भोपाल गैस त्रासदी विश्व की भयानक दुर्घटनाओं में से एक हैःः  डॉ दिनेश मिश्र.

जेआर दानी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम.

4.12.2018 . रायपुर 

 भोपाल गैस त्रासदी के चौतीसवी वर्षगांठ के मौके पर जेआर दानी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष एवं नेत्र विशेषज्ञ डॉ दिनेश मिश्र ने कहा 3 दिसंबर 1984 को भोपाल में यूनियन कार्बाइड के प्लांट से मिथाइल आइसोसायनाइड गैस का रिसाव विश्व की भयावह दुर्घटनाओं में से एक थी, जो 34 वर्षों के बाद भी लोगों के जेहन में है , रात को होने वाली गैस के रिसाव से जहां भोपाल लाखों लोग प्रभावित हुए वहीं हजारों निर्दोष लोगों ने सोते सोते ही अपनी जान गवा दी, बड़े-बड़े औद्योगिक संयंत्रों के रखरखाव और सुरक्षा प्रबंधन में लापरवाही के चलते ऐसी घटनाएं दुबारा ना घटे इस बात पर ध्यान के जाने की आवश्यकता है.

डॉ. मिश्र ने कहा कि भोपाल गैस कांड में मिथाइल आइसोसाइनाइट नामक गैसजिसका उपयोग कीटनाशक बनाने के लिये किया जाता था उसके के टैंक में पानी का रिसाव हो जाने से अत्यंत ऊष्मा और दबाव पैदा हो गया था तथा टंकी का तापमान 200 डिग्री के पार पहुंच गया था, जिसके तत्पश्चात विषैली गैस का रिसाव वातावरण में हो गया और 45 से 50 मिनट के अंतराल में लगभग तीस मीट्रिक टन गैस का रिसाव वायुमंडल में हो गया था, भोपाल के वातावरण में जहरीली गैस के बादल के प्रभाव की संभावनाएं आज भी चर्चा का विषय बनी हुई है सम्भवतः मिक के उपरांत गैस के बादल में फास्जिन, हाइड्रोजन सायनाइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोक्लोराइड आदि के अवशेष पाए गए थे, भोपाल की लगभग पाँच लाखसे अधिक लोग इस विषैली गैस से प्रभावित हुए थे, जिसमें से 2 लाख लोग 15 वर्ष की आयु से कम थे ,3000 से अधिक गर्भवती महिलाएं थी ,उन्हें शुरुआती दौर में तो कहां से उल्टी आंखों में उलझन और को टर्न को अनुभव हुआ और बाद में विषैली गैस के प्रभाव के कारण हजारों लोग मृत्यु के शिकार हुए, लाखों लोग अस्थाई और स्थाई रूप से अपंगता के भी शिकार हुए तथा उस समय सरकार ने उनके इलाज और पुनर्वास के लिए व्यवस्थाएं भी आरम्भ की , पर पीड़ितों की संख्या के मुकाबले अपर्याप्त थी वहीं मध्य प्रदेश के अलावा ,देश केअन्य प्रदेशों चिकित्सकों ने भी अपनी सेवाएं दी .

रायपुर मेडिकल कॉलेज से भी चिकित्सकों का दल भोपाल गैस कांड के प्रभवितों के उपचार के लिए गया था,भोपाल की गैस त्रासदी विश्व की बड़े हादसों में से एक है ,इस घटना ने फैक्ट्री के सुरक्षा प्रबंध एवं रखरखाव में कमी की पोल खोल कर रख दी थी और मल्टीनेशनल कम्पनी के सुरक्षा संबंधी दावों की हवा निकाल दी थी . डॉ. मिश्र ने कहा आज भी, औधोगिक संयंत्रों,और सार्वजनिक स्थानों,सार्वजनिक कार्यक्रमों में जन सुरक्षा के लिए अत्यधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है, पिछले दिनों भिलाई इस्पात संयंत्र हुई दुर्घटना में अनेक कर्मचारी जिंदा जल गए ,तो दशहरे में अमृतसर में रावण दहन देखते समय सैकड़ों लोग ट्रेन से कट गए, इसके अतिरिक्त विभिन्न धार्मिक उत्सवों और तीर्थस्थानों में अक्सर होने वाली दुर्घटनाओं में हजारों लोगों कुचलने और दबने और मरने की खबरें आती है जो चिंताजनक हैं.

डॉ मिश्र ने कहा देश के लगभग सभी प्रदेशों में औद्योगिक विकास के चलते अनेक पावर प्लांट स्टील प्लांट ,फैक्टरी स्थापित हुई हैं ,उनके आसपास रहने वाले ग्रामीण अपने गाँवों में प्रदूषण और असुरक्षा की शिकायत करते रहते हैं हमारे आसपास ही उरला ,बिरगांव, सिलतरा के नजदीक के घरों दुकानों सड़कों में प्लांट से निकलने वाले प्रदूषित काले धुंवे, धूल की परत बिछीरहती है जो आम लोगों के साथ पशुओं, पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाती है, कुम्हारी के पास में एक शराब की फैक्टरी थी, जहां से हमेशा शहर में दुर्गन्ध पूर्ण हवा चलती थी जिसकीबदबू से लोग परेशान रहा करते थे,और लोगों ने शिकायतें भी थीं , तबबाद में उस पर नियंत्रण हुआ.

डॉ मिश्र ने कहा कुछ औद्योगिक दुर्घटनाओं और हादसों के परिणाम तुरंत पता चल जाते है लेकिन जो धीमे-धीमे बढ़ने वाला प्रदूषण है जोआआसपास के संयंत्रों की हवा से ,उससे बाहर निकलने वाले पानी से होता है उसका नुकसान और दुष्परिणाम धीरे-धीरे सामने आते हैं और पीड़ित लोग एकजुट नहीं होते इसलिए उनकी बात नहीं सुनी नहीं जाती लोगों को इस संदर्भ में जागरूक रहने की आवश्यकता है, सरकारी एजेंसियों तथा ऐसे उद्यमों की सुरक्षा एजेंसियों इसमें ध्यान देने की आवश्यकता होती है. भोपाल गैस कांड के प्रभावित लोगों में से आज भी बहुत सारे लोग जिंदा है जो बिना किसी गलती के अनजानी सजा भुगत रहे हैं अब इस 34 वी बरसी में उन सबके लिए तो और प्रभावितों याद करते हुए हम यही चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी दुर्घटना कहीं भी ना हो जिससे अनेक मासूमों को बेवजह शिकार होना पड़े. कार्यक्रम का संचालन जेआर दानी गर्ल्स स्कूल के प्राचार्य श्री विजय खंडेलवाल ने किया.

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