रायगढ़ को प्रदूषण मुक्त जोन बनाने में सरकार गंभीर नहीं,जन आंदोलन ही एकमात्र विकल्प ःः गणेश कछवाहा

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9.12.2018 ,रायगढ 

शीतकाल आते ही प्रदूषण की भयावहता नजर आने लगी है।ज़हरीले काले काले डस्ट छतों, पेड़ -पौधों,नदी-नालों, तालाबों, जलाशयों, यहां तक की घरों के कमरों के अंदर तक में खतरनाक रूप से बहुत स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। पैरों के तलवे काले हो जा रहे हैं।खुले में भोज्य पदार्थ रखना, बड़ी और पापड़ बनाना मुश्किल हो गया है।

स्वांस,दमा, हृदय, लिव्हर, चर्म, एवं केंसर जैसी जानलेवा गम्भीर बीमारियों की शिकायतें तेजी से बढ़ने लगी हैं।पर्यावरण विभाग ने कुछ फैक्टरियो(कंपनियों) को नोटिस जारी कर आंख, मुंह, कान और हाथ बांधकर बैठ गया है। सरकार के सभी जिम्मेदार विभाग को बता रहे होंगे कि हमने प्रदूषण के खिलाफ कार्यवाही की है ,नोटिस भेजा है।पता नही उन्हें शर्म भी आती है या नहीं।

प्रदूषण खतरनाक सीमा को पार कर डेंजर ज़ोन में पहुंच गया है।लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया है।छोटे- छोटे नन्हें बच्चों एवं बुजुर्गों का जीवन बहुत खतरे में पड़ गया है।फैक्टरियों को खुले लगभग 25-28 साल हो गए।पर्यावरण विभाग केवल नोटिस जारी कर रहा है।क्या यह अपने आप को धोखा देना नहीं है?

पर्यावरण के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ,जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों व कलेक्टर का रवैया भी काफी गैर जिम्मेदाराना है।सांसद जो केन्द्र सरकार में मंत्री भी हैं उन्होंने इस संदर्भ में कुछ किया हो इसकी जानकारी जनता को नहीं है।स्थिति लगातार गम्भीर और खतरनाक होते जा रही है।जनसंगठनों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध नागरिकों, पत्रकारों एवं मीडिया के साथियों द्वारा बार बार प्रदूषण की भयावहता से सरकार को अवगत कराया गया उसके बावजूद सरकार ने कोई विशेष ध्यान नहीं दिया।अब तो यह खतरा बहुत बढ़ गया है। लोगों का जीवन ही खतरे में पड़ गया है।पूरा जीवजगत संकट में है। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?क्या जिला प्रशासन, कलेक्टर, जनप्रतिनिधी विधायक, सांसद मंत्री और औद्योगिक घराने नहीं है? सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब लोगों का जीवन ही खतरे में पड़ जाएगा तो ऐसे विकास का क्या करेंगे?

जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा ने लगातार विभिन्न आन्दोलनों ज्ञापनों, लेखों, चर्चाओं, वार्ताओं के माध्यम से विगत 25 वर्षों से सरकार को प्रदूषण की समस्याओं और उसके दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए पर्यावरण संरक्षण की मांग करते रही है।सरकार ने छोटे मोटे औपचारिक कार्यवाही कर जिम्मेदारियों से हमेशा मुंह मोड़ा है।इससे सरकार,औद्योगिक घरानों,राजनेताओं के उच्च स्तरीय सांठगांठ की बू आती है।जो पूर्णतः अमानवीय एवं आपराधिक कृत्य है।लोगों का गुस्सा काफी बढ़ता जा रहा है।

ट्रेड यूनियन कौंसिल एवं जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा के साथी गणेश कछवाहा ने कहा कि -संघर्ष मोर्चा ने NGT को भी एक पत्र प्रेषित किया है। संघर्ष मोर्चा की मांग है कि-

*कृपया छोटे छोटे बच्चों के जीवन एवं भविष्य को ध्यान में रखते हुए छ. ग.शासन प्रत्येक स्कूलों एवं शहर के चारों दिशाओं में प्रदूषण मापक यंत्र की स्थापना अनिवार्य रूप से करे।
*प्रशासन द्वारा प्रदूषण का डाटा प्रतिदिन अखबार, मीडिया,एवं रेडियो के माध्यम से जारी किया जाना चाहिए।ताकि जनता को यह जानकारी हो कि कितना प्रदूषण है।और हमें बचाओ के लिये क्या करना चाहिए।
*उद्योगों में ई एस पी अनिवार्य रूप से नियमित चालू रखा जाए ।इसकी निरन्तर उचित मोनिटरिंग सुनिश्चित की जाय।
* पर्यावरण विभाग के अनुसार रायगढ़ में उद्योगों को ऑनलाइन मोनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा गया है।परन्तु उनका प्रदूषण डाटा इंटरनेट पर आम जनता को उपलब्ध नहीं हो रहा है।यह सवाल तेजी से उभर रहा है कि वे उद्योग इंटरनेट से जुड़े भी हैं या नहीं।उन उद्योगों का डाटा इंटरनेट पर जनता के लिए अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
*उद्योगों के फ्लाई एस की यत्र तत्र मनमानी डम्पिंग पर सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए।फ्लाई एस के रखरखाव नियमों एवं शर्तों का अनुपालन पूरी सख्ती से किया जाना चाहिए।
*उद्योगों के अपशिष्ट एवं जहरीले रसायनों तथा नगर निकाय (रहवासी क्षेत्रों )की गंदगियों को नदी नालों ,जलाशयों एवं जलस्त्रोतों में न फेंका जाय।इसपर पूरी सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए।
*कोयला आधारित नए उद्योगों की स्थापना व विस्तार पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
रायगढ़ में स्थित प्रमुख नदियाँ केलो, महानदी एवं मांड पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।केलो डेम बनने के बावजूद डेम के आगे शहर में आते आते केलो तो पूर्णतः प्रदूषित हो गई है और उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है।

आपसे हमाराअनुरोध है कि कृपया छोटे -छोटे बच्चों के जीवन एवं भविष्य ,तथा जीवजगत को बचाने के लिये पर्यावरण संरक्षण हेतु आवश्यक एवं उचित ठोस कार्यवाही करने की कृपा करें।
जिला प्रशासन, कलेक्टर, सांसद एवं जन प्रतिनिधियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे आकर ईमानदारी पूर्वक सख्ती से कार्यवाही करना होगा।अन्यथा जनता के पास जनांदोलन के अलावा और कोई विकल्प शेष नहीं होगा।इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन होगी।

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