूमि पर कब्ज़ा करना हेतु शासन द्वारा ग्रामवासियो पर बल एवं दबाव द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। उद्धरण के तौर पर :

3. सन 2017 में ग्राम कलगांव अंतागढ़ की ग्राम सभा में तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी, अंतागढ़ द्वारा ग्रामवासियो को धमकाया डराया गया , जिसके बाद उन्हें जबरन अदला बदली में अपनी 17 . 750 खेती एवं निस्तार की भूमि , जिसपे वह आदिवासी पीढ़ियों से जजिविका के लिए निर्भर है ,जोर जबरदस्ती से प्रदाय करनी पड़ी। अन्य विभागों में शिकायत करने के पश्चात भी, भूमि को बीएसपी को सौप दिया गया है और भूमि पर निर्माण कार्य जारी है।

4. ग्राम फरसकोट में 10 हेक्टेयर की भूमि देने का फैसला किया गया – पर जनवरी एवं मार्च 2017 में आयोजित 2 ग्राम सभाओं ने भूमि देने से इंकार कर दिया । इसके पश्चात भी अधिकारियों द्वारा सरपंच एवं अन्य व्यक्तियों पे दबाव डाला गया , और ग्राम सभा आयोजित करवा कर जबरन सहमति ली गयी। इस ग्राम सभा में भी ग्रामवासियो को यह जानकारी नहीं दी गयी , की गांव के किन खसरा न. से , किस कारण किस मद के लिए भूमि ली जा रही है, केवल उन्हें सहमति देने का फरमान सुनाया गया।

5. प्रस्तावित रावघाट खदान के क्षेत्र में, प्रभावित अनेक ग्रामो में कानून के द्वारा सामुदायिक वन अधिकार करना आरंभ तक नहीं हुआ है। ऐसे में यह खदान का निर्माण कार्य वन अधिकार कानून एवं संविधान के खिलाफ है, पर अभी भी जारी है।

अंतागढ़ क्षेत्र में रेलवे लाइन हेतु ऐसी भूमि का उपयोग किया जा रहा है, जिनका किसानो के पास व्यक्तिगत पट्टा है। वन अधिकार की मान्यता के बावजूद उनकी भूमि पर निर्माण कार्य आरम्भ होने से पहले उनकी सहमति नहीं प्राप्त करी गयी। भूमि के बदले में न तो उन्हें मुआवज़ा दिया जा रहा है, न ही नौकरी,या रोजगार जो कानून के खिलाफ है। इसके अलावा, प्रशासन द्वारा ग्रामवासियो पे दबाव डाला जा रहा है – जिससे कि कारण लोग अपने अधिकारों की मांग भी न करें।

इसका एक उदहारण है ग्राम पत्काल बेडा के श्यामसाय दर्रो, जो शिक्षाकर्मी है और अपने ग्राम में अकेले पढ़े लिखे होने के कारण शिकायत करने हेतु छुट्टी की आवेदन दर्ज करने के पश्चात तहसील कार्यालय में मुआवज़ा और नौकरी की मांग करने गए थे. बदले में उन्हें एसडीएम द्वारा धमकाया गया, और उनकी शिकायत पर उन्हें शिक्षा विभाग द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है I
इसके एलेवा ग्रामवासियो को पत्ता निरस्त किये जाने की भी धमकी दी जा चुकी है, जिसकी कोई कानूनी आधार नहीं है।
6. अन्य ग्राम जैसे की टोटिनडांगरा, फुलपाड़, जो की रावघाट खदान के करीब है वन अधिकार पट्टाधारी किसानो की भूमि पर पेड़ कटाई करी गयी है और निर्माण कार्य आरम्भ किया जा रहा है, जिस कारण ग्रामवासियो की आजीविका पर असर पड़ा है और भारी नुक्सान हुआ है। इस कटाई के पूर्व न तो उन्हें कोई जानकारी प्रदान की गयी , और न ही कोई मुआवज़ा या नौकरी दी जा रही है ।

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